लाल सागर में बढ़ते संघर्ष के कारण भारत के पेट्रोलियम प्रोडक्ट निर्यात को चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। तेल सप्लाई के लिए लाल सागर रूट का उपयोग करने वाले जहाजों पर यमन के हौथी विद्रोहियों के हमलों के कारण व्यवधान हुआ है। नतीजतन, कई जहाज अब पश्चिमी बाजारों में ईंधन पहुंचाने के लिए लंबा रास्ता अपना रहे हैं, जिससे भारत की विदेशी बिक्री पर असर पड़ रहा है।
यूरोप में डीजल की बिक्री पर प्रभाव:
यूरोप भारत की डीजल बिक्री का एक प्रमुख बाजार है। लाल सागर मुद्दे की वजह से यहां जनवरी में 77% की भारी गिरावट आई है। यह महत्वपूर्ण है क्योंकि यूरोप भारत के कुल ईंधन निर्यात में लगभग 30% का योगदान देता है, जिससे भारतीय पेट्रोलियम उत्पादों की कुल बिक्री पर असर पड़ रहा है।
भारत के निर्यात को मिल रहा तगड़ा कंपटीशन, कमाई पर पड़ रहा असर:
भारत की सप्लाई संबंधी समस्याओं के कारण कंपटीटर अब यूरोप में ईंधन बेच रहे हैं। ईंधन निर्यात का देश की इकॉनमी में एक महत्वपूर्ण रोल है। भारत ईंधन निर्यात से काफी कमाई करता है, जो उसकी अर्थव्यवस्था में $57.3 बिलियन का योगदान देता है, जो कुल निर्यात का लगभग 12.7% है।
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भारत के पूरे पेट्रोलियम प्रोडक्ट निर्यात पर पड़ा असर:
भारत का कुल पेट्रोलियम प्रोडक्ट निर्यात जनवरी में लगभग 23% गिरकर दिसंबर में 1.37 मिलियन बीपीडी की तुलना में 1.05 मिलियन बैरल प्रति दिन (bpd) तक पहुंच गया। यूरोप में ईंधन की बिक्री पर भारी असर पड़ा है, निर्यात दिसंबर से आधे से घटकर 205,000 bpd हो गया।
दूसरा रूट अपनाने से बढ़ा खर्च:
भारत से यूरोप तक ईंधन ले जाने वाले जहाज आमतौर पर स्वेज नहर से होते हुए सबसे छोटे रास्ते से आते हैं। संघर्ष के कारण, कुछ जहाज अब केप ऑफ गुड होप के माध्यम से लंबा रास्ता ले रहे हैं, जिससे यात्रा में 4,000 से 6,000 मील की दूरी बढ़ जाती है, जिससे खर्च बढ़ जाती है और यात्रा का समय 3-4 सप्ताह बढ़ जाता है।
भारत की गैरमौजूदगी का फायदा उठा रहीं अमेरिकी कंपनियां:
भारत की प्रमुख रिफाइनर कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज ने अप्रैल से दिसंबर तक 35.7 अरब डॉलर की कमाई की। हालांकि, भारत के ईंधन निर्यात में गिरावट आई और अब, अमेरिकी सप्लायर यूरोप में भारत के गैप को भर रहे हैं, वे अब यूरोप के सबसे बड़े सप्लायर बन गए हैं और यूरोपीय डीजल बाजार में प्रगति कर रहे हैं।
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कैसा रहेगा भविष्य का मार्केट ट्रेंड:
यूरोपीय खरीदार रिस्क-फ्री ईंधन डिलीवरी का विकल्प चुन रहे हैं, जिससे अमेरिका से डीजल शिपमेंट में वृद्धि हो रही है। शिपिंग डेटा से पता चलता है कि लाल सागर संघर्ष कम होने तक अमेरिका यूरोपीय बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाता रहेगा।
व्यापक आर्थिक प्रभाव:
लाल सागर संघर्ष से यूरोप और अमेरिका में भारत के निर्यात पर असर पड़ने की आशंका है, जिससे शिपिंग लागत में वृद्धि होगी। कुल मिलाकर, लाल सागर संघर्ष ने भारत के ईंधन निर्यात के लिए बड़ी बाधाएं खड़ी कर दी हैं, जिससे प्रमुख बाज़ार प्रभावित हो रहे हैं, कंपटीशन में बदलाव आ रहा है और ईंधन निर्यात से देश की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ रहा है।