केंद्र और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने व्यापार सौदों के निपटान के लिए विशेष रुपया खाता खोलने की कार्ययोजना तैयार कर ली है। इसके साथ बैंकों और इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (आईबीए) को विदेशी बैंकों से संपर्क करने तथा वोस्ट्रो खाता खोलने पर जोर देने के लिए प्रेरित किया है। बैंकों से कहा गया है कि वे जल्द से जल्द 115 से अधिक प्रस्ताव निपटाएं और रूस के बैंकों के साथ लेनदेन करने में पर्याप्त सतर्कता बरतें।
आज हुई बैठक में केंद्र ने इस योजना का खाका पेश किया। बैठक में वाणिज्य एवं विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) भी शामिल था। इसमें व्यापार संगठनों को इस प्रारूप का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया गया है। इस कदम को भारतीय मुद्रा रुपये के अंतरराष्ट्रीयकरण के तौर पर देखा जा रहा है। इसके अलावा विदेश मंत्रालय विदेशी इकाइयों के बीच इस प्रारूप के प्रति जागरूकता लाने का काम शुरू कर चुका है।
वित्त मंत्रालय द्वारा अयोजित इस बैठक में आरबीआई, विदेश मंत्रालय, वाणिज्य विभाग के प्रतिनिधि और शीर्ष बैंकर शामिल थे। कार्ययोजना के अनुसार संबंधित बैंकों से आवेदन प्राप्त करने के बाद बैंक आंतरिक स्तर पर उनकी जांच करेंगे और मंजूरी के लिए आरबीआई के पास भेजेंगे। इसके बाद आरबीआई आवेदन को तेजी से मंजूरी देने के लिए आवश्यक प्रक्रिया करेगा।
बैंकों को श्रीलंका, रूस और यूक्रेन सहित राष्ट्रमंडल के कई देशों के बैंकों से 115 से ज्यादा प्रस्ताव मिले हैं। मामले की जानकारी रखने वाले एक अधिकारी ने कहा कि सबसे अधिक आवेदन आईसीआईसीआई बैंक के पास आए हैं। उसके बाद इंडसइंड बैंक, भारतीय स्टेट बैंक और यूको बैंक के पास आवेदन आए हैं। सरकार द्वारा अंतरराष्ट्रीय मुद्रा के रूप में रुपये की पहचान बनाने के प्रयास और प्रतिबंध का सामना कर रहे रूस एवं आर्थिक संकट से जूझ रहे श्रीलंका के साथ व्यापार के लिए रुपये में लेनदेन शुरू करने की सुविधा के मद्देनजर यह बैठक आयोजित की गई थी। एक अधिकारी ने कहा कि अभी तक आरबीआई को मंजूरी के लिए एक भी आवेदन नहीं मिला है। हालांकि सार्वजनिक क्षेत्र के कुछ बैंक अंतरराष्ट्रीय भुगतान को रुपये में करने की आरबीआई की व्यवस्था सुचारु करने की दिशा में काम कर रहे हैं।