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यूलिप (ULIP): टैक्स नियमों को लेकर रहें सचेत

Last Updated- December 11, 2022 | 1:44 PM IST

वैसे लोग जो बेहतर रिटर्न और टैक्स सेविंग के साथ रिस्क कवर यानी जीवन बीमा का लाभ भी चाहते हैं, उनके लिए यूनिट-लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान (unit-linked insurance plan) या यूलिप (ULIP) एक बेहतर विकल्प है। पिछले कुछ वर्षों में इस स्कीम में किए गए बदलाव के बाद इसके प्रति लोगों की रुचि फिर से बढी है। इस स्कीम पर मिलने वाले टैक्स बेनिफिट की वजह से भी लोगों का रुझान इसको लेकर बढ़ा है। यूलिप मोटे तौर पर ईईई/EEE (Exempt-Exempt-Exempt) कैटेगरी में है। यानी न तो इस स्कीम में जमा करने पर, न मिलने वाले रिटर्न पर और न ही निकासी पर टैक्स का प्रावधान है। लेकिन 2021 में इस स्कीम को लेकर टैक्स नियमों में किए गए बदलाव को लेकर लोगों के बीच थोड़ा कंफ्यूजन है।

इसलिए इस स्कीम से संबंधित टैक्स नियमों को समझते हैं:
 
80C के तहत डिडक्शन (deduction) का फायदा

Ulip का लॉक-इन (lock-in) पीरियड 5 साल है। मतलब प्लान की शुरुआत के 5 साल बाद आप इसे रिडीम/सरेंडर कर सकते हैं। अगर आप 5 साल तक निवेश जारी रखते हैं तो आपको यूलिप के लिए दिए जाने वाले प्रीमियम पर 80C के तहत अधिकतम 1.5 लाख रुपये तक (निवेश के अन्य विकल्पों को मिलाकर) डिडक्शन का फायदा मिलेगा। लेकिन अगर कोई पॉलिसी 1 अप्रैल 2012 या उसके बाद जारी की गई है तो एक वित्त वर्ष में सम एश्योर्ड के 10 फीसदी से ज्यादा के सालाना प्रीमियम पर डिडक्शन का फायदा नहीं मिलेगा।
 
मैच्योरिटी बेनिफिट (Maturity Benefit) पर टैक्स में छूट

साथ ही मैच्योरिटी बेनिफिट भी सेक्शन 10 (10D) के तहत टैक्स-फ्री है। मसलन यहां इक्विटी और डेट फंड से होनेवाली कमाई पर भी कोई टैक्स नहीं लगता है।
 
लेकिन 2021 में यूलिप को लेकर टैक्स नियमों में बदलाव किया गया। नए नियमों के तहत अगर आप एक फरवरी 2021 या उसके बाद यूलिप खरीदते हैं और अगर सालाना प्रीमियम 2.5 लाख रुपये से ज्यादा है तो आपको मैच्योरिटी बेनिफिट पर टैक्स में छूट नहीं मिलेगी। यानी मैच्योरिटी बेनिफिट कैपिटल गेन मानी जाएगी और चूंकि यूलिप का लॉक-इन पीरियड 5 साल है। इसलिए लॉक-इन पीरियड के बाद मिलने वाले मैच्योरिटी बेनिफिट पर आपको 10 फीसदी लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन टैक्स (एलटीसीजी या LTCG) चुकाना होगा।
 
LTCG का कैलकुलेशन

कुल मैच्योरिटी बेनिफिट (अगर बोनस भी इसमें शामिल है तो इसे भी मिलाकर) में से कुल चुकाए गए प्रीमियम को घटाने के बाद जो राशि बचेगी वह लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन मानी जाएगी। 

 उदाहरण से समझते हैं:
 
 1. मान लीजिए आपने 1 अप्रैल 2022 को यूलिप खरीदा। इसके लिए आप प्रति तिमाही (quarterly) 75 हजार रुपये बतौर प्रीमियम चुकाते हैं। पांच साल तक प्रीमियम चुकाने के बाद बीमा कंपनी अगले 5 साल के बाद यानी कुल दस साल के बाद 1 अप्रैल 2031 को आपको 20 लाख रुपये का मैच्योरिटी बेनिफिट देती है। इस प्लान के तहत 16 लाख रुपये का बीमा कवर यानी सम एश्योर्ड (पॉलिसी के दौरान बीमा धारक की मौत के बाद परिवार को मिलने वाली निश्चित राशि) है।
 
इस मामले में आप प्रति वर्ष सेक्शन 80C के तहत 1.5 लाख तक के प्रीमियम भुगतान पर डिडक्शन (deduction) का दावा कर सकते हैं। क्योंकि 80C के तहत डिडक्शन के लिए दावा की गई राशि सम एश्योर्ड (sum assured) के 10 फीसदी से कम है। लेकिन 10 साल के बाद मिलने वाले 20 लाख रुपये के मैच्योरिटी बेनिफिट पर आपको टैक्स में कोई छूट नहीं मिलेगी और मैच्योरिटी बेनिफिट पर आपको लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन टैक्स चुकाना होगा। क्योंकि इस मामले में सालाना प्रीमियम 75,000 X 4 = 3 लाख रुपये (2.5 लाख रुपये की लिमिट से अधिक) है।
 
लेकिन इन 10 साल के दौरान अगर अगर यूलिप धारक की मौत हो जाती है तो नॉमिनी/उनके परिवार को टैक्स-फ्री 15 लाख रुपये सम एश्योर्ड मिलेंगे। ध्यान रहे कि पॉलिसी अवधि के दौरान अगर पॉलिसी धारक की मौत हो जाती है तो परिवार को मिलने वाले सम एश्योर्ड डेथ/बेनिफिट पर किसी भी तरह के टैक्स का प्रावधान नहीं है। 

2 . मान लीजिए आपने 1 अप्रैल 2022 को यूलिप का एक ऐसा प्लान खरीदा जिसके लिए आपको सालाना 1.2 लाख रुपये 5 वर्ष तक बतौर प्रीमियम चुकाने होते हैं। 5 साल के इस लॉक-इन पीरियड के ठीक 5 साल बाद यानी 1 अप्रैल 2031 को बीमा कंपनी आपको 13 लाख रुपये का मैच्योरिटी बेनिफिट देती है। इस प्लान के तहत 5 लाख रुपये का बीमा कवर यानी सम एश्योर्ड है। इस मामले में हालांकि आप सालाना 1 लाख रुपये प्रीमियम चुकाते हैं लेकिन आप सालाना सिर्फ 50 हजार रुपये के प्रीमियम भुगतान पर ही डिडक्शन का फायदा ले सकते हैं क्योंकि सम एश्योर्ड यानी 5 लाख रुपये का 10 फीसदी 50 हजार होता है। इस मामले में मैच्योरिटी बेनिफिट हालांकि पूरी तरह से टैक्स-फ्री होगा क्योंकि यह सालाना 2.5 लाख रुपये की अधिकतम सीमा से कम है।
 

First Published - October 14, 2022 | 1:46 PM IST

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