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कारोबारी मंदी और जंग से तिरुपुर हुआ तंग

Last Updated- December 11, 2022 | 2:36 PM IST

 देश में परिधान के सबसे बड़े ठिकाने तिरुपुर को चालू वित्त वर्ष के दौरान निर्यात मांग में 30 से 40 फीसदी गिरावट आने की आशंका है। अमेरिका में मंदी और यूरोप में युद्ध के कारण निर्यात को असली झटका लगा है। वित्त वर्ष 2021-22 में तिरुपुर से निर्यात 34 फीसदी बढ़ गया था। मगर इस समय तिरुपुर की कुछ इकाइयां कुछ समय के लिए बंद कर दी गई हैं और बाकी इकाइयों में सात के बजाय पांच दिन ही काम हो रहा है। काम हो भी रहा है तो केवल एक पाली में।
पिछले वित्त वर्ष में देश के कुल कपड़ा निर्यात में तिरुपुर का योगदान करीब 54.2 फीसदी था। अप्रैल से अगस्त के बीच यहां से 15,800 करोड़ रुपये का निर्यात हुआ था, जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि से अधिक है। फिर भी निर्यात में गिरावट की आशंका जताई जा रही है। वित्त वर्ष 2021-22 के दौरान तिरुपुर से निर्यात बढ़कर 33,525 करोड़ रुपये हो गया, जो 2020-21 में 25,000 करोड़ रुपये ही था।
तिरुपुर एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन (टीईए) के अध्यक्ष राजा एम षणमुगम ने कहा, ‘अधिक कीमत के बावजूद पहले पांच महीनों में मांग बढ़ गई। लेकिन अब अगले महीनों के लिए ऑर्डरों में काफी गिरावट दिख रही है। हालिया वैश्विक परिस्थितियां देखते हुए हमें लगता है कि पूरे वित्त वर्ष में कुल निर्यात 30 से 40 फीसदी गिर सकता है।’ निर्यात ऑर्डर के लिहाज से चरम इसी महीने आने की उम्मीद थी। टीईए का कहना है कि पिछले साल तिरुपुर से सबसे ज्यादा 40 फीसदी निर्यात अमेरिका को किया गया था और 35 फीसदी यूरोप को हुआ था।
तिरुपुर एक्सपोर्टर्स ऐंड मैन्युफैक्चरर एसोसिएशन (टीईएएमए) के अध्यक्ष एमपी मुतुरत्नम ने कहा, ‘कच्चे माल के दाम बढ़ गए हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध का यूरोप से आने वाली मांग पर काफी असर पड़ा है। अमेरिका में आर्थिक मंदी की आशंका से भी अग्रिम ऑर्डर प्रभावित हो रहे हैं।’
विनिर्माताओं का कहना है कि खपत घटने के कारण देसी बाजार में भी हालात अच्छे नहीं दिख रहे हैं। मुतुरत्नम ने कहा, ‘भारतीय बाजार में खरीद की क्षमता कम है। साथ ही धागे की कीमतें भी 400 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई हैं, जो 2020 में 220 रुपये किलो ही थीं। इससे हमारे मुनाफे में बहुत कमी आई है।’
कपास की कीमतों में तेजी जारी रहने के कारण धागा मिलों को भी झटका लगा है। तमिलनाडु ​स्पिनिंग मिल्स एसोसिएशन (टस्मा) के मुख्य सलाहकार के वेंकटचलम ने कहा, ‘मांग में गिरावट के कारण कपड़ा उद्योग धागा नहीं ले रहा है और इसलिए हमारा स्टॉक बढ़ गया है। लोग नया स्टॉक लेने को तैयार नहीं हैं। कपास की ऊंची कीमत भी हमारे लिए चिंता का विषय है।’ कपास की कीमतें करीब 1 लाख रुपये प्रति गांठ से घटकर अब 75,000 रुपये गांठ ही रह गई हैं मगर 2021 की 46,000 रुपये प्रति गांठ के मुकाबले अब भी दाम बहुत अधिक हैं।
भारत दुनिया का सबसे बड़ा कपास उत्पादक देश है लेकिन परिधान निर्यात के मामले में वह चीन, बांग्लादेश, वियतनाम, कंबोडिया और श्रीलंका के बाद छठे पायदान पर मौजूद है।
मुतुरत्नम ने कहा, ‘मुख्य समस्या यह है कि सरकार सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों को प्राथमिकता नहीं दे रही है। सभी योजनाएं बड़ी कंपनियों के लिए तैयार की जा रही हैं। यदि हमारी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो हमें वैश्विक मांग के मोर्चे पर बड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।’

First Published - September 29, 2022 | 10:28 PM IST

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