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सोने में आई गिरावट तो निवेश बढ़ाएं फटाफट

Last Updated- December 12, 2022 | 1:42 AM IST

सोना शुक्रवार को 47,139 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। इस समय पिछले एक साल का इसका प्रतिफल ऋणात्मक 16 फीसदी के आसपास है। पिछले 15 साल में रोजाना एक साल का प्रतिफल देखा जाए तो सोने का सबसे कम प्रतिफल 14 नवंबर, 2014 को ऋणात्मक 17.6 फीसदी था। इस महीने एक समय तो सोना उसी आंकड़े के पास पहुंच गया था। आम तौर पर संपत्ति की किसी श्रेणी के प्रति निवेशकों का रुझान उसके पिछले प्रतिफल से प्रभावित होता है। इस समय प्रतिफल कमजोर नजर आ रहा है। ऐसे में आपको इस पीली धातु से बचना चाहिए या इस पर दांव लगाना चाहिए?
बढ़ा हौसला सोने के लिए खराब

कोरोना महामारी से मचे हाहाकार के बीच 7 अगस्त, 2020 को सोना 55,922 रुपये प्रति 10 ग्राम की ऊंचाई छू गया था मगर उसके बाद लुढ़कन शुरू हो गई। कोरोनावायरस का टीका आ गया तो अनिश्चितता कम हुई और आर्थिक उम्मीदें बढ़ गईं। सरकार और केंद्रीय बैंकों के बड़े राजकोषीय और मौद्रिक प्रोत्साहनों से भी सुधार को बल मिला। यह सब सोने के पक्ष में नहीं गया। मोतीलाल ओसवाल फाइनैंशियल सर्विसेज के प्रमुख (जिंस एवं मुद्रा) किशोर नार्ने ने कहा, ‘वृद्धि के पटरी पर लौटने और लोगों का भरोसा बढऩे से सुरक्षित संपत्तियों की जरूरत घट गई, जिससे सोना लुढ़का है।’ सोने की कीमतें अमेरिकी अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता से बढ़ रही थी मगर उसमें तगड़ा सुधार हो रहा है। 
ऐसे माहौल में शेयरों जैसी जोखिम वाली संपत्तियां ज्यादा लुभावनी बन गई हैं और निवेश सोने से शेयरों में जाने लगा है। इन संपत्तियों के शानदार प्रतिफल देने से उनमें ज्यादा निवेश आ रहा है। पिछले एक साल में निफ्टी 50 ने 44.9 फीसदी प्रतिफल दिया है। इसी तरह निफ्टी मिडकैप 150 सूचकांक का प्रतिफल 73.4 फीसदी और निफ्टी स्मॉलकैप 250 का 99.4 फीसदी रहा है।
क्या सोने में आएगा सुधार?

इस पीली धातु की कीमत एक ही वजह से बढ़ सकती है और वह है महंगाई। नार्ने ने कहा, ‘अगले करीब 18 महीने में महंगाई समस्या खड़ी कर सकती है। हालांकि केंद्रीय बैंक इसे नियंत्रित करने की कोशिश करेंगे मगर इसे पूरी तरह काबू करना उनके लिए मुमकिन नहीं होगा। अगर महंगाई का दबाव ज्यादा रहा तो मुद्रा का अवमूल्यन हो सकता है और सोने को नई उछाल मिल सकती है।’ 
निवेशकों को विकसित देशों, विशेष रूप से अमेरिका के आर्थिक आंकड़ों पर भी बारीक नजर रखनी चाहिए। क्वांटम म्युचुअल फंड के वरिष्ठ फंड प्रबंधक (वैकल्पिक निवेश) चिराग मेहता ने कहा, ‘अगर वृद्धि लडख़ड़ाई और इस वजह से केंद्रीय बैंक को अतिरिक्त कदम उठाने पड़े तो सोने की संभावनाएं सुधर सकती हैं।’

अमेरिकी अर्थव्यवस्था लडख़ड़ाने की आशंका या संकेतों के बारे में पूछने पर मेहता कहते हैं, ‘हाल के आर्थिक आंकड़े मिले-जुले रहे हैं। अर्थव्यवस्था खपत से ही पटरी पर आती है और खपत सरकारी मदद की वजह से बढ़ी है। यह मदद बंद होने के बाद ही पता चलेगा कि सुधार कितना टिकाऊ है।’
लंबी अवधि में डॉलर कमजोर हो सकता है। अमेरिकी सरकार का राजकोषीय घाटा लंबे समय तक ऊंचा रहने के आसार हैं, जिससे मुद्रा में कमजोरी आएगी। कमजोर डॉलर सोने के लिए सकारात्मक है। केडिया एडवाइजरी के निदेशक अजय केडिया ने कहा, ‘कोविड की तीसरी लहर से फिर आर्थिक अनिश्चितता पैदा होगी और इससे सोने में तेजी आ सकती है।’
आपको क्या करना चाहिए? 

वृद्घि लडख़ड़ाने या महंगाई बढऩे का जोखिम पैदा हो सकता है और इस जोखिम से महफूज रहने का इंतजाम निवेशकों को करना चाहिए। यह सुरक्षा या हेजिंग सोने से मिल सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस समय सोने की कीमत जितनी होनी चाहिए, उससे कम है। मेहता ने कहा, ‘अगर आप सोने के मुकाबले धन की आपूर्ति के लंबी अवधि के ग्राफ को देखते हैं तो पता चलता है कि सोने की कीमत जितनी होनी चाहिए, उससे कम है।’
धन की आपूर्ति बढऩे से कागजी मुद्रा का अवमूल्यन होता है। सोना मौद्रिक संपत्ति है, जिसका अवमूल्यन नहीं हो सकता है। इसलिए धन की आपूर्ति बढऩे से सोने की कीमत भी बढऩी चाहिए। लेकिन अभी ऐसा नहीं हुआ है। 

ऐसे निवेशक जिनके पोर्टफोलियो में सोने का 10 से 15 फीसदी हिस्सा नहीं है, उन्हें सोने की मौजूदा गिरावट का इस्तेमाल इसमें निवेश के लिए करना चाहिए। केडिया के मुताबिक इस समय जो निवेशक सोने में निवेश कर रहा है, उसे कम से कम तीन साल निवेश बनाए रखना चाहिए।

First Published - August 23, 2021 | 12:02 AM IST

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