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RBI का बही-खाता बीते वित्त वर्ष में ढाई फीसदी बढ़कर 63.45 लाख करोड़ रुपये पर पहुंचा

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Last Updated- May 30, 2023 | 3:32 PM IST
RBI Dividend: What is the reason for Reserve Bank of India giving huge dividend to the government? economists explained RBI Dividend: रिजर्व बैंक के सरकार को भारी लाभांश देने की क्या है वजह? अर्थशास्त्रियों ने समझाया

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) का बही-खाता बीते वित्त वर्ष 2022-23 में 2.5 फीसदी बढ़कर 63.45 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया। केंद्रीय बैंक की मंगलवार को जारी वार्षिक रिपोर्ट से यह जानकारी मिली है। मुख्य रूप से आमदनी बढ़ने की वजह से रिजर्व बैंक के बही-खाते का आकार बढ़ा है।

केंद्रीय बैंक का बही-खाता देश की अर्थव्यवस्था के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इससे मुख्य रूप से मुद्रा जारी करने के कामकाज के अलावा मौद्रिक नीति और आरक्षित कोष प्रबंधन उद्देश्य का पता चलता है।

रिपोर्ट के अनुसार, रिजर्व बैंक के बही-खाते का आकार 31 मार्च, 2023 को 1,54,453.97 करोड़ रुपये या 2.5 फीसदी बढ़कर 63,44,756.24 करोड़ रुपये हो गया। जबकि 31 मार्च, 2022 को यह 61,90,302.27 करोड़ रुपये पर था।

वित्त वर्ष के दौरान केंद्रीय बैंक की आय जहां 47.06 फीसदी बढ़ी, वहीं उसके खर्च में 14.05 करोड़ रुपये की वृद्धि हुई। वित्त वर्ष के अंत तक रिजर्व बैंक के पास 87,416.22 करोड़ रुपये का अधिशेष था। एक साल पहले यह 30,307.45 करोड़ रुपये था। इस तरह रिजर्व बैंक का अधिशेष 188.43 फीसदी बढ़ा। केंद्रीय बैंक अधिशेष को लाभांश के रूप में केंद्र सरकार को स्थानांतरित करता है।

रिजर्व बैंक ने कहा, ‘संपत्ति में बढ़ोतरी विदेशी निवेश, सोने और ऋण और अग्रिम में क्रमश: 2.31 फीसदी, 15.30 फीसदी और 38.33 फीसदी की वृद्धि की वजह से हुई। वहीं देनदारी की बात की जाए, तो इसमें वृद्धि नोट जारी करने, पुन:मूल्यांकन खाते और अन्य देनदारियों की वजह से क्रमश: 7.81 फीसदी, 20.50 फीसदी और 79.07 फीसदी रही।

रिपोर्ट में कहा गया है कि 31 मार्च, 2023 तक कुल संपत्तियों में घरेलू संपत्तियों का हिस्सा 27.69 फीसदी और विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों और सोने (स्वर्ण जमा और भारत में रखा गया सोना) 72.31 फीसदी रहा। एक साल पहले यह क्रमश: 28.22 फीसदी और 71.78 फीसदी था। आकस्मिक कोष के लिए 1.31 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया और इसे स्थानांतरित किया गया। वहीं संपत्ति विकास कोष (एडीएफ) के लिए कोई प्रावधान नहीं किया गया।

केंद्रीय बैंक ने 2022-23 में नोट छापने पर 4,682.80 करोड़ रुपये खर्च किए। यह 2021-22 के आंकड़े 4,984.80 करोड़ रुपये से कुछ कम है। 31 मार्च, 2023 तक रिजर्व बैंक के पास 794.63 टन का स्वर्ण भंडार था। एक साल पहले यह 760.42 टन था।

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First Published - May 30, 2023 | 3:32 PM IST (बिजनेस स्टैंडर्ड के स्टाफ ने इस रिपोर्ट की हेडलाइन और फोटो ही बदली है, बाकी खबर एक साझा समाचार स्रोत से बिना किसी बदलाव के प्रकाशित हुई है।)

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