बीएस बातचीत
पिछले कुछ सप्ताहों से बाजारों के लिए राह उतार-चढ़ाव वाली रही है। एवेंडस कैपिटल अल्टरनेट स्ट्रेटेजीज के मुख्य कार्याधिकारी एंड्रयू हॉलैंड ने पुनीत वाधवा को बताया कि फंड के तौर पर एवेंडस कैपिटल ने नकदी स्तर को ऊंचा बनाए रखा है जिससे उसे अनिश्चितता समाप्त हो जाने की स्थिति में बाजार में फिर से मजबूती के साथ प्रवेश करने में मदद मिलेगी। बातचीत के मुख्य अंश:
अमेरिकी फेड और अन्य वैश्विक केंद्रीय बैंकों द्वारा अगले कुछ महीनों में उठाए जाने वाले कदमों का बाजारों पर कितना असर दिख रहा है? क्या स्थिति चिंताजनक नजर आ रही है?
बाजार ब्याज दरों और सख्ती के बारे में परिदृश्य को लेकर विभाजित बने हुए हैं। जहां एक तरफ, वे अभी भी अगले वर्ष के दौरान अमेरिकी फेडरल द्वारा 5-7 प्रतिशत की दर वृद्घि की उम्मीद कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ किसी तरह की सख्ती से वैश्विक अर्थव्यवस्था में संभावित कमजोरी को बढ़ावा मिलेगा, जिससे मंदी गहरा सकती है और वैश्विक केंद्रीय बैंक तेजी से ब्याज दरें बढ़ाने की ओर रुख कर सकते हैं।
क्या बाजारों के लिए 2022 का शेष समय अस्थिर रहेगा?
यूक्रेन-रूस टकराव से पहले, हम 2022 की पहली छमाही बेहद उतार-चढ़ाव वाली रहने की उम्मीद कर रहे थे, क्योंकि बाजार दुनियाभर, खासकर अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में वृद्घि की आशकाओं से जूझ रहे थे। अमेरिकी फेडरल ने अपनी बैलेंस शीट में कमी की है। हमारी नजर में, इस सख्ती का अप्रत्याशित परिणाम बाजारों पर नहीं दिखा। आपको चीन में जो हुआ, उस पर विचार करना होगा, जैसा कि पिछले साल वहां सख्ती देखने को मिली थी और संपत्ति बाजार प्रभावित हुए थे तथा चर्चित निर्माण कंपनियों को भी नकदी संकट का सामना करना पड़ा था। जिंस और खाद्य कीमतों में ताजा तेजी से कंपनियों के मुनाफा मार्जिन पर दबाव पहले ही दिखने लगा है।
क्या आप भारतीय इक्विटी बाजारों को ‘गिरावट पर खरीदें’ या ‘तेजी पर बेचें’ कहना पसंद करेंगे?
क्या किसी क्षेत्र में मूल्यांकन खरीदारी के लिए पर्याप्त है?
जहां अस्थिरता खरीदारी का अच्छा अवसर मुहैया कराएगी, वहीं कुछ हद तक लंबे समय तक बैठे रहना भी समझदारी भरा कदम हो सकता है। अमेरिकी फेड ने खुद को कठिन चुनौती में डाला है। मुद्रास्फीति के संबंध में उसने नीतिगत गलती की है। अगले कुछ सप्ताहों में स्थिति और स्पष्ट हो सकती है, क्योंकि यूक्रेन में हमलों को लेकर भी हालात स्पष्ट हो जाएंगे। हालांकि ऊंची जिंस कीमतों से मांग पर दबाव बढ़ेगा जिससे जिंस कीमतों में कमी भी आ सकती है।
ताजा बाजार गिरावट के बीच आपकी रणनीति क्या रही है?
एक फंड के तौर पर, हमने अपने नकदी स्तर को ऊंचा बनाए रखा है, जिससे हमें अस्थिरता दूर हो जाने की स्थिति में अधिक मजबूती के साथ बाजार में फिर से पैर जमाने का मौका मिल सकेगा।
ऐसे कौन से कारक हैं जिनसे उभरते बाजारों और भारत पर विदेशी निवेशकों का नजरिया बदल सकता है?
विदेशी निवेशकों के लिए उस स्थिति में जोखिम लेना सामान्य स्थिति है यदि वे यह मानते हैं कि वैश्विक तौर पर ब्याज दरें बढ़ रही हैं। अक्सर उभरते बाजार की मुद्राएं, इक्विटी और बॉन्डों को सबसे पहले बिकवाली दबाव से जूझना पड़ता है। भारत के लिए भी, इन पर कई वजहों से प्रभाव पड़ा, जिनमें उभरते बाजार के सूचकांकों में उसके भारांक, निवेशकों द्वारा पिछले वर्ष के दौरान मजबूत प्रतिफल हासिल करने और इसलिए अच्छा प्रदर्शन दर्ज करने और ऊंचे मूल्यांकन ऐसी वजह हैं जिनसे उन्हें कुछ रकम पास रखने में मदद मिली है। साथ ही चीन के सूचकांकों में बड़ी गिरावट से भी उभरते बाजार के फंडों में बिकवाली को बढ़ावा मिला है।
क्या आपने वित्त वर्ष 2023 के लिए कॉरपोरेट आय वृद्घि के लिए अपना अनुमान घटाया है?
हमने जिंस क्षेत्रों के साथ साथ कई आय अनुमान घटाए हैं। जहां कई नकारात्मक कारक मौजूदा समय में बाजार को प्रभावित कर रहे हैं, वहीं हम भविष्य में आशाजनक परिदृश्य की उम्मीद देख रहे हैं। नि:संदेह ही यूक्रेन में युद्घविराम से संबंधित स्थिति अल्पावधि के लिहाज से सकारात्मक परिदृश्य होगी।