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आईपीओ को प्राथमिक बाजार में उत्साह का इंतजार

Last Updated- December 11, 2022 | 8:46 PM IST

प्राथमिक बाजार ने शेयरों में उतार-चढ़ाव बढऩे की वजह से सुस्ती के दौर में प्रवेश किया है। निवेश बैंकरों का कहना है कि कई उत्साहजनक कंपनियां अपने आईपीओ लाने के लिए इंतजार कर रही हैं। जब सेकंडरी बाजार में मजबूत प्रतिफल मिलेगा, बाजार नियामक सेबी से मंजूरी हासिल कर चुकीं कंपनियां बाजार में अपने आईपीओ के जरिये कोष उगाही शुरू कर देंगी।
बिजनेस स्टैंडर्ड ने उन आईपीओ के बारे में बाजार कारोबारियों से बातचीत की जो अच्छी निवेशक दिलचस्पी हासिल कर सकते हैं। विश्लेषकों के अनुसार, निवेशक बड़े और अच्छी गुणवत्ता वाले आईपीओ पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं। हमने खासकर ऐसे चार नामों पर ध्यान दिया है:

एलआईसी (अनुमानित आकार: 65,000 करोड़ रु.)
सरकार के स्वामित्व वाली बीमा दिग्गज एलआईसी का आईपीओ घरेलू पूंजी बाजार के लिए पूंजी विभाजन को बढ़ावा देगा। इसकी वजह यह है कि 65,000 करोड़ रुपये के साथ कंपनी का आईपीओ अब तक घरेलू बाजार में सबसे बड़ा होगा। एलआईसी ब्रांड बीमा खरीदारी के लिहाज से चर्चित नाम बन गया है। वित्त वर्ष 2021 में 28.3 करोड़ पॉलिसी और 13.5 लाख एजेंटों के साथ कंपनी की नए बिजनेस प्रीमियम में 66 प्रतिशत बाजार भागीदारी थी। 30 सितंबर, 2021 को एलआईसी की वैल्यू 5.4 लाख करोड़ रुपये थी। सितंबर 2021 तक, एलआईसी की प्रबंधन अधीन परिसंपत्तियां 39.6 लाख करोड़ रुपये थीं। उसकी एयूएम भारत में सभी निजी जीवन बीमा कंपनियों की संयुक्त एयूएम के मुकाबले 3 गुना से भी ज्यादा है। वह पूरे घरेलू म्युचुअल फंड उद्योग के मुकाबले भी बड़ी है। वित्त वर्ष 2021 में, एलआईसी ने 2,907 करोड़ रुपये का शुद्घ लाभ दर्ज किया, जबकि वित्त वर्ष 2022 के पहले 6 महीनों में यह आंकड़ा 1,504 करोड़ रुपये था।

डेल्हिवरी (अनुमानित आकार: 7,460 करोड़ रु.)
गुरुग्राम स्थित डेल्हिवरी वित्त वर्ष 2021 में राजस्व के लिहाज से भारत की सबसे बड़ी, मल्टीमॉडल, संपूर्ण तौर पर एकीकृत लॉजिस्टिक और आपूर्ति शृंखला कंपनी है। कंपनी को तेजी से बढ़ रही ई-कॉमर्स थीम पर दांव के तौर पर महत्वपूर्ण समझा जा रहा है। वह लॉजिस्टिक सेवाओं की फुल-स्टैक रेंज प्रदान कराती है, जिनमें भंडारण एवं सप्लाई चेन सॉफ्टवेयर शामिल हैं। कंपनी ई-कॉमर्स रिटर्न सर्विस, पेमेंट कलेक्शन, इंस्टॉलेशन जैसी सेवाएं भी मुहैया कराती है। डेल्हिवरी भारत की तेजी से बढ़ रही थर्ड-पार्टी एक्सप्रेस पार्सल डिलिवरी कंपनी है। 30 जून 2021 को समाप्त तीन महीनों के दौरान भारत के कुल ई-कॉमर्स बिक्री में उसकी बाजार भागीदारी करीब 20 प्रतिशत रही।
एपीआई होल्डिंग्स (अनुमानित आकार: 6,250 करोड़ रुपये)
एपीआई होल्डिंग्स देश की सबसे बड़ी डिजिटल हेल्थकेयर कंपनी है और वह ऑनलाइन फार्मेसी मार्केप्लेस फार्मइजी की पैतृत कंपनी भी है, जिसकी ऑनलाइन फार्मेसी क्षेत्र में मजबूत ब्रांड उपस्थिति है। कंपनी को नैसपर्स, टीपीजी, और टेमासेक जैसे बड़े निवेशकों का समर्थन हासिल है। कंपनी ने पारंपरिक से ऑनलाइन फार्मेस पर ध्यान बढ़ाया है और वह तेजी से बढ़ रहे स्वास्थ्य जांच बाजार पर भी जोर दे रही है। एपीआई के जरिये हेल्थकेयर समाधान मुहैया कराने के लिए आर्टीफिशियल इंटेलीजेंस और मशीन लर्निंग जैसे डिजिटल टूल्स का नवीनतम इस्तेमाल करती है। कंपनी की पूरे भारत में उपस्थिति है और उससे हजारों फार्मेसी, चिकित्सक तथा अस्पताल जुड़े हुए हैं। पिछले साल उसने थायरोकेयर टेक्नोलॉजीज में 66 प्रतिशत हिस्सा खरीदा।

एमक्योर फार्मा (अनुमानित आकार: 4,000 करोड़ रुपये)
पुणे की एमक्योर फार्मास्युटिकल्स प्रमुख थेरेप्यूटिक क्षेत्रों में दवा उत्पादों की प्रख्यात निर्माता है। कंपनी को निजी इक्विटी दिग्गज बेन कैपिटल का समर्थन हासिल है। एमक्योर एचआईवी एंटीवायरल्स, गायनेकॉलोजी, और रक्त संबंधित थेरेप्यूटिक्स में बाजार अग्रणी कंपनियों में शामिल है। उसका पोर्टफोलियो ऊंची वृद्घि वाले क्रोनिक्स और सब-क्रोनिक्स थेरेप्यूटिक्स क्षेत्रों पर केंद्रित है। वित्त वर्ष क्रोनिक्स थेरेप्यूटिकस खंड का उसी घरेलू बिक्री में 64.75 प्रतिशत योगदान रहा, जो 53.26 प्रतिशत के उद्योग औसत से काफी ज्यादा है। उसके सात ब्रांड बिक्री के लिहाज से पूरे घरेलू बाजार में शीर्ष-300 फार्मा उतपाद ब्रांडों में जगह बना चुके हैं। परिचालन से एमक्योर का राजस्व वित्त वर्ष 2019 के 4,717 करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2021 में 6,056 करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जबकि उसका शुद्घ लाभ इस अवधि के दौरान दोगुना से ज्यादा बढ़कर 418 करोड़ रुपये हो गया।

First Published - March 13, 2022 | 11:27 PM IST

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