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रुपये में सौदों के निपटान का निर्णय बैंकों पर निर्भर

Last Updated- December 11, 2022 | 4:27 PM IST

केंद्र सरकार ने बैंकों से कहा है कि वे अंतरराष्ट्रीय सौदा का निपटान रुपये में करते समय प्रतिबंधित इकाइयों के साथ कारोबार नहीं करने, खास तौर पर रूस के मामले में अपने व्यवसायिक विवेक का इस्तेमाल कर सकते हैं। मामले की जानकारी रखने वाले शख्स ने ये बातें कहीं।

बैंकों ने सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से अपनी आशंका जाहिर करते हुए कहा था कि रुपये में कारोबार की प्रणाली से पश्चिमी देशों की ओर से उन पर आर्थिक प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। बैंकों ने विदेश मंत्रालय के शीर्ष अधिकारियों से 9 अगस्त को मुलाकात की थी और इसे लेकर अपनी चिंता से उन्हें अवगत कराया था। चर्चा के दौरान सरकार ने उनके डर को दूर करते हुए कहा था कि वे उन कंपनियों/इकाइयों के साथ कारोबार नहीं करने के लिए स्वतंत्र हैं, जो प्रतिबंधित सामान के कारोबार से जुड़े हैं या जिन पर प्रतिबंध लगाया गया है।

सरकार ने बैंकों से कहा है कि यह बैंक पर निर्भर करता है कि वे प्रतिबंधित बैंकों के साथ कारोबार नहीं करने के लिए अपने विवेक के आधार पर वाणिज्यिक निर्णय लें ताकि किसी भी प्रतिकूल प्रभाव से बचा जा सके। उक्त शख्स ने बताया कि भारतीय बैंक प्रतिबंधित बैंकों के साथ कारोबार करने के इच्छुक नहीं हैं क्योंकि उन्हें डर है कि ऐसा करने पर उन पर प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। सरकार ने बैंकों को कहा है कि बैंकों को डर है कि नोस्ट्रो खातों में उनकी जमा राशि फ्रीज की जा सकती है और इससे उन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। इसलिए बैंकों को केवल उन्हीं सौदों के निपटान की सुविधा देनी चाहिए जिसका उन पर प्रतिकूल असर नहीं पड़े।

बैंकों से कहा गया है कि वे अपने रूसी समकक्षों के साथ ही कारोबार करें जिन पर प्रतिबंध नहीं लगाए गए हैं और जिन्हें स्विफ्ट प्रणाली से बाहर नहीं किया गया है। बैंकों को स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि उन्हें गैर-प्रतिबंधित बैंकों के साथ लेनदेन करने में कोई समस्या नहीं होनी चाहिए। रूस में 200 से ज्यादा बैंक हैं और सभी बैंकों को प्रतिबंधित नहीं किया गया है। उक्त शख्स ने कहा कि रूस की कई इकाइयों पर प्रतिबंध लगाए गए हैं लेकिन अभी भी ऐसी कई इकाइयां हैं जो ऐसे प्रतिबंध के दायरे से बाहर हैं।

रूस के तातसोत्सबैंक, जेनित बैंक, पीट्रबर्ग सोशल कॉमर्शियल बैंक आदि कुछ बैंक हैं जिन पर प्रतिबंध नहीं लगाए गए हैं।

मामले के जानकार एक शख्स ने कहा, ‘बैंकों के पास अधिकार है कि वे प्रतिबंधित बैंकों या जिंसों के साथ कोई कारोबार न करें। यह बैंकों का परिचालन से जुड़ा मामला है जिस पर बैंक को अपने जोखिम उठाने की क्षमता के साथ निर्णय करना है। यह बैंकों का वाणिज्यिक निर्णय होता है कि वह अपने अनुकूल और जोखिम वहन क्षमता के आधार पर लेनदेन को अंजाम दे।’ 

केंद्र सरकार का दृष्टिकोण है कि रुपये में सौदे के निपटान की व्यवस्था केवल रूस और श्रीलंका जैसे देशों के साथ कारोबार को लक्षित करना भर नहीं है बल्कि दीर्घावधि में अपनी मुद्रा का अंतरराष्ट्रीयकरण करना है। उक्त शख्स ने बताया कि रुपये को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के मुद्रा बास्केट में शामिल कराने की दिशा में भारत का यह सतत प्रयास है।

फिलहाल भारत को प्रमुख निर्यात बाजारों – अमेरिका और यूरोप में आसन्न मंदी के मद्देनजर कमजोर मांग का सामना करना पड़ रहा है। वाणिज्य विभाग को उम्मीद है कि रुपये में सौदे के निपटान की व्यवस्था होने से प्रतिबंध का सामना कर रहे रूस तथा विदेशी मुद्रा संकट का सामना कर रहे श्रीलंका जैसे देशों में कारोबार को बढ़ावा मिलेगा। 

आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक भारत में रूस से सस्ते दामों पर कच्चे तेल का आयात मार्च से ही बढ़ रहा है। अप्रैल-जून तिमाही में रूस, इराक और सऊदी अरब के बाद कच्चे तेल का भारत का तीसरा सबसे आपूर्तिकर्ता देश बन गया है। संयुक्त अरब अमीरात को उसने इस मामले में पीछे छोड़ दिया है। रूस से भारत का आयात जून में 4.23 अरब डॉलर का रहा, जो पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 6.8 गुना अधिक है।
 

First Published - August 22, 2022 | 9:51 AM IST

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