सूचीगद्ध गैर-वित्तीय केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों ने पिछले पांच वर्षों में पहली बार अपने ऋण बोझ में गिरावट दर्ज की है। धातु एवं ऊर्जा की कीमतों में तेजी के कारण हुए फायदे से इन कंपनियों को ऋण बोझ घटाने में मदद मिली। सरकारी स्वामित्व वाली इन कंपनियों का एकीकृत शुद्ध ऋण बोझ 6.4 फीसदी घटकर इस साल मार्च के अंत में 6.83 लाख करोड़ रुपये रह गया जो मार्च 2020 के अंत में 7.3 लाख करोड़ रुपये था।
बिजनेस स्टैंडर्ड के नमूने में शामिल इन 37 गैर-बैंक एवं गैर-एनबीएफसी केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों के एकीकृत शुद्ध ऋण बनाम इक्विटी सुधरकर वित्त वर्ष 2021 में 0.75 गुना हो गया जो वित्त वर्ष 2020 में 0.77 गुना रहा था। ऋण अनुपात में सुधार को सकल ऋण में कटौती और अधिक आय दोनों से बल मिला। इससे पिछले वित्त वर्ष में कई केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों की शुद्ध हैसियत अथवा इक्विटी को बढ़ावा मिला।
केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों का लगभग 80 फीसदी ऋण महज चार कंपनियों के पास है जिनमें नैशनल थर्मल पावर कॉरपोरेशन (एनटीपीसी), पावर ग्रिड कॉरपोरेशन, ओएनजीसी और इंडियन ऑयल शामिल हैं। इन चार सार्वजनिक उपक्रमों का एकीकृत शुद्ध ऋण बोझ सालाना आधार पर 2.3 फीसदी घटकर 5.6 लाख करोड़ रुपये रह गया।
ऋण बोझ में कमी को मुख्य तौर पर स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया (सेल) एवं हिंदुस्तान कॉपर जैसी धातु कंपनियों और इंडियन ऑयल एवं भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (बीपीसीएल) जैसी तेल कंपनियों से बल मिला।
पिछले वित्त वर्ष के दौरान सेल का कुल ऋण बोझ 31 फीसदी घटकर करीब 35,500 करोड़ रुपये रह गया जो वित्त वर्ष 2020 के अंत में 52,200 करोड़ रुपये था। इंडियन ऑयल का सकल ऋण पिछले वित्त वर्ष में 14 फीसदी घटकर 1.09 लाख करोड़ रुपये रह गया जो एक साल पहले 1.26 लाख करोड़ रुपये रहा था। इसी प्रकार बीपीसीएल का सकल ऋण बोझ सालाना आधार पर 23 फीसदी घटकर पिछले वित्त वर्ष के अंत में करीब 48,000 करोड़ रुपये रह गया जो एक साल पहले करीब 62,000 करोड़ रुपये था।
इसके विपरीत ओएनजीसी, ऑयल इंडिया, एनटीपीसी, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन, एमएमटीसी और गेल (इंडिया) जैसी कंपनियों ने पिछले वित्त वर्ष के दौरान अपने बकाया कर्ज में वृद्धि दर्ज की।
बिजनेस स्टैंडर्ड के नमूने में शामिल कंपनियों का एकीकृत शुद्ध मुनाफा 64 फीसदी बढ़कर 1.39 लाख करोड़ रुपये हो गया जो एक साल पहले करीब 85,000 करोड़ रुपये रहा था। यह इन सार्वजनिक उपक्रमों के लिए अब तक का सर्वाधिक शुद्ध लाभ है जो वित्त वर्ष 2019 की पिछली ऊंचाई को भी पार कर गया।
इसके मुकाबले इन कंपनियों की एकीकृत शुद्ध बिक्री सालाना आधार पर 0.5 फीसदी बढ़कर 17.5 लाख करोड़ रुपये हो गई जो वित्त वर्ष 2019 में 18.4 लाख करोड़ रुपये की पिछली ऊंचाई से कम है।
इंडियन ऑयल, बीपीसीएल, एचपीसीएल, ओएनजीसी, एनटीपीसी, सेल और एनएमडीसी जैसी कंपनियों की आय में सबसे अधिक उछाल दर्ज किया गया। जबकि पिछले वित्त वर्ष में कम बिक्री एवं राजस्व के बावजूद तेल कंपनियों को इन्वेंट्री लाभ से लाभ हुआ और धातु उत्पादकों को धातु कीमतों में तेजी से फायदा हुआ। इससे वित्त वर्ष 2021 में उनके मार्जिन और मुनाफे को रफ्तार मिली।
इसके विपरीत, गेल (इंडिया), कोल इंडिया, ऑयल इंडिया, एनएलसी इंडिया और इंजीनियर्स इंडिया जैसे केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों ने पिछले वित्त वर्ष के दौरान अपनी आय में गिरावट दर्ज की।
केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों को पिछले साल अन्य कंपनियों की तरह ब्याज दरों में गिरावट का भी फायदा मिला। इससे वित्त वर्ष 2021 में उनकी ब्याज लागत में सालाना आधार पर 18.4 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।