सॉवरिन गोल्ड बॉन्ड (एसबीजी) योजना 2021-22 की सीरीज 10 सोमवार को खोल दी गई। इस खेप में बॉन्ड खरीदने का मौका 4 मार्च तक ही है। इस बार भारतीय रिजर्व बैंक ने सोने का भाव 5,109 रुपये प्रति ग्राम रखा है, जो नवीं सीरीज के भाव के मुकाबले 323 रुपये ज्यादा है।
भू-राजनीति से बढ़े भाव
सोने के भाव ऊपर उठते दिख रहे हैं। जनवरी के मुकाबले फरवरी अंत तक इसमें तकरीबन 5.8 फीसदी का इजाफा देखा गया। साल भर पहले के मुकाबले भाव 8.9 फीसदी चढ़ चुके