अर्थव्यवस्था

डॉलर के मुकाबले रुपया संभलेगा? RBI के उपायों से सितंबर तक मजबूती की उम्मीद

अब उम्मीद है कि सितंबर के आखिर तक रुपया सुधरकर 94.88 प्रति डॉलर के आसपास कारोबार करेगा

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अंजलि कुमारी   
Last Updated- June 07, 2026 | 10:45 PM IST

फरवरी के आ​खिर में अमेरिका-ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से डॉलर के मुकाबले रुपये में 4.17 फीसदी गिरावट आई है। लेकिन अब उम्मीद है कि सितंबर के आखिर तक रुपया सुधरकर 94.88 प्रति डॉलर के आसपास कारोबार करेगा। बिज़नेस स्टैंडर्ड द्वारा रुपये की चाल पर कराए गए सर्वेक्षण में यह अनुमान सामने आया। सर्वेक्षण में शामिल ज्यादातर प्रतिभागियों का मानना ​​है कि आने वाली तिमाही में रुपये में मजबूती बनी रह सकती है क्योंकि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा घोषित उपायों से धीरे-धीरे पूंजी का प्रवाह बढ़ेगा।

बीते शुक्रवार को डॉलर के मुकाबले रुपये ने 0.9 फीसदी सुधार के साथ 2 महीने में एक दिन की सबसे बड़ी बढ़त दर्ज की। यह उछाल आरबीआई द्वारा विदेशी निवेश को आकर्षित करने के उपायों की घोषणा के बाद आई। रुपये में यह बढ़त इस साल एक दिन में आई तीसरी सबसे बड़ी बढ़त थी। रुपया मजबूत होकर 94.94 प्रति डॉलर पर बंद हुआ जो 8 मई के बाद सबसे ऊंचा स्तर है। गुरुवार को रुपया 95.79 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। इस साल रुपया 5.34 फीसदी कमजोर हुआ है जबकि चालू वित्त वर्ष में इसमें 0.14 फीसदी गिरावट आई है।

सर्वेक्षण में शामिल प्रतिभागियों ने कहा कि आने वाले पूंजी प्रवाह के कुछ हिस्से का उपयोग आरबीआई अपनी फॉरवर्ड बुक के आकार को कम करने में कर सकता है। इससे रुपये को होने वाला फायदा सीमित हो सकता है। अप्रैल के आखिर तक फॉरवर्ड मार्केट में केंद्रीय बैंक की शुद्ध बकाया शॉर्ट डॉलर पोजीशन 95.30 अरब डॉलर थी।
बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा, ‘पूंजी के प्रवाह को बेहतर बनाने के लिए किए गए नीतिगत उपायों से रुपये में उतार-चढ़ाव के कम होने की उम्मीद है। सितंबर के बाद स्थिति सहज हो जाएगी।’

हालांकि कुछ लोगों का मानना ​​है कि हाल के उपायों के बावजूद रुपये पर दबाव बना रहेगा। उनका तर्क है कि विदेशी पूंजी को आकर्षित करने के लिए सरकार और आरबीआई द्वारा उठाए गए कदमों से मौजूदा माहौल में कोई खास निवेश नहीं आ पाएगा। महंगाई का दबाव बने रहने और अमेरिका में ब्याज दरें ऊंची रहने से भारतीय परिसंप​त्तियों का आकर्षण सीमित रह सकता है।

एसटीसीआई प्राइमरी डीलर के मुख्य अर्थशास्त्री आदित्य व्यास ने कहा, ‘केंद्रीय बैंक और सरकार निवेश लाने के लिए जो उपाय कर रहे हैं, संभव है कि मौजूदा माहौल में उससे ब​हुत ज्यादा पूंजी प्रवाह न आए। अभी अमेरिका में ब्याज दरें ऊंची हैं और इनके और बढ़ने की उम्मीद है क्योंकि अमेरिका में महंगाई दर ऊंची बनी हुई है।’

सितंबर तिमाही रुपये के लिए मौसमी तौर पर कमजोर रहती है जबकि दिसंबर तिमाही आम तौर पर मजबूत मानी जाती है। सर्वेक्षण में शामिल प्रतिभागियों को उम्मीद है कि साल की आखिरी तिमाही में रुपये में थोड़ा सुधार हो सकता है।

आईएफए ग्लोबल के संस्थापक और सीईओ अभिषेक गोयनका ने कहा कि अगर प​श्चिम एशिया में तनाव को छोड़ भी दें तब भी कई दूसरे जोखिम बने हुए हैं। इनमें बाजार में एआई के बुलबुले के फटने की आशंका, निजी ऋण बाजार में दबाव और घरेलू अर्थव्यवस्था पर कमजोर मॉनसून का असर शामिल है।

First Published : June 7, 2026 | 10:45 PM IST