त्योहारी सीजन के दौरान खासतौर पर दीवाली के आसपास कई तरह के उपहार मिलते हैं। इन उपहारों का लुत्फ उठाते समय, आपको याद रखना चाहिए कि कई स्रोतों से मिले उपहारों पर कर का प्रावधान होता है, खासतौर पर तब जब इन उपहारों की कीमत निर्धारित सीमा से अधिक हो जाती है।
सजग करदाता के रूप में आपकी यह जिम्मेदारी है कि आप उन उपहारों पर कर का भुगतान करें। आयकर अधिनियम ‘उपहार’ को बिना किसी सोच-विचार के मिली संपत्ति के रूप में परिभाषित करता है जो या तो नकद या कोई वस्तु हो सकती है। विक्टोरियम लीगलिस-एडवोकेट्स ऐंड सोलिसीटर्स के प्रबंध निदेशक आदित्य चोपड़ा कहते हैं, ‘इसमें नकदी, चल-अचल संपत्ति, आभूषण आदि भी शामिल हो सकता है।’
करीबी रिश्तेदारों से मिले उपहार
करीबी रिश्तेदारों से मिले उपहारों को आयकर अधिनियम की धारा 56 के तहत, कर से छूट दी गई है। इस तरह की छूट के लिए रिश्तेदारों में माता-पिता, पति या पत्नी, भाई-बहन, पति या पत्नी के भाई-बहन और पति या पत्नी के परिवार के करीबी लोग शामिल हैं।
मिगलानी वर्मा ऐंड को-एडवोकेट्स, सोलिसीटर्स ऐंड कंसल्टेंट्स के मैनेजिंग पार्टनर निखिल वर्मा कहते हैं, ‘खास रिश्तेदारों से मिलने वाले उपहारों पर कर नहीं लगता है।’ हालांकि परिवार की परिभाषा को लेकर सावधानी बरतना जरूरी है। कई रिश्तेदार, जिन्हें आप छूट मिलने वाले लोगों की सूची में मान सकते हैं, लेकिन यह जरूरी नहीं कि वे उस सूची में शामिल हों। उदाहरण के तौर पर चचेरे भाई या भाई-बहनों के बच्चों से मिले उपहारों पर कर लगता है, खास तौर पर जब इन उपहारों का मूल्य 50,000 रुपये से अधिक हो।
दोस्तों से मिले उपहार
करीबी रिश्तेदारों से मिलने वाले उपहारों के विपरीत, दोस्तों से मिले उपहारों पर आयकर अधिनियम के मुताबिक कर लगता है। इसमें केवल 50,000 रुपये तक (नकद या कोई सामान दोनों) के उपहार को कर से छूट दी गई है। वेद जैन ऐंड एसोसिएट्स के पार्टनर अंकित जैन कहते हैं, ‘अगर किसी व्यक्ति को 50,000 रुपये से ज्यादा के उपहार मिलते हैं तब उसे कर रिटर्न में इसकी घोषणा ‘अन्य स्रोतों से हुई आमदनी’ के तौर पर करना चाहिए।
उपहारों पर तभी कर लगाया जाता है जब उनमें शेयर और प्रतिभूतियां, आभूषण, पुरातात्विक सामान का संग्रह, पेंटिंग, मूर्तियां या कोई कलाकृति शामिल होती है। इस नियम में एक अपवाद शादी के दौरान मिलने वाले उपहार हैं। इस मौके पर दूल्हा-दुल्हन (लेकिन दंपती के माता-पिता नहीं) को रिश्तेदारों से इतर अन्य लोगों से मिलने वाले उपहारों पर भी कर छूट दी जाती है।
सीएनके के पार्टनर पल्लव प्रद्युम्न नारंग 50,000 रुपये की सीमा के बारे में विस्तार से बताया है, ‘दोस्तों या कारोबारी परिचितों सहित सभी गैर-रिश्तेदारों से मिले उपहारों का कुल मूल्य अगर एक वित्त वर्ष में 50,000 रुपये से अधिक है तब उपहार के कुल मूल्य पर कर लगेगा। यहां उपहार के कुल मूल्य पर कर लगाया जाएगा न कि 50,000 रुपये से अधिक मूल्य पर।’
अगर आपको रिश्तेदारों से इतर किसी और की तरफ से सोने का उपहार मिलता है तब उस पर भी कर लगाया जा सकता है। चोपड़ा कहते हैं, ‘अगर आपको सोने के गहने, सिक्के, गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) या गोल्ड म्युचुअल फंड (एमएफ) उपहार के तौर पर मिलता है, तब उपहार देने की तारीख पर इसका मूल्य 50,000 रुपये से ज्यादा होने पर कर स्लैब की दर कर चुकाना होगा।’ करीबी रिश्तेदारों से मिले सोने के उपहारों पर पूरी तरह से कर छूट है।
कंपनी मिलने वाले उपहार कर्मचारी को अगर अपनी कंपनी से उपहार मिलता है तो वह ‘वेतन आमदनी’ के रूप में कर योग्य है। नारंग कहते हैं, ‘एक वित्त वर्ष के दौरान कुल मिलाकर 5,000 रुपये से कम के उपहारों को कर छूट दी जाती है।’ इसमें उपहार का प्रमाणपत्र, हैंपर और नकद उपहार शामिल होंगे।
उदाहरण के तौर पर मान लीजिए कि आपको दीवाली के दौरान 5,000 रुपये का उपहार मिला है जबकि नए साल के मौके पर 4,500 रुपये का उपहार मिला है। ऐसे में आपको 4,500 रुपये पर कर का भुगतान करना होगा। चोपड़ा कहते हैं, ‘आपकी कंपनी को ऐसे उपहारों पर आपके वेतन से कर कटौती करना होता है।’ कई कंपनियां उपहार देने के बजाय दीवाली बोनस देती हैं। इन बोनस को वेतन का हिस्सा माना जाता है। बोनस और अन्य नकद उपहार कर्मचारी की आमदनी में जोड़े जाते हैं और उसके हिसाब से कर लगता है।
आपका दायित्व
भारत में उपहारों पर कर का भुगतान करने की जिम्मेदारी उपहार पाने वालों की होती है। वर्मा कहते हैं, ‘करदाता की जिम्मेदारी है कि वे उन्हें मिले सभी उपहारों का पूरा रिकॉर्ड रखें और कर विभाग के साथ कोई विवादास्पद स्थिति बनने से बचने के लिए इसका खुलासा करें।