अर्थव्यवस्था

‘उद्योग जगत को बदलना होगा अपना गेम प्लान’, भू-राजनीतिक संकट के बीच शक्तिकांत दास की सलाह

CII के कार्यक्रम में दास ने भू-राजनीतिक हलचल के बीच भारतीय उद्योगों को आत्मनिर्भर बनने, R&D बढ़ाने और जोखिम प्रबंधन मजबूत कर भविष्य की तकनीक में निवेश करने की रणनीतिक सलाह दी

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गुलवीन औलख   
Last Updated- May 11, 2026 | 10:24 PM IST

भारतीय उद्योग जगत को बढ़ती भू-राजनीतिक अनिश्चितता के बीच झटकों से निपटने के लिए खुद को रणनीतिक तौर पर नए सिरे से संगठित करना चाहिए। यह बात प्रधानमंत्री कार्यालय के प्रधान सचिव-2 शक्तिकांत दास ने आज कही। उन्होंने भारतीय अर्थव्यवस्था के दीर्घकालिक लचीलेपन में उद्योग की भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सरकार सुधारों को जारी रखेगी। 

दास ने भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के वार्षिक व्यापार ​सम्मेलन में कहा कि भारतीय कारोबारियों को अपने बहीखाते को मजबूत करना चाहिए, कर्मचारियों को नए सिरे से प्रशिक्षित करना चाहिए, बाजारों में विविधता लानी चाहिए और भविष्य की क्षमताओं एवं तकनीक में निवेश करना चाहिए। उन्होंने कहा कि कारोबारियों को अनुसंधान एवं विकास (आरऐंडडी) पर खर्च बढ़ाना चाहिए और उसे लागत के रूप में नहीं देखना चाहिए। 

दास ने कहा, ‘यह उद्यमों के लिए दमदार तरीके से सोचने, निडरता से नवाचार करने और उभरते अवसरों में रणनीतिक निवेश करने का क्षण है। भारतीय उद्योग जगत को महज वृद्धिशील प्रगति से आगे बढ़कर परामर्शकारी कार्रवाई की ओर बढ़ना चाहिए, वैश्विक चैंपियन तैयार करने चाहिए, दमदार आपूर्ति श्रृंखलाएं बनानी चाहिए, नई तकनीकों में अग्रणी बनना चाहिए और राष्ट्रीय चुनौतियों के लिए व्यापक तौर पर समाधान देना चाहिए।’ उन्होंने ऐसे सुझाव दिए जो स्थिरता, प्रतिस्पर्धात्मकता और दीर्घकालिक वृद्धि को रफ्तार दे सकते हैं।

दास ने कहा, ‘सुधारों को लेकर कोई ढिलाई नहीं है और मैं जोर देकर ऐसा करना चाहूंगा। नीतिगत निरंतरता के साथ-साथ समय पर और सोच-समझकर किए गए सुधारों से यह सुनिश्चित होगा कि भारत न केवल व्यापक आर्थिक स्थिरता बनाए रखेगा बल्कि एक विश्वस्तरीय प्रतिस्पर्धी और समावेशी अर्थव्यवस्था के रूप में भी उभरेगा।’

दास ने कहा कि सरकार दुर्लभ खनिज एवं दुर्लभ खनिज मैग्नेट से लेकर जहाज निर्माण, कपास की उपज और आर्टिफिशल इंटेलिजेंस जैसे तमाम क्षेत्रों में रणनीतिक आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए दमदार एवं दूरदर्शी उपाय कर रही है। भविष्य की अर्थव्यवस्था इन्हीं पर टिकी होगी।

दास ने कहा कि ‘कॉर्नर सॉल्यूशन’ में रुकावट आ रही थी और इसलिए यह लगातार कम असरदार होता जा रहा है। ‘कॉर्नर सॉल्यूशन’ का तात्पर्य उत्पादन के किसी एक ही स्रोत पर अत्यधिक निर्भरता से है। उन्होंने कहा, ‘भू-राजनीतिक संघर्ष और विखंडन के कारण कोई भी देश या एकल आपूर्ति श्रृंखला लगातार सबसे सस्ती, सुरक्षित या सबसे विश्वसनीय नहीं रही।’ उन्होंने कहा कि उद्योग की परिचालन रणनीतियों को विविधीकरण पर ध्यान देना चाहिए और लागत कम करने के बजाय बेहतर लचीलेपन को प्राथमिकता देनी चाहिए।

दास ने कहा, ‘आज नेतृत्व का अर्थ है जोखिम उठाने का साहस करना, कारोबारी मॉडलों की नए सिरे से परिकल्पना करना और वृद्धि को भविष्य के अवसरों के साथ जोड़ना। आज उद्योग जिस तरह निर्माण, बदलाव और नेतृत्व करेगा, वही कल भारत की आर्थिक वृद्धि, सामाजिक प्रगति और वैश्विक स्थिति को परिभाषित करेगा। उन्होंने भारतीय उद्योग जगत के नेताओं के लिए एक संभावित रूपरेखा के तहत सात समाधान बताए।

पहला, दास ने कहा कि भारतीय कारोबारियों को जोखिम प्रबंधन को मजबूत करना चाहिए, निर्णय लेने की क्षमता में सुधार करना चाहिए, चुस्ती दिखानी चाहिए और बाजार, तकनीक एवं अन्य उभरते घटनाक्रमों पर नजर रखना चाहिए। इससे कंपनियों को झटकों से निपटने, जल्द अनुकूलित होने और दमदार बनकर उभरने में मदद मिलेगी।

दूसरा, कंपनियों को अपने बहीखाते को मजबूत करना चाहिए क्योंकि दमदार बहीखाते बाहरी झटकों से निपटने, नकदी प्रवाह के दबावों को झेलने और निवेश के अवसर प्रदान करते हैं। तीसरा, कंपनियों को घरेलू सोर्सिंग पर जोर देते हुए उसमें विविधता लानी चाहिए और वि​भिन्न वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं से जुड़ना चाहिए। चौथा, प्रौद्योगिकी, स्वचालन और आर्टिफिशल इंटेलिजेंस उद्योगों को नया आकार दे रहे हैं। ऐसे में कर्मचारियों को नए सिरे से प्रशिक्षित करना चाहिए। पांचवां, नए बाजारों में विविधीकरण लानी चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘बाजार के विविधीकरण से जोखिम कम होगा, आय में ​​स्थिरता आएगी और मांग में नए रुझान का फायदा उठाने में मदद मिलेगी।’

छठा, दास ने प्रौद्योगिकी, नवाचार और क्षमता निर्माण में रणनीतिक निवेश करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि जो आज दीर्घकालिक नजरिये से निवेश करेंगे, वे ही कल सबसे अच्छी स्थिति में होंगे। सातवां, दास ने उद्योग से अनुसंधान और विकास पर व्यय बढ़ाने का आग्रह किया और इसे लागत के रूप में नहीं देखने को कहा। 

First Published : May 11, 2026 | 10:24 PM IST