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RBI मॉनिटरी पॉलिसी के पहले आई बड़ी खबर, देश में बढ़ा पर्सनल लोन का दायरा

Last Updated- December 11, 2022 | 2:40 PM IST

आज मौद्रिक नीति समीक्षा कमेटी (MPC) की बैठक के बीच देश की अर्थव्यवस्था से जुड़ी एक बुरी खबर आई है। यह खबर अर्थव्यवस्था की गति का मानक माने जाने वाले कारोबारी ऋण के बारे में है। 
 
हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक की एक रिपोर्ट जारी हुई जिसमें ये कहा गया है कि देश में कुल व्यापारी कर्ज की हिस्सेदारी पिछले 10 सालों में घटी है जबकि वहीं व्यक्तिगत कर्ज का हिस्सा बढ़ा है। यानी कि देश में व्यापार के लिए लोन लिए जाने की संख्या में गिरावट है जबकि आम आदमी ने व्ययक्तिगत लोन अधिक लिया है। अर्थव्यव्स्था में कारोबारी या औघौगिक कर्ज को इकोनॉमी की गति मापने का भी एक कारक माना जाता है। लेकिन देश में RBI द्वारा बीते कुछ समय में कई बार बढ़ाया गई ब्याज दरें, अर्थव्यवस्था में देखी जा रही धीमी गति पूरे देश की इकोनॉमी को प्रभावित करती नजर आ रही है।
 
बता दें, RBI बीते तीन बार से ब्याज दरों में 1.4 फीसदी की बढ़ोत्तरी कर चुका है। RBI ने बढ़ती महंगाई पर काबू पाने के लिए की थी, लेकिन इसका कोई प्रभाव पढ़ता देखाई नहीं दे रहा है। कल फिर RBI के गवर्नर नई ब्याज दरों की घोषणा करेंगे। 
 
RBI ने ‘भारत में अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों के कर्ज पर मूल सांख्यिकीय रिटर्न – मार्च 2022’ शीर्षक रिपोर्ट जारी की थी। रिपोर्ट के अनुसार, मार्च 2022 में औद्योगिक और व्यक्तिगत ऋणों की हिस्सेदारी करीब 27-27 प्रतिशत थी। औद्योगिक क्षेत्र के ऋण में 2021-22 में 4.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई जबकि एक साल पहले इसमें गिरावट दर्ज की गयी थी। 
 
रिपोर्ट के बारे में RBI का कहना था कि हाल के वर्षों में खुदरा क्षेत्र से ऋण की मांग बढ़ी है। साथ ही छोटे आकार के कर्ज का हिस्सा भी लगातार बढ़ रहा है। 
 
बता दें,  एक करोड़ रुपये तक के कर्ज की हिस्सेदारी मार्च 2022 में बढ़कर करीब 48 फीसदी हो गई।  यह हिस्सेदारी पांच साल पहले करीब 39 फीसद थी। वहीं, 10 करोड़ रुपये से ज्यादा के कर्ज का हिस्सा घटकर 40 प्रतिशत हो गया। यह कर्ज पांच साल पहले 49 प्रतिशत था।
 
RBI की इस रिपोर्ट में साफ तौर पर कहा गया है कि कुल बैंक ऋण में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की हिस्सेदारी घट रही है। 
 
बता दें, अनुसूचित कमर्शियल बैंकों के कुल कर्ज में पब्लिक क्षेत्र के बैंकों की हिस्सेदारी मार्च 2022 में 54.8 प्रतिशत रही जो पांच साल पहले 65.8 प्रतिशत और 10 साल पहले 74.2 प्रतिशत थी। दूसरी तरफ प्राइवेट क्षेत्र के बैंकों की हिस्सेदारी पिछले दस साल में करीब दोगुनी होकर 36.9 प्रतिशत हो गई। 
 
ऐसे में सभी नजरें ब्याज दरों को लेकर RBI के कल के ऐलान पर टिकीं हुई हैं।

First Published - September 29, 2022 | 2:35 PM IST

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