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In Parliament: बदल जाएंगे आपके बैंक के नियम, लोकसभा में ‘बैंककारी विधियां (संशोधन) विधेयक, 2024’ को मंजूरी

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उक्त विधेयक किसी बैंक खाताधारक को उसके खाते में चार ‘नॉमिनी’ को मनोनीत करने की अनुमति प्रदान करेगा।

Last Updated- December 03, 2024 | 8:48 PM IST
लोकसभा में 'बैंककारी विधियां (संशोधन) विधेयक, 2024' को मंजूरी, 'Banking Laws (Amendment) Bill, 2024' approved in Lok Sabha,

लोकसभा ने बैंककारी विधियां (संशोधन) विधेयक, 2024 को ध्वनिमत से मंजूरी दी। बैंककारी विधियां (संशोधन) विधेयक 2024 के माध्यम से किए गए संशोधन बैंकिंग क्षेत्र में संचालन प्रणाली को मजबूत बनाने के साथ ही ग्राहकों और निवेशकों के हितों को सुरक्षित करने वाले होंगे। केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में इस विधेयक को चर्चा एवं पारित करने के लिए प्रस्तुत करते हुए कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934; बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949; भारतीय स्टेट बैंक, 1955 और बैंकिंग कंपनियां (उपक्रमों का अधिग्रहण और हस्तांतरण), 1980 में कुल 19 संशोधन प्रस्तावित हैं। उक्त विधेयक किसी बैंक खाताधारक को उसके खाते में चार ‘नॉमिनी’ को मनोनीत करने की अनुमति प्रदान करेगा। विधेयक में वैधानिक लेखा परीक्षकों को भुगतान किया जाने वाला पारिश्रमिक तय करने में बैंकों को अधिक स्वतंत्रता देने का प्रावधान भी है। इस विधेयक की घोषणा वित्त मंत्री ने अपने 2023-24 के बजट भाषण में की थी।

लोकसभा में मंगलवार को पारित बैंकिंग कानून (संशोधन) विधेयक, 2024 बैंक खाताधारकों को अपने खातों में अधिकतम चार नामांकित व्यक्ति (नॉमिनी) रखने की अनुमति देता है। इस विधेयक का एक अन्य प्रावधान निदेशक पदों के लिए ‘पर्याप्त हित’ को नए सिरे से परिभाषित करने से संबंधित है। इससे लगभग छह दशक पहले तय की गई पांच लाख रुपये की मौजूदा सीमा दो करोड़ रुपये तक बढ़ सकती है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए इस विधेयक को संसद के निचले सदन ने ध्वनि मत से मंजूरी दी। विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए सीतारमण ने कहा कि जमाकर्ताओं के पास क्रमिक या एक ही समय नामांकन सुविधा का विकल्प होगा। वहीं लॉकर सुविधा लेने वाले ग्राहकों के पास केवल क्रमिक नामांकन का ही विकल्प होगा। उन्होंने यह भी कहा कि 2014 से सरकार और आरबीआई बैंकों को स्थिर बनाए रखने के लिए बेहद सतर्क रहे हैं।

सीतारमण ने कहा, “हमारा उद्देश्य हमारे बैंकों को सुरक्षित, स्थिर और स्वस्थ रखना है और 10 साल बाद आप इसका परिणाम देख रहे हैं।” विधेयक में सहकारी बैंकों में निदेशकों (चेयरमैन एवं पूर्णकालिक निदेशक को छोड़कर) के कार्यकाल को आठ साल से बढ़ाकर 10 साल करने का प्रस्ताव है। संविधान (97वां संशोधन) अधिनियम, 2011 के अनुरूप बनाने के लिए यह संशोधन किया गया है। विधेयक पारित होने के बाद केंद्रीय सहकारी बैंक के निदेशक को राज्य सहकारी बैंक के निदेशक मंडल में नियुक्त किए जाने की मंजूरी मिल जाएगी। बैंकिंग संशोधन विधेयक में वैधानिक लेखा परीक्षकों का पारिश्रमिक तय करने में बैंकों को अधिक स्वतंत्रता देने का भी प्रावधान किया गया है। इसमें नियामकीय अनुपालन के लिए बैंकों को वित्तीय आंकड़ों की सूचना देने की तिथियों को बदलकर हर महीने की 15वीं और आखिरी तारीख करने की बात कही गई है। मौजूदा समय में बैंकों को हर महीने के दूसरे और चौथे शुक्रवार को यह सूचना भेजनी होती है।

