तकनीकी उद्योग के दिग्गजों का मानना है कि वेब 3.0 के बाद नई रचनात्मक दक्षता की मांग बढ़ने के कारण कौशल विकास पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर अपने भाषण में घोषणा की थी कि यह इंडिया का ‘टेकेड’ है। भारत डिजिटल क्रांति के मुहाने पर खड़ा है। (भारत ने सरकार ने साल 2015 में डिजिटल इंडिया कार्यक्रम शुरू किया था। इसके तहत देश में डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए केंद्र के मंत्रालयों और राज्यों के कई कार्यक्रम शुरू किए गए थे।)
तकनीक उद्योग ने सरकार की पहल की प्रशंसा की है लेकिन कई साझेदारों का कहना है कि इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए कौशल विकास में निवेश करना होगा। इस उद्देश्य की प्राप्ति में ग्रामीण क्षेत्रों में संपर्क व आधारभूत संरचना चुनौती है।
सैप लैब्स इंडिया की प्रबंध निदेशक एवं वरिष्ठ उपाध्यक्ष सिंधु गंगाधरन ने कहा, ‘डिजिटल इंडिया के नए विजन को पूरा करने के लिए डिजिटल क्षेत्र में आसानी से काम करने वाले और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप काम करने वाले श्रमबल की जरूरत होगी। इसके लिए कौशल के निरंतर विकास/कौशल के फिर से विकास की जरूरत होगी।’ वह कहती हैं कि हम डिजिटल रूप से कितने तैयार हैं, इसका आने वाले 25 सालों में बड़े स्तर पर प्रभाव पड़ेगा। यह प्रभाव भौगोलिक सीमाओं से परे होगा। उन्होंने कहा ‘इस विकास के केंद्र में समावेश, स्थिरता और जन-केंद्रित नवाचार लाना होगा।’
सैप लैब्स इंडिया ने हाल ही में सैप सेंटर फॉर डिजिटल गवर्नमेंट की स्थापना की है। इसकी स्थापना सैप लैब्स ने इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी के नैशनल ई-गवर्नेंस डिवीजन के सहयोग से की है। गंगाधरन ने कहा कि भारत का टेकेड बौद्धिक संपदा के क्षेत्र में घर और वैश्विक संस्थाओं से संचालित होगा। बौद्धिक संपदा के तहत कृत्रिम मेधा (आर्टिफिशल इंटेलिजेंस-एआई), ऑटोमेशन, क्लाउड, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, 5जी पर आधारित कारोबार, आंकड़ों पर आधारित निर्णय लेने की प्रक्रिया आदि शामिल होंगी। उन्होंने कहा, ‘भारत में शोध व विकास का श्रमबल सैप का मुख्य आधार है। हमारे सभी स्तरों पर नवाचार यहां से आते हैं। हम 2025 के चौथी तिमाही पर भारत में श्रमबल को दोगुना करेंगे। हमने बेंगलूरु के देवनहल्ली में नया परिसर बनाया है।’ उद्योग के दिग्गजों का विश्वास है कि वेब 3.0 के अस्तित्व में आने के बाद कौशल को बेहतर बनाना और जरूरी हो गया है।
विश्व के मेटावर्स का इंजन है भारत
एक्सेंचर के वरिष्ठ प्रबंध निदेशक महेश जुराले भारत में अपनी कंपनी के उन्नत प्रौद्योगिकी केंद्रों का नेतृत्व करते हैं। जुराले ने कहा, ‘हम विश्व के मेटावर्स इंजन के रूप में भारत को देखते हैं। भारत में हमारे ग्राहकों की व्यापक महत्त्वाकांक्षी मांगों को पूरी करने के लिए प्रतिभा, नवाचार और क्षमता है। कौशल संपन्न विशेषज्ञों की कृत्रिम मेधा (एआई), ब्लॉकचेन, सुरक्षा और 3डी वर्ल्ड क्रिएटरों के क्षेत्र में जरूरत है। हम रियल वर्ल्ड ऐप्लिकेशन के लिए मेटावर्स के आवश्यक तत्त्वों को एक जगह लाने की जरूरत है।’
