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भारत के छोटे निवेशक इक्विटी पर हैं अंडरवेट

Last Updated- December 11, 2022 | 6:00 PM IST

वेलेंटिस एडवायजर्स के संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक ज्योतिवर्द्धन जयपुरिया ने पुनीत वाधवा के साथ बातचीत में कहा कि पिछले कुछ महीनों के दौरान भारी बिकवाली के बाद भी विदेशी निवेशक भारत को बड़ी वैश्विक अर्थव्यस्थाओं में मजबूत बाजार के तौर पर देख रहे हैं।  उनका कहना है कि भारत सफलताओं की मिसाल है, लेकिन साथ ही वह महंगा है। पेश हैं बातचीत के मुख्य अंश:

बाजार के लिए अभी बड़ी चिंता क्या है- बढ़ती ब्याज दरें? भूराजनीतिक तनाव?, या तरलता आधारित बदलाव?
हमें याद रखना चाहिए कि बाजारों में भारी तेजी के बाद, मूल्यांकन महंगे हो गए हैं। इसे देखते हुए, मुद्रास्फीति बढ़ी है। हम ऐसे हालात में हैं  जब वैश्विक केंद्रीय बैंक ब्याज दरें ब़ा रहे हैं। केंद्रीय बैंकों ने दर वृद्धि पर जोर दिया है। यदि वे पिछले साल ब्याज दरें बढ़ाना शुरू करते तो हम पहले ही भारी तेजी दर्ज करते। मुद्रास्फीति समान नहीं रहने से अब केंद्रीय बैंकों को इस पर लगाम लगाने के लिए आगे आना पड़ रहा है। वहीं रूस-यूक्रेन युद्ध ने भी मुद्रास्फीति को बढ़ावा दिया है। मुद्रास्फीति नियंत्रित करने के प्रयास में केंद्रीय बैंक अर्थव्यवस्था को मंद बनाने को भी इच्छुक हैं। बाजार के नजरिये से ऐतिहासिक तौर पर केंद्रीय बैंकों ने समान हालात में आसान उधारी का लक्ष्य मुश्किल से ही हासिल किया और मंदी की आशंका गहरा गई है।
आपको विदेशी ग्राहकों की प्रतिक्रिया कैसी रहने की उम्मीद है?
मैं कुछ सप्ताह से अमेरिका में था।  अपनी कई बैठकों में मैंने एक ही संदेश दिया कि विदेशी निवेशक भारत को बड़ी वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं में आकर्षक बाजार के तौर पर देखते हैं। निवेशकों का मानना है कि भारत अगले कुछ साल में तेजी से उभरती अर्थव्यवस्था बन जाएगा। लेकिन भारत भारी विदेशी संस्थागत निवेश किासी दर्ज कर रहा है, इसकी भी वजह हैं। इनमें से एक कारण यह है कि भारत की सफलता की कहानी मजबूत है, लेकिन यह बाजार महंगा हो गया है। भारत का पीई मूल्यांकन उभरते बाजार (ईएम) सूचकांक के पीई मूल्यांकन के मुकाबले करीब 85 प्रतिशत अधिक है। दूसरा, कई निवेशक पहले ही भारत पर ओवरवेट हैं जिससे अन्य ईएम के मुकाबले यह ज्यादा मजबूत प्रदर्शक है।

क्या निवेशक समस्याओं के बावजूद फिर से यहां निवेश को इच्छुक दिख रहे हैं?
भारत में छोटे निवेशक इक्विटी पर नकारात्मक बने हुए हैं। ढांचागत तौर पर हम इस पर कायम हैं कि फिलहाल भारतीय इक्विटी में खुदरा भागीदारी बढ़ाने पर ध्यान बरकरार रखना होगा। मौजूदा गिरावट में हम अपने फंड में पूंजी निवेश देख रहे हैं। अल्पावधि में कुछ खुदरा बिकवाली की आशंका है, क्योंकि कुछ नए निवेशकों ने महामारी के बाद बाजार में प्रवेश किया है और अपने निवेश करियर में पहली बार गिरावट देखी है।

इन घटनाक्रम के बीच आपकी निवेश रणनीति क्या रही है?
हम 2021 के अंत से ही बाजारों पर सतर्क हैं। अब हमारा यह मानना है कि बाजारों में ट्वें टी-20 दौर पीछे छूट चुका है और हम टेस्ट क्रिकेट के दौर में प्रवेश कर रहे हैं। हमने अपने पूरे पोर्टफोलियो में औसत नकदी स्तर के मुकाबले बेहतर तैयारी की है और सभी पोर्टफोलियो में 15-20 प्रतिशत नकदी बरकरार रखे हुए हैं। हालांकि हमने कुछ हद तक नकदी में कमी की है, लेकिन हम दो अंक के नकदी स्तर पर बरकरार हैं और गिरावट पर इसका इस्तेमाल करेंगे।

आपकी खरीदारी सूची में कौन से क्षेत्र और शेयर शामिल हैं?
हम तीन वजहों से बैंकिंग क्षेत्र को पसंद कर रहे हैं। पहला, प्रावधान में कमी आने की संभावना है। दूसरा, ब्याज दरों में वृद्धि अल्पावधि मार्जिन के लिए अच्छी है, क्योंकि जमाओं में बदलाव में  समय लगता है। तीसरा, ऋण वृद्धि में भी तेजी आ  रही है। इनसे  बैंकों के मुनाफे को मदद  मिलेगी।

First Published - June 27, 2022 | 12:50 AM IST

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