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एसऐंडपी ने 6.8 प्रतिशत किया महंगाई का अनुमान

Last Updated- December 11, 2022 | 4:17 PM IST

एसऐंडपी ग्लोबल रेटिंग ने आज वित्त वर्ष 2023 के लिए भारत में महंगाई दर में वृद्धि का अनुमान 50 आधार अंक बढ़ाकर 6.8 प्रतिशत कर दिया है। जिंसों के बढ़े दाम, बढ़ती ब्याज दरों और विदेशी विनिमय में उतार-चढ़ाव को देखते हुए एजेंसी ने यह फैसला किया है। हालांकि एसऐंडपी ने वित्त वर्ष के लिए वृद्धि के अनुमान में कोई बदलाव नहीं किया है और उसे 7.3 प्रतिशत पर बरकरार रखा है। भारतीय रिजर्व बैंक ने हाल की अपनी नीतिगत बैठक में वित्त वर्ष 23 के लिए महंगाई दर के अनुमान में कोई बदलाव न करते हुए उसे 6.7 प्रतिशत पर बरकरार रखा था।
 

रिपोर्ट में कहा गया है, ‘ऊर्जा की लागत में बढ़ोतरी और अर्थव्यवस्था खुलने के कारण महंगाई दर का दबाव फिर से बढ़ा है, लेकिन जुलाई के हाल के आंकड़ों से कुछ स्थिरता नजर आती है। कच्चे तेल के वैश्विक दाम में हाल की गिरावट की वजह से ऊर्जा की कीमतों के साथ चालू खाते के घाटे पर दबाव कुछ कम रहेगा।’
 

भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने अपनी हाल की नीतिगत समीक्षा में दर में 50 आधार अंक की बढ़ोतरी कर रीपो रेट 5.4 प्रतिशत कर दिया था।  साथ ही समावेशी नीति वापस लेने पर ध्यान बरकरार रखा है, जिससे महंगाई दर को लक्ष्य के भीतर रखा जा सके और वृद्धि को भी समर्थन मिलता रहे।
 

एसऐंडपी ग्लोबल में अर्थशास्त्री विश्रुत राणा ने कहा, ‘महंगाई पर काबू पाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक मौद्रिक नीति में सख्ती जारी रख सकता है।’ उन्होंने कहा कि हम इस समय अनुमान लगा रहे हैं कि वित्त वर्ष 23 के अंत तक मानक नीतिगत दर 5.65 प्रतिशत तक बढ़ेगी। भारत के सॉवरिन रेटिंग के बारे में एक दृष्टिकोण मुहैया कराते हुए एडऐंडपी ने कहा कि भारत बाहरी दबाव से जूझ रहा है, जिसमें जिंसों के बढ़े दाम, अमेरिकी डॉलर का दबदबा और वित्तीय स्थिति में सख्ती किया जाना शामिल है।
 

एसऐंडपी ग्लोबल रेटिंग के डायरेक्टर (सॉवरिन) एंड्रयू वुड ने कहा, ‘जिंसों के दाम ज्यादा होने, आयात बिल में बढ़ोतरी और निर्यात कमजोर पड़ने के कारण भारत में चालू खाते का घाटा लंबी अवधि तक उच्च स्तर पर रहने की उम्मीद है।’ उन्होंने कहा कि हम उम्मीद करते हैं कि वित्त वर्ष 23 की शेष अवधि के दौरान यह दबाव कम होगा। रेटिंग एजेंसी ने कहा कि भारत का बैंकिंग क्षेत्र अपनी स्थिति लगातार मजबूत कर रहा है, भले ही ब्याज दर, महंगाई दर बढ़ रही है और विनिमय दर में अस्थिरता है।
 

प्रमुख विश्लेषक और कॉरपोरेट रटिंग के डायरेक्टर नील गोपालकृष्णन ने कहा कि कंपनों के लिए काम करने का माहौल अभी बेहतर बना हुआ है और रेटिंग वाली ज्यादातर इकाइयों की ऋण की स्थिति बेहतर है, क्योंकि राजस्व बढ़ा हुआ है और नकदी की स्थिति ठीक है। उन्होंने कहा, ‘पिछले 2 साल से रेटिंग वाली संस्थाओं में उधारी कम करने की धारणा देखी जा रही है। हम उम्मीद करते हैं कि इन इकाइयों की कमाई में सुधार होगा और इसमें निरंतरता आएगी। इससे कर्ज घटाने में मदद मिलेगी।’

First Published - August 25, 2022 | 9:59 PM IST

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