भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने अगस्त में रीपो दर में एक बार फिर 50 आधार अंक का इजाफा कर दिया। इसके साथ ही रीपो दर 5.4 फीसदी हो गई और लॉकडाउन के बाद से रीपो दर में कुल 140 आधार अंक की वृद्धि हो चुकी है।
इस बार की बढ़ोतरी के साथ ही तमाम बैंकों ने आवास ऋण की ब्याज दरों में इजाफा कर दिया है। आईसीआईसीआई बैंक, बैंक ऑफ इंडिया और इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनैंस जैसी कई ऋणदाता संस्थाओं ने तो मौद्रिक नीति समिति की बैठक से पहले ही ब्याज दरें बढ़ा दी थीं। जाहिर है कि आवास ऋण ग्राहकों के ऊपर भी बोझ बढ़ गया है।
बोझ यहीं खत्म होता नहीं दिख रहा क्योंकि ज्यादातर अर्थशास्त्री और वित्तीय बाजार विशेषज्ञ एकसुर में कह रहे हैं कि रिजर्व बैंक अभी दर में और इजाफा करेगा। एचएसबीसी सिक्योरिटीज ऐंड कैपिटल मार्केट्स में भारत की मुख्य अर्थशास्त्री प्रांजुल भंडारी ने हाल में एक रिपोर्ट में कहा था कि चालू कैलेंडर वर्ष के अंत तक रीपो दर बढ़कर 6 फीसदी तक जा सकती हैं।
फौरी असर
रीपो दर में 50 आधार अंक बढ़ोतरी का मतलब है कि 50 लाख रुपये के 20 साल के कर्ज में मासिक किस्त (ईएमआई) करीब 1,545 रुपये बढ़ रही है। बैंकबाजार के मुख्य कार्य अधिकारी आदिल शेट्टी कहते हैं, ‘अगर महंगाई का हाल यही रहा तो रीपो दर जल्द ही 6 फीसदी तक पहुंच सकती है। आवास ऋण पर कम से कम ब्याद दर भी रीपो दर से करीब 250 आधार अंक यानी करीब 2.5 फीसदी ऊपर रहती है। इस हिसाब से इस समय न्यूनतम ब्याज दर 7.9 फीसदी है और रीपो दर 6 फीसदी पर जाने के बाद करीब 8.5 फीसदी हो जाएगी।’
मगर जेएलएल में भारत के मुख्य अर्थशास्त्री और अनुसंधान एवं रियल एस्टेट इंटेलिजेंस सर्विस प्रमुख सामंतक दास कहते हैं कि रीपो दर में इजाफे की तुलना में आवास ऋण की ब्याज दर कुछ कम बढ़ेगी। वह कहते हैं, ’50 आधार अंक इजाफे का मतलब है कि आवास ऋण का ब्याज 30-40 आधार अंक बढ़ेगा और उससे मकानों की बिक्री कुछ समय के लिए सुस्त पड़ सकती है।’
मौजूदा कर्जदारों के लिए विकल्प
अगर आपने पहले ही आवास ऋण ले रखा है तो घबराने की जरूरत नहीं है। घर के लिए कर्ज की मियाद आम तौर पर 15 साल या इससे भी ज्यादा होती है। इसलिए बीच में कई बार आपका ब्याज कम या ज्यादा हो सकता है।
पैसाबाजार के मुख्य कार्य अधिकारी और सह-संस्थापक नवीन कुकरेजा समझाते हैं, ‘कर्जदार अपने बैंक या वित्तीय संस्थान से बात कर या तो कर्ज चुकाने की मियाद बढ़वा सकते हैं या ईएमआई की रकम बढ़वा सकते हैं। मियाद बढ़वाते हैं तो अभी तो आपको राहत दिखेगी मगर असल में आप कुल मिलाकर ज्यादा ब्याज चुकाएंगे। इसके बजाय ईएमआई की रकम बढ़वाना बेहतर है क्योंकि उसमें ब्याज की रकम कम ही होगी। जिनके पास इस समय कुछ रकम रखी है, उन्हें पहला मौका मिलते ही आवास ऋण के एक हिस्से का प्री-पेमेंट कर लेना चाहिए और अपनी सहूलियत के हिसाब से मियाद कम करा लेनी चाहिए ताकि ब्याज के नाम पर आपको कम रकम देनी पड़े।’ इसके लिए आप अपनी कंपनी से मिले बोनस का इस्तेमाल कर सकते हैं या किसी पुरानी निवेश योजना के परिपक्व होने पर मिलने वाली रकम डाल सकते हैं और कर्ज की मियाद कम करा सकते हैं।
कर्ज लेने वाले बैलेंस ट्रांसफर का विकल्प भी अपना सकते हैं। कुकरेजा की सलाह है, ‘जिन कर्जदारों के क्रेडिट प्रोफाइल में काफी सुधार हो गया है, वे ब्याज के मद में बचत करने के लिए आवास ऋण के बैलेंस ट्रांसफर की भी सोच सकते हैं। क्रेडिट प्रोफाइल बेहतर होने से उन्हें दूसरे बैंकों या संस्थानों से काफी कम ब्याज दर पर कर्ज मिल सकता है।’
नया कर्ज लेने वाले
अगर कोई व्यक्ति इस समय आवास ऋण लेने की सोच रहा है तो उसे ज्यादा सतर्कता बरतनी चाहिए और देख लेना चाहिए कि वह हर महीने कितनी ईएमआई चुका सकता है। ब्याज दरें हमेशा बढ़ती नहीं रहेंगी मगर यह भी मत सोचिए कि निकट भविष्य में उनमें कटौती हो जाएगी। शेट्टी कहते हैं, ‘पहले देख लीजिए कि आप कितने तैयार हैं। कभी न कभी ब्याज दर कुछ नरम होगी या नीचे भी चली जाएगी, जिससे आपके लिए काम आसान हो जाएगा। आपको देखना होगा कि इस समय किसी मुश्किल में पड़े बगैर आप वहां तक पहुंच जाएं।’ इस बारे में ज्यादातर वित्तीय योजनाकार यही सलाह देते हैं कि आप पर सभी प्रकार के कर्जों की कुल ईएमआई का बोझ आपके हाथ में आने वाले वेतन के 35-40 फीसदी से अधिक कभी नहीं होनी चाहिए।
अगर आपका आवास ऋण दो-तीन महीने ही मंजूर हुआ है तो कर्ज मंजूर करने वाली संस्था या बैंक के पास जाइए और पूछिए कि ब्याज की नई दरों के हिसाब से आपको कितनी रकम मिलेगी। यह जरूरी है क्योंकि जिस समय आपका कर्ज मंजूर हुआ था उस समय चल रही ब्याज दर को नहीं माना जाता बल्कि आपकी ईएमआई पर वह ब्याज दर लागू होगी, जो कर्ज की रकम आपके खाते में आते समय चल रही होगी।