नोटबंदी के बावजूद लोगों के पास पहले से ज्यादा नगदी- गोगोई

कांग्रेस ने देश की बैंकिंग व्यवस्था को भेदभावपूर्ण और वंचितों के लिए अलाभकारी बताते हुए मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत केंद्र सरकार पर देश की आर्थिक स्थिति को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया। लोकसभा में बैंककारी विधियां (संशोधन) विधेयक, 2024 पर चर्चा की शुरुआत करते हुए कांग्रेस सदस्य गौरव गोगोई ने कहा कि बैंकिंग प्रणाली देश की आर्थिक स्थिति से जुड़ी है। गोगाई ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि आर्थिक स्थिति का जो ढांचा वर्तमान सरकार ने तोड़ दिया है, उसकी शुरुआत आठ नवंबर 2016 को नोटबंदी लागू करने के साथ हुई थी। गोगोई ने पूछा कि सरकार बताए कि उसने नोटबंदी लागू करने के बाद इन आठ साल में क्या हासिल किया? उन्होंने दावा किया कि सरकार ने नोटबंदी के बाद अर्थव्यवस्था को डिजिटल करने का दावा किया था, लेकिन भारतीय रिजर्व बैंक ने कहा है कि 2023 में लोगों के हाथ में 2015-16 के मुकाबले अधिक नकदी थी। इसका अर्थ है कि लोग आज भी नकदी पर निर्भर हैं। कांग्रेस सांसद ने आरोप लगाया कि आज देश की बैंकिंग व्यवस्था भेदभावपूर्ण है जिसमें अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के लोगों और गरीबों को लाभ नहीं मिल रहा। सभी बैंकों को बताना चाहिए कि उनके बड़े निवेश कहां-कहां किए गए हैं। उन्होंने भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) को अधिक शक्तियां दिए जाने की जरूरत भी बताई।

कांग्रेस सरकार में नेताओं के फोन पर मिलते थे लोन- बीजेपी

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने मंगलवार को आरोप लगाया कि कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार में ‘बैंकिंग फोन सिस्टम’ था और उस समय बैंकिंग प्रणाली ‘वेंटिलेटर’ पर चली गई थी। भाजपा सांसद संबित पात्रा ने ‘बैंककारी विधियां (संशोधन) विधेयक, 2024’ पर लोकसभा में चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के निर्णायक नेतृत्व के चलते भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में सुधार आया जो विकसित भारत के लिए जरूरी है। जब प्रधानमंत्री ‘एक हैं तो सेफ हैं’ की बात करते हैं तो वह बैंकिंग सुधारों के लिए महत्वपूर्ण है। यह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की प्रतिबद्धता है कि जमाकर्ताओं के हितों की सुरक्षा हो।

बीजेपी सांसद पात्रा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी के समय ‘फोन बैंकिंग सिस्टम’ था। नेता फोन उठाकर कहते थे कि कर्ज दे दो,यह नहीं देखा जाता था कि कर्ज लेने वाला लौटा सकता है या नहीं। कांग्रेस की इस प्रणाली के कारण एनपीए बढ़ता चला गया। देश की बैंकिंग प्रणाली वेंटिलेंटर पर थी, प्रधानमंत्री मोदी ने इसे संकट से बाहर निकाला। यह विधेयक बैंकिंग प्रणाली में सुधार से जुड़ा है। हमारी सरकार में 10 लाख करोड़ रुपये के ‘बैड लोन’ की वसूली की गई। यह सब सुधारों के चलते संभव हुआ।

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First Published - December 3, 2024 | 8:19 PM IST

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