अर्थव्यवस्था

रुपये की गिरावट थामने के लिए ब्याज दरें नहीं बढ़ाएगा RBI, रीपो रेट स्थिर रहने की उम्मीद: एक्सपर्ट

डॉलर के मुकाबले रुपये में रिकॉर्ड गिरावट के बावजूद, अर्थशास्त्रियों का मानना है कि RBI ब्याज दरें बढ़ाने के बजाय महंगाई नियंत्रण और विदेशी मुद्रा प्रबंधन पर अलग से ध्यान देगा

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अंजलि कुमारी   
Last Updated- June 02, 2026 | 9:48 PM IST

रुपये को गिरावट से बचाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा ब्याज दरों का उपयोग किए जाने की संभावना नहीं है। अर्थशास्त्रियों को उम्मीद है कि केंद्रीय बैंक महंगाई दर पर अपना ध्यान केंद्रित रखेगा और मुद्रा में अस्थिरता को प्रबंधित करने के लिए हस्तक्षेप और नियामक उपायों पर बना रहेगा।

छह सदस्यों वाली मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) कल से 3 दिवसीय विचार-विमर्श शुरू करेगी, जिसमें ब्याज दरों पर निर्णय लिया जाएगा। निर्णय शुक्रवार को घोषित किया जाएगा। एमपीसी ने पिछली 2 बैठकों में नीतिगत रीपो दर को 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखा है। 

पश्चिम एशिया में फरवरी के अंत में शुरू हुए संघर्ष के कारण इस कैलेंडर वर्ष में अब तक  डॉलर के मुकाबले रुपया 5.66 प्रतिशत कमजोर हुआ है। इस संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि हुई है, जिससे भारत के चालू खाते के घाटे में वृद्धि हो सकती है। यह  भारतीय मुद्रा के लिए एक प्रमुख नकारात्मक कारक है।

मंगलवार को  रुपया 0.29 प्रतिशत गिरकर  95.27 प्रति डॉलर पर बंद हुआ, जबकि पिछले दिन यह 95 रुपये प्रति डॉलर पर था। आयातकों की ओर से डॉलर की मांग के कारण यह गिरावट आई। पिछले एक साल में भारतीय मुद्रा में 10 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई है।

अर्थशास्त्रियों का कहना है कि मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) द्वारा महंगाई दर के अपने लचीले ढांचे के तहत मौद्रिक नीति और विनिमय दर प्रबंधन के बीच स्पष्ट अलगाव बनाए रखने की संभावना है। नोमूरा ने रिपोर्ट में कहा, ‘रिजर्व बैंक महंगाई दर को लेकर एक रूढ़िवादी लक्ष्य रखने वाला केंद्रीय बैंक है। मुद्रा की ब्याज दर से रक्षा करने से जब भी रुपया कमजोर होगा, नीतिगत सख्ती की उम्मीदें पैदा हो सकती हैं, जो नीति को लेकर एक खतरनाक मिसाल होगी।’

रिपोर्ट में कहा गया है कि मौद्रिक नीति समिति द्वारा एकमत से 5.25 प्रतिशत रीपो रेट बरकरार रखे जाने के फैसले की उम्मीद है।   इसमें तर्क दिया गया है कि दर वृद्धि मुद्रा की रक्षा के लिए एक अप्रभावी उपकरण है। 

अर्थशास्त्रियों को उम्मीद है कि केंद्रीय बैंक रुपये पर दबाव के बावजूद महंगाई पर अपना ध्यान केंद्रित रखेगा। 

डीबीएस बैंक की वरिष्ठ अर्थशास्त्री और कार्यकारी निदेशक राधिका राव ने कहा, ‘एमपीसी द्वारा महंगाई दर को प्राथमिकता दिए जाने की संभावना है। वह मुद्रा और बॉन्ड बाजारों को स्थिर करने के लिए अन्य साधनों पर निर्भर रहेगा।’

राव ने कहा कि समग्र महंगाई दर अभी भी रिजर्व बैंक के 2 से 6 प्रतिशत लक्ष्य सीमा के मध्य बिंदु के करीब है, जबकि ईंधन की बढ़ी कीमतों का पूरा असर अब तक सामने नहीं आया है। अर्थशास्त्रियों को उम्मीद है कि केंद्रीय बैंक देखो और इंतजार करो की नीति अपनाएगा।  

 बैंक ऑफ बड़ौदा ने एक रिपोर्ट में कहा, ‘एक तर्क यह हो सकता है कि रिजर्व बैंक दरों को बढ़ाकर और उच्च पूंजी प्रवाह को आकर्षित करके मुद्रा की रक्षा करे। हालांकि, दर कार्रवाई के माध्यम से मुद्रा प्रबंधन सीधे तौर पर मौद्रिक नीति के दायरे में नहीं आता है।’

एमके ग्लोबल ने कहा कि रिजर्व बैंक की जून की समीक्षा में मौद्रिक नीति और विदेशी मुद्रा प्रबंधन के बीच अंतर को दोहराए जाने की संभावना है। ब्रोकरेज ने कहा, ‘भविष्य में नीतिगत दर में किसी भी वृद्धि का मकसद रुपये को बचाने के बजाय घरेलू मांग के दबाव को कम करना या महंगाई दर की अपेक्षाओं को नियंत्रित करना होगा।’

First Published : June 2, 2026 | 9:44 PM IST