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फंडों में दीर्घावधि निवेश पर जोर

Last Updated- December 12, 2022 | 4:32 AM IST

इक्विटी म्युचुअल फंड (एमएफ) शेयर बाजारों के लिए पूंजी का अच्छा स्रोत साबित हुए हैं। इक्विटी म्युचुअल फंडों में छोटे निवेशकों के लिए औसत निवेश अवधि 55.3 प्रतिशत मामलों में 24 महीने से ज्यादा है।  वहीं एक साल पहले यह अनुपात 48.7 प्रतिशत था। इससे पता चलता है कि लंबे निवेश पर जोर देने वाले निवेशकों का प्रतिशत सुधरा है।
उद्योग के जानकारों का कहना है कि शेयर कीमतों में शानदार तेजी और जागरूकता में सुधार से निवेशकों के लिए निवेश अवधि में इजाफा करने में मदद मिली है।
भारत में म्युचुअल फंडों के संगठन एम्फी के आंकड़े से पता चलता है कि 6.36 लाख करोड़ रुपये की कुल रिटेल इक्विटी परिसंपत्ति में 3.5 लाख करोड़ रुपये की पूंजी निवेशकों ने दो साल से ज्यादा समय तक निवेशित बनाए रखी है। लंबी अवधि तक निवेश बनाए रखने के लिए छोटे निवेशकों की क्षमता अमीर निवेशकों (एचएनआई) के मुकाबले ज्यादा है। एम्फी के आंकड़े से पता चला है कि एचएनआई से संबंधित सिर्फ 47.11 प्रतिशत परिसंपत्तियों की निवेश अवधि दो साल से ज्यादा थी।
क्वांटम एएमसी के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्याधिकारी जिमी पटेल ने कहा, ‘एमएफ बचत का माध्यम हैं और इसके जरिये पूंजी बढ़ाने का रुझान तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। निवेशक यह समझे लगे हैं कि इक्विटी एमएफ अल्पावधि उत्पाद नहीं बल्कि दीर्घावधि योजनाएं हैं, और इनमें निवेश अक्सर तीन साल से ज्यादा समय तक बनाए रखने की जरूरत होती है।’
विश्लेषकों का कहना है कि पिछले साल मार्च में इक्विटी बाजार में एक बार हुई भारी बिकवाली के बावजूद होल्डिंग अवधि में वृद्घि इसका संकेत है कि छोटे निवेशक अब समझदार हो गए हैं। बाजारों में पिछले साल इन आशंकाओं के बीच सिर्फ कुछ ही सत्रों में 30 प्रतिशत से ज्यादा गिरावट देखी गई कि कोविड-19 महामारी से अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी।
निवेशकों में अक्सर भयभीत होने और ऐसे समय में बिकवाली करने की प्रवृत्ति रहती है। हालांकि कोविड-19 के निचले स्तरों से भारी तेजी को देखते हुए निवेश से जुड़े रहना लाभदायक साबित होगा।
वैल्यू रिसर्च के आंकड़े से पता चलता है कि पिछले साल में लार्ज-कैप फंडों ने औसत तौर पर 62.3 प्रतिशत प्रतिफल दिया, जबकि मिड-कैप और स्मॉल-कैप ने 85 प्रतिशत और 116 प्रतिशत औसत प्रतिफल दिया। पटेल ने कहा, ‘उद्योग की समझ रखने वाले निवेशकों को लंबी अवधि तक बने रहने में मदद मिली है।’
पिछले कुछ वर्षों में, एमएफ उद्योग ने निवेशक जागरूकता कार्यक्रम चलाए हैं, जैसे ‘म्युचुअल फंड सही है’ विज्ञापन अभियान, जिसने एमएफ में निवेशकों को आकर्षित करने में अहम योगदान दिया है।
पिछले तीन वित्त वर्षों – अप्रैल 2018 और मार्च 2021 के बीच- में इक्विटी म्युचुअल फंडों ने 1.69 लाख करोड़ रुपये का पूंजी प्रवाह आकर्षित किया।
पिछले वित्त वर्ष में ज्यादातर समय तक इक्विटी प्रवाह नकारात्मक रहा और पिछले दो महीने में यह सकारात्मक हुआ। इक्विटी-केंद्रित योजनाओं ने अप्रैल और मार्च में 3,437 करोड़ रुपये और 9,115 करोड़ रुपये का शुद्घ पूंजी प्रवाह आकर्षित किया। वहीं जुलाई और फरवरी की अवधि में, इक्विटी फंडों ने करीब 47,000 करोड़ रुपये की शुद्घ निकासी दर्ज की गई थी।
वित्तीय योजनाकारों का कहना है कि कोविड-19 संकट ने निवेशकों को अनुशासित निवेश लाभ के लिए  प्रेरित किया है।
मुंबई स्थित म्युचुअल फंड वितरक वृषभ देसाई ने कहा, ‘महामारी ने हमें पूंजी बचत की महत्ता सिखाई है। हमारे पास ऐसे कई निवेशक आए जिन्होंने महामारी अपने खर्च नियंत्रित किए और उस रकम को इक्विटी में निवेश किया।’
एसआईपी योजनाएं छोटे निवेशकों के लिए अपनी पूंजी इक्विटी फंडों में लगाने के लिहाज से पसंदीदा माध्यम रही हैं। पिछले साल इक्विटी योजनाओं से शुद्घ निकासी के बावजूद, एसआईपी के जरिये पूंजी प्रवाह 96,000 करोड़ रुपये पर दर्ज किया गया, जो वित्त वर्ष 2020 के 1 लाख करोड़ रुपये के मुकाबले कुछ कम है।
एमएफ उद्योग के जानकारों का मानना है कि एसआईपी भारत के ढांचागत वृद्घि परिदृश्य का लाभ उठाने के लिए सही माध्यम साबित हो सकता है।
आईसीआईसीआई डायरेक्ट रिसर्च ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि टीकाकरण अभियान में तेजी आने से आर्थिक गतिविधियों में वृद्घि को मजबूती मिल सकती है।
रिपोर्ट में कहा गया है, ‘मिड-कैप और स्मॉल-कैप फंड बेहतर स्थिति में हैं। सुधार चक्र के दौरान आय वृद्घि मिड-कैप और स्मॉल-कैप में लार्ज-कैप के मुकाबले ज्यादा मजबूत रहेगी। निवेशकों को दीर्घावधि वृद्घि परिदृश्य पर अपना ध्यान बनाए रखना चाहिए।’

First Published - May 23, 2021 | 11:15 PM IST

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