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मंदी के साथ उच्च जोखिम का खतरा

Last Updated- December 11, 2022 | 6:47 PM IST

मई में किए गए बोफा ग्लोबल के फंड मैनेजर सर्वे (एफएमएस) में खुलासा हुआ है कि केंद्रीय बैंकों के सतर्क रुख, मुद्रास्फीति से मंदी के जोखिम, और रूस-यूक्रेन इक्विटी बाजारों के लिए सबसे बड़े जोखिम हैं। इस बीच, कोविड-19 वर्ष 2020 और 2021 के बीच सबसे बड़े जोखिम के तौर पर समझा गया था, वहीं अब यह घटा है और सिर्फ शुद्घ तौर पर 1 प्रतिशत प्रतिभागी इसे खतरे के तौर पर देख रहे हैं। पिछले दशकों के दौरान एक दर्जन से ज्यादा जोखिम ने निवेशकों, वैश्विक एफएमएस को चिंतित किया। बोफा ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है, ‘वर्ष 2011 से निवेशकों की मुख्य चिंताएं यूरोजोन का कर्ज और संभावित गिरावट, चीन में वृद्घि, व्यापारिक टकराव, वैश्विक तौर पर कोरोनावायरस, और अब मुद्रास्फीति/बॉन्ड प्रतिफल तथा केंद्रीय बैंक द्वारा दर वृद्घि हैं।’हालांकि चिंताएं इस सूची में हावी हैं और कुछ का वित्तीय बाजार स्थायित्व के लिए जोखिम के तौर पर असर पड़ेगा। हालांकि ताजा सर्वेक्षण से खुलासा हुआ है कि मौजूदा समय में निवेशक काफी चिंतित हैं।  बोफा की रिपोर्ट में कहा गया है, ‘हमारा एफएमएस फाइनैंशियल मार्केट स्टैबिलिटी रिस्क्स इंडिकेटर मौजूदा समय में 7.5 पर है, जो रिकॉर्ड ऊंचा स्तर है। फिलहाल पिछले संकटों (जैसे वैश्विक वित्तीय संकट, कोविड से संबंधित झटकों) से पूर्व के मुकाबले जोखिम से बचने का स्तर ऊंचा है। वित्तीय बाजारों के स्थायित्व के लिए ऊंचे संभावित जोखिम से इक्विटी कीमतों में और गिरावट का संकेत मिलता है।’

First Published - May 23, 2022 | 12:31 AM IST

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