उद्योगों की संस्था नैसकॉम ने साल 2020 में शोध पत्र ‘द न्यू डेकेड स्ट्रैटजिक रिव्यू’ प्रकाशित किया। इसमें तेजी से बदलती तकनीकों को समन्वित करने की जरूरत पर बल दिया गया है। नैसकॉम ने कहा कि ‘टेकेड’ में ‘तकनीक की संभावना’ से ‘तकनीक का प्रभाव’ डालने वाला बनने के लिए समन्वित प्रयास की जरूरत है। इससे लोगों की जिंदगी में बदलाव आएगा। विशेषज्ञों ने कहा कि देश में डिजिटल का दायरा बढ़ाने के लिए राज्य सरकारों, नियामकों, नोडल मंत्रालयों, निजी व गैरलाभकारी संस्थाओं को एकजुट होकर प्रयास करने की जरूरत है। लोगों के सोचने का ढंग सकारात्मक है और तकनीक को शहरों से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक फैलाया जाना है।
मार्केट का शोध करने वाली मार्केट रिसर्च के शोध क्षेत्र के वरिष्ठ उपाध्यक्ष विक्रम गुप्ता ने कहा कि आने वाले समय में इस तकनीक का उपयोग स्वास्थ्य देखभाल, शिक्षा और कृषि अर्थव्यवस्था में होगा। उन्होंने कहा, ‘आम लोगों तक तकनीक पहुंचने का आंकड़ा बहुत तेजी से बढ़ रहा है। इसके तहत भारतीय विशिष्ट पहचान में 1.2 अरब लोग, इंटरनेट का इस्तेमाल करने वाले 56 करोड़ उपभोक्ता, प्रति ग्राहक डेटा उपयोग 8.3 जीबी हो गया है। तेजी से बढ़ने का यह तरीका निर्धारित लक्ष्य के करीब लेकर जा रहा है।’
गुप्ता ने कहा कि हालांकि उद्योग का डिजिटल क्षेत्र को अपनाने का रवैया सकारात्मक है लेकिन गांव कनेक्टिविटी और आधारभूत ढांचे के क्षेत्र में पिछड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि डिजिटल इंडिया के तहत सार्वजनिक सेवा केंद्रों की पहल से ग्रामीण आबादी भी इंटरनेट के फायदे को जान चुकी है जैसे ऑनलाइन बैंकिंग।
उन्होंने कहा, ‘हमें अपने शोध से पता चला है कि उपभोक्ता व्यापक स्तर पर तकनीक को अपना रहे हैं। कई लोकप्रिय ब्रांड ग्रामीण क्षेत्रों में तेजी से अपनी पहुंच बढ़ा रहे हैं। इससे यह पता चलता है कि इस क्षेत्र में विकास की असीम संभावनाएं हैं।’
सरकारी आंकड़ों के अनुसार देश के राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में जून, 2022 तक 5,31,203 सार्वजनिक सेवा केंद्र थे, इनमें से ग्राम पंचायत स्तर पर 4,20,198 थे।
पीडब्ल्यूसी इंडिया में साझेदार मिहिर गांधी ने कहा कि जनधन-आधार-मोबाइल ने जमीनी स्तर पर डिजिटल इंडिया की पहल को साकार करने में मदद किया है। हालांकि डिजिटल क्षेत्र में पश्चिमी व दक्षिण के राज्यों की तुलना में उत्त व उत्तर पूर्व के कई क्षेत्र पिछड़े हुए हैं।
उन्होंने कहा कि प्रचार प्रसार के कार्यों को किए जाने की जरूरत है। इसके तहत जागरूकता और कौशल बढ़ाया जाना चाहिए। आधारभूत संरचना की स्थापना को प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए। आधारभूत संरचना का उपयोग करने पर उसका भुगतान किया जाना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने स्वतंत्रता दिवस के भाषण में कहा था कि देश में स्टार्टअप के विकास का नेतृत्व टियर-दो और टियर-तीन शहरों की प्रतिभाओं ने किया। गांधी ने कहा कि राज्य सरकारों के ठोस प्रयासों से स्टार्टअप के ईकोसिस्टम को मदद मिलेगी। अभी तकनीक के केंद्र बेंगलूरु जैसे हब हैं, अब तकनीक का विस्तार छोटे शहरों तक होगा।