अर्थव्यवस्था

RBI की चेतावनी: पश्चिम एशिया संकट से बढ़ेगा महंगाई का दबाव, मॉनसून की बेरुखी भी बढ़ाएगी संकट

RBI की रिपोर्ट में कहा गया है कि भले ही भारतीय बैंकिंग प्रणाली मजबूत हो मगर भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान निकट भविष्य में समस्याएं पैदा कर सकते हैं

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मनोजित साहा   
Last Updated- May 29, 2026 | 10:54 PM IST

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने आज जारी अपनी वार्षिक रिपोर्ट में कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष से अर्थव्यवस्था की वृद्धि और मुद्रास्फीति को खतरा है। हालांकि यह जो​खिम अल्पावधि में ही होगा और 2026-27 में अर्थव्यवस्था मजबूत बने रहने की उम्मीद है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि भले ही भारतीय बैंकिंग प्रणाली मजबूत हो मगर भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान निकट भविष्य में समस्याएं पैदा कर सकते हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, ‘भारत की वृद्धि का दृष्टिकोण सकारात्मक बना हुआ है। हालांकि पश्चिम एशिया संघर्ष और उससे जुड़ी ऊर्जा की ऊंची कीमतें, आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान, वित्तीय बाजार में अस्थिरता, वैश्विक व्यापार नीतियों को लेकर अनिश्चितता और मौसम संबंधी जोखिम अल्पावधि में वृद्धि दर और मुद्रास्फीति के लिए बाधा उत्पन्न कर सकते हैं।’ 

पश्चिमी एशिया युद्ध के मद्देनजर अप्रैल में हुई केंद्रीय बैंक की छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति की बैठक में रीपो दर को अपरिवर्तित रखने का निर्णय लिया गया। मौद्रिक नीति की अगली समीक्षा अगले सप्ताह होनी है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2025-26 में बाह्य चुनौतियों के बावजूद लचीलापन दिखाया और आगे वृद्धि की संभावनाएं सकारात्मक बनी रहेंगी।

आरबीआई ने कहा कि ऐसे अनिश्चित समय में लगातार हो रहे घटनाक्रम का निरंतर आकलन करना आवश्यक है ताकि उचित नीतिगत उपाय किए जा सकें। सकारात्मक पक्ष की बात करें तो कंपनियों और बैंकों की मजबूत बैलेंस शीट, सरकार द्वारा पूंजीगत व्यय पर जोर और प्रमुख देशों के साथ व्यापार समझौतों के कार्यान्वयन से निवेश और वृद्धि की रफ्तार बनी रहने की उम्मीद है।

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वित्त वर्ष 2026 में हेडलाइन मुद्रास्फीति नरम बनी रही मगर पश्चिम एशिया संघर्ष के बाद वित्त वर्ष के अंत में महंगाई का दबाव दिखने लगा। इसके साथ-साथ सामान्य से कम मॉनसून के पूर्वानुमान को देखते हुए मुद्रास्फीति के मोर्चे पर पैनी नजर रखने की आवश्यकता है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि ऊर्जा और वस्तुओं की ऊंची कीमतों के कारण बाहरी क्षेत्र से उत्पन्न चुनौतियों के बावजूद वित्त वर्ष 2027 में घरेलू अर्थव्यवस्था के मजबूत बने रहने की उम्मीद है। मजबूत घरेलू मांग, वृद्धि के चालक के रूप में निर्यात पर अपेक्षाकृत कम निर्भरता और स्थिर नीतिगत माहौल सहित भारत के मजबूत व्यापक आर्थिक आधारभूत कारकों से वृद्धि की संभावनाओं को बल मिलता है।

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रिपोर्ट में कहा गया है कि विवेकपूर्ण नियामकीय सुधारों, स्थिर ऋण वृद्धि और पर्याप्त पूंजी के समर्थन से भारतीय बैंकिंग प्रणाली के मजबूत बने रहने की उम्मीद है। रिपोर्ट में कहा गया है, ‘कुल मिलाकर मजबूत बुनियादी सिद्धांतों और सुदृढ़ बैलेंस शीट के बल पर घरेलू वित्तीय प्रणाली में प्रतिकूल झटकों का सामना करने के लिए पर्याप्त पूंजी मौजूद है।’

कृषि क्षेत्र पर टिप्पणी करते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि मॉनसून कृषि क्षेत्र के लिए महत्त्वपूर्ण बना हुआ है और 2027 के लिए दृष्टिकोण दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की प्रगति और वितरण पर निर्भर करता है।

First Published : May 29, 2026 | 10:45 PM IST