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बुनियादी क्षेत्रों के उत्पादन में नरमी

Last Updated- December 11, 2022 | 2:31 PM IST

भारत के आठ बुनियादी क्षेत्र की वृद्धि नौ माह के निचले स्तर पर 3.3 फीसदी की गति से अगस्त में हुई है। इसका कारण उच्च आधार और इस्पात व बिजली उत्पादन वृद्धि में गिरावट है। उद्योग विभाग से जारी आंकड़े दर्शाते हैं कि पिछले महीने की तुलना में रिफाइनरी उत्पाद (7 फीसदी), उर्वरक (11.9 फीसदी)और सीमेंट (1.8 फीसदी) के  उत्पादन में इजाफा हुआ है जबकि कोयला(7.6 फीसदी), इस्पात (2.2फीसदी) और बिजली (0.9फीसदी) के उत्पादन में तेजी से गिरावट आई है। कच्चे तेल (-3.3 फीसदी) और प्राकृतिक गैस (-0.9 फीसदी) का उत्पादन लगातार तीसरे महीने संकुचित रहा।      
बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा कि बुनियादी क्षेत्र ने लगातार तीसरे महीने विकास दर में गिरावट दर्ज की है, जो आंशिक रूप से पिछले साल 12.2 फीसदी वृद्धि की सांख्यिकीय प्रभाव से प्रभावित है। हालांकि, एक अलग तस्वीर वास्तविक रूप से मंदी के कुछ संकेत देती है। उन्होंने कहा, ‘कोयला उत्पादन में सामान्य स्थिति में वापसी अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक है, जो अप्रैल-मई में यूक्रेन में युद्ध के कारण दबाव में थी जहां कोयले की कमी थी। अगले महीने से शुरू होने वाली रबी की बोआई की तैयारी में उर्वरक का अधिक उत्पादन सुखद है। रिफाइनरी उत्पादों ने देश में अधिक उठाव के साथ-साथ निर्यात के कारण अच्छा प्रदर्शन किया है। इसी तरह, बुनियादी क्षेत्र अगस्त में भी लगातार तीसरे महीने 1.5 फीसदी पर संकुचित रहा।
इंडिया रेटिंग्स के प्रमुख अर्थशास्त्री सुनील कुमार सिन्हा ने कहा कि चालू औद्योगिक सुधार कमजोर है क्योंकि बुनियादी क्षेत्र का उत्पादन अभी भी कोरोना काल के पहले के स्तर से 3.5 फीसदी अधिक है। उन्होंने कहा, ‘वास्तव में, कोयला और सीमेंट क्षेत्र का उत्पादन अगस्त में भी कोरोना काल के पहले के स्तर से पीछे हैं। आगे चलकर, मॉनसून खत्म होने तक सीमेंट और इस्पात क्षेत्रों के उत्पादन में दबाव बना रहा सकता है। इसलिए, इंडिया रेटिंग्स को उम्मीद है कि सितंबर में बुनियादी क्षेत्र की वृद्धि 3.5 फीसदी के बीच रहेगी।’
भारतीय रिजर्व बैंक ने शुक्रवार को वित्त वर्ष 2023 के लिए अपने वृद्धि अनुमान को 7.2 फीसदी से घटाकर 7 फीसदी कर दिया है। अपने मौद्रिक नीति वक्तव्य में आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा, ‘विस्तारित भू-राजनीतिक तनाव, वैश्विक वित्तीय स्थितियों को सख्त करने और कुल मांग के बाहरी घटक के कारण संभावित गिरावट से वृद्धि के लिए नकारात्मक जोखिम पैदा कर सकती है।’
आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (ओईसीडी) और एसऐंडपी ने सोमवार को वित्त वर्ष 2023 के लिए भारत का वृद्धि अनुमान क्रमशः 6.9 फीसदी और 7.3 फीसदी पर अपरिवर्तित रखा है। हालांकि, बढ़ते हुए नकारात्मक जोखिमों को भी उजागर किया है।
ओईसीडी ने अपने अंतरिम आर्थिक आउटलुक में कहा, ‘बाहरी मांग में नरमी के कारण भारत में वित्त वर्ष 2022 की 8.7 फीसदी सालाना वृद्धि दर घटकर वित्त वर्ष 23 में 7 फीसदी हो जाएगी और वित्त वर्ष 24 में करीब 5.75 फीसदी रह जाएगी। लेकिन, यह अभी भी एक कमजोर वैश्विक अर्थव्यवस्था के संदर्भ में तेजी से विकास का प्रतिनिधित्व करता है।’

First Published - September 30, 2022 | 10:21 PM IST

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