अर्थव्यवस्था

क्या है IFR और RBI ने इसे हटाने का फैसला क्यों लिया? बैंकिंग सेक्टर पर असर समझें

बैंकों पर अतिरिक्त रिजर्व का दबाव खत्म, पूंजी मजबूत होगी और लोन देने की क्षमता बढ़ सकती है

Published by
बीएस वेब टीम   
Last Updated- April 08, 2026 | 3:28 PM IST

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बुधवार को बैंकों के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। RBI ने कमर्शियल बैंकों के लिए Investment Fluctuation Reserve यानी IFR की अनिवार्यता खत्म करने का ऐलान किया है। इस कदम का मकसद बैंकों की पूंजी स्थिति को मजबूत करना है।

क्या होता था IFR और क्यों हटाया गया?

अब तक बैंक IFR के रूप में एक अतिरिक्त रिजर्व रखते थे, ताकि उनके निवेश पोर्टफोलियो की वैल्यू गिरने पर होने वाले नुकसान को संभाला जा सके। लेकिन RBI का कहना है कि बैंक पहले से ही मार्केट रिस्क के लिए पर्याप्त पूंजी रखते हैं और निवेश से जुड़े नियम भी मजबूत हैं। ऐसे में अलग से IFR रखने की जरूरत अब नहीं है। RBI ने साफ किया कि यह नियम सभी कमर्शियल बैंकों और लोकल एरिया बैंकों पर लागू होगा, लेकिन स्मॉल फाइनेंस बैंक, पेमेंट बैंक और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक इस दायरे में शामिल नहीं होंगे।

RBI ने यह भी कहा कि बाकी बैंकों के लिए नियमों में बदलाव किया जाएगा, ताकि सभी के लिए नियम स्पष्ट और एक जैसे हों। इसके लिए जल्द ही ड्राफ्ट गाइडलाइंस जारी की जाएंगी।

Also Read: RBI MPC 2026: दरें तो नहीं बदलीं, लेकिन क्या अब असली चुनौती शुरू हो गई है?

CRAR नियमों में भी राहत

RBI ने एक और अहम प्रस्ताव रखा है। अब बैंकों को अपने तिमाही मुनाफे को पूंजी अनुपात यानी CRAR में जोड़ने के लिए पहले जैसी सख्त शर्तों का पालन नहीं करना पड़ेगा। पहले NPA प्रावधान से जुड़ी एक सीमा तय थी, जिसे अब हटाने की योजना है। इससे बैंकों को अपनी पूंजी स्थिति दिखाने में ज्यादा लचीलापन मिलेगा।

मौद्रिक नीति के साथ हुआ ऐलान

ये सभी फैसले RBI की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के दौरान लिए गए। इस बैठक में RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता में रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखा गया। साथ ही RBI ने यह भी माना कि वेस्ट एशिया में जारी तनाव जैसे वैश्विक जोखिम आगे अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकते हैं।

इस फैसले से बैंकों पर अतिरिक्त रिजर्व रखने का दबाव कम होगा और उनकी पूंजी स्थिति बेहतर दिखेगी। इससे बैंक ज्यादा कर्ज देने में सक्षम हो सकते हैं, जिससे अर्थव्यवस्था को भी सपोर्ट मिल सकता है। (पीटीआई के इनपुट के साथ)

First Published : April 8, 2026 | 3:28 PM IST