34 लाख करोड़ रुपये के म्युचुअल फंड उद्योग में फिनटेक कंपनियों की मौजूदगी अब महसूस होने लगी है। आसान पहुंच, इनोवेटिव एनालिटिकल टूल और इन कंपनियों की तरफ से पेशकश की जा रही निवेश की कम लागत से निवेशक म्युचुअल फंडों में निवेश के पारंपरिक जरिये को छोड़ इस ओर बढऩे के लिए प्रोत्साहित हो रहे हैं।
ग्रो, पेटीएम मनी, जीरोधा और कुवेर जैसी फिनटेक कंपनियां अपने-अपने प्लेटफॉर्म पर म्युचुअल फंड योजनाओं की पेशकश करती हैं।
फिनटेक वितरकों के जरिए इक्विटी में जुटाई गई प्रबंधनाधीन परिसंपत्तियां 2020-21 में 2.4 गुने की उछाल के साथ 27,463 करोड़ रुपये पर पहुंच गई। आईडीएफसी एमएफ के नोट से यह जानकारी मिली। इस बढ़त में बड़ा योगदान शेयर बाजारों की उछाल का है। हालांकि अन्य आंकड़े बताते हैं कि नई पीढ़ी के म्युचुअल फंड वितरक अपनी अहमियत साबित कर रहे हैं। उदाहरण के लिए एसआईपी पंजीकरण इस अवधि में करीब 60 फीसदी बढ़ा। साथ ही डेट एयूएम पिछले वित्त वर्ष में दोगुने से ज्यादा होकर 5,099 करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जो वित्त वर्ष 20 में 2,182 करोड़ रुपये था।
आईडीएफसी एमएफ के प्रमुख (प्रॉडक्ट्स) एस बसु ने कहा, इस बढ़त में पहली बार निवेश करने वालों का वर्चस्व है, जो निवेश पर विचार कर रहे थे और म्युचुअल फंड में निवेश को सही दिशा में उठाया गया कदम मान रहे हैं। उन्होंने कहा, फिनटेक कंपनियां प्रासंगिक सूचनाएं मसलन पिछला रिटर्न, जोखिम और फंड का मकसद आदि मुहैया कराते हैं, जो उनके निवेश की यात्रा सहज बना रहा है।
उद्योग के भागीदारों ने कहा, एनालिटिकल टूल्स मसलन नई पीढ़ी के एमएफ प्लेटफॉर्म की तरफ से निवेश पर रिटर्न की पेशकश वैसे निवेशकों को भाता है, जिनका झुकाव शेयर बाजारों में सीधे निवेश की ओर था।
जब इक्विटी फंडों से साल के ज्यादा समय में शुद्ध निकासी दिख रही थी तब फिनटेक कंपनियों ने अपनी परिसंपत्तियों में इजाफा देखा। एसआईपी जारी रखने के लिए मोबाइल ऐप के जरिए समय पर भेजे गए नोटिफिकेशन से ऐसे प्लेटफॉर्म को परिसंपत्तियां इकट्ठा करने में मदद मिली।
कुवेर के सीईओ गौरव रस्तोगी ने कहा, निवेश की पूरी प्रक्रिया के डिजिटलीकरण के बाद पिछले कुछ वर्षों में डायरेक्ट प्लान की मांग हर आयु वर्ग के बीच है और यह बड़े व छोटे शहरोंं में एक जैसी है। ऑनलाइन शॉपिंग करने वालों ने महसूस किया कि वे ऑनलाइन निवेश भी कर सकते हैं।
अभी ज्यादातर फिनटेक एमएफ वितरक प्लेटफॉर्म कमीशन नहींं लेते और ज्यादातर डायरेक्ट प्लान की पेशकश करते हैं, जहां कुल खर्च अनुपात कम है। यह देखना अभी बाकी है कि क्या एमएफ वितरकों के साथ वैसा ही व्यवहार होगा जब वे कमीशन वसूलना शुरू करेंगे।
हमेशा से निवेश कर रहे निवेशक अभी भी एएमसी के पोर्टल के जरिये निवेश करना पसंद करते हैं। वहीं फिनटेक कंपनियां ज्यादातर पंजीकृत फंड हाउस की योजनाओं की पेशकश करते हैं, जो उन्हें पूरे पोर्टफोलियो को एक जगह एकीकृत करने में निवेशकों की मदद करता है।