अर्थव्यवस्था

अप्रैल में जीएसटी का नया कीर्तिमान: ₹2.43 लाख करोड़ का रिकॉर्ड संग्रह, पर घरेलू खपत में दिखी नरमी

आम तौर पर अप्रैल में जीएसटी संग्रह में तेजी आती है क्योंकि कंपनियों का मार्च के अंत तक बिक्री लक्ष्य पूरा करने और अपने वित्त वर्ष के खाते बंद करने पर जोर रहता है

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मोनिका यादव   
Last Updated- May 01, 2026 | 10:57 PM IST

अप्रैल महीने में शुद्ध माल एवं सेवा (जीएसटी) कर संग्रह 7.3 फीसदी बढ़कर 2.11 लाख करोड़ रुपये रहा। आयात से जुड़ी कर प्रा​प्तियों में जबरदस्त तेजी से जीएसटी संग्रह बढ़ा है। घरेलू लेनदेन से आय वृद्धि धीमी ही रही। सरकारी आंकड़ों से इसकी जानकारी मिली।

मांग को बढ़ावा देने के लिए सितंबर 2025 में जीएसटी कटौती के बावजूद सकल जीएसटी प्राप्तियां अप्रैल में रिकॉर्ड 2.43 लाख करोड़ रुपये रही। आम तौर पर अप्रैल में जीएसटी संग्रह में तेजी आती है क्योंकि कंपनियों का मार्च के अंत तक बिक्री लक्ष्य पूरा करने और अपने वित्त वर्ष के खाते बंद करने पर जोर रहता है। 

कुल घरेलू राजस्व 1.85 लाख करोड़ रुपये होने के बावजूद शुद्ध घरेलू प्रा​प्तियां महज 0.3 फीसदी बढ़कर 1.65 लाख करोड़ रुपये रही। इसकी वजह ज्यादा रिफंड रहा जिससे बढ़त बेअसर हो गई। इसके विपरीत आयात से होने वाला शुद्ध जीएसटी राजस्व 42.9 फीसदी बढ़कर 45,784 करोड़ रुपये रहा। कुल आयात राजस्व 57,580 करोड़ रुपये रहा जिससे कुल मिलाकर बढ़ोतरी हुई। अप्रैल में 31,793 करोड़ रुपये का रिफंड जारी किया गया जो पिछले साल की समान अव​धि से 19.3 फीसदी अ​धिक है। घरेलू स्तर पर रिफंड 54.6 फीसदी बढ़ा जबकि आयात से संबं​धित रिफंड में 14 फीसदी का इजाफा हुआ। 

केपीएमजी में अप्रत्यक्ष कर के प्रमुख एवं पार्टनर अ​भिषेक जैन ने कहा, ‘ अप्रैल के रिकॉर्ड जीएसटी संग्रह में चक्रीय और संरचनात्मक, दोनों तरह के कारक झलकते हैं। अप्रैल 2026 में कुल जीएसटी संग्रह 2.43 लाख करोड़ रुपये के ऐतिहासिक उच्च स्तर पर पहुंच गया। हालांकि साल के आखिर में होने वाले समायोजन से हमेशा चक्रीय बढ़त मिलती है लेकिन इस स्तर का रिकॉर्ड एक ऐसी अंतर्निहित आर्थिक मजबूती को दर्शाता है जिसे पूरी तरह से नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। जीएसटी राजस्व में यह स्थिर उछाल स्पष्ट रूप से मजबूत कर प्रशासन, डिजिटलीकरण और कर आधार के विस्तार को दर्शाता है।’

प्राइस वॉटरहाउस ऐंड कंपनी में पार्टनर प्रतीक जैन ने कहा कि मौजूदा रुझान मोटे तौर पर उम्मीद के मुताबिक ही है। लेकिन उन्होंने एक उभरते हुए असंतुलन की ओर भी इशारा किया। उन्होंने कहा, ‘जीएसटी 2.0 के बाद हर महीने 7 से 8 फीसदी की स्थिर वृद्धि अब सामान्य बात बनती दिख रही है, जो मोटे तौर पर बजट अनुमान के अनुरूप है। खास बात यह है कि आयात से होने वाले राजस्व में वृद्धि, घरेलू लेनदेन में होने वाली वृद्धि से कहीं ज्यादा है। यह इस बात का संकेत हो सकता है कि खपत में कुछ नरमी आई है। संभव है कि मौजूदा नभू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच गैर-जरूरी खर्च में कमी आई हो।’

ईवाई में पार्टनर सौरभ अग्रवाल ने कहा कि भले ही मुख्य आंकड़े मजबूत बने हुए हों, लेकिन नीतियों को फिर से समायोजित करने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा, ‘मुख्य आंकड़े उत्साहजनक हैं लेकिन घरेलू जीएसटी प्रा​प्तियों में मामूली बढ़त और आयात-संबंधी संग्रह में हुई भारी वृद्धि के बीच का अंतर रणनीतिक बदलाव की जरूरत बताता है। तेजी से बदलते वैश्विक परिदृश्य में हमें अपनी नीतिगत रूपरेखा की गहन समीक्षा करनी चाहिए ताकि घरेलू विनिर्माण को और अधिक प्रोत्साहन दिया जा सके और यह सुनिश्चित हो सके कि ‘मेक इन इंडिया’ वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में हो रहे बदलावों के साथ कदम से कदम मिलाकर चल सके।’

उन्होंने कहा कि रिफंड की प्रक्रिया में सरकार द्वारा लाई गई तेजी से तरलता और औद्योगिक गति को बढ़ावा मिल रहा है। हालांकि अग्रवाल ने आगाह किया कि मौजूदा उछाल शायद ज्यादा समय तक न टिके।

अग्रवाल ने कहा, ‘अप्रैल के रिकॉर्ड संग्रह व्यवसायों और कर अधिकारियों द्वारा साल के आखिर में की जाने वाली कोशिश को दिखाते हैं और आने वाले महीनों में जीएसटी संग्रह के स्थिर होने की संभावना है। जैसे-जैसे नया वित्त वर्ष आगे बढ़ेगा, इसमें क्रमिक गिरावट आ सकती है।’

केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 27 के लिए 10.2 लाख करोड़ रुपये जीएसटी राजस्व का लक्ष्य रखा है जो वित्त वर्ष 2026 के लिए अनुमानित 10.46 लाख करोड़ रुपये से थोड़ा कम है।

First Published : May 1, 2026 | 10:24 PM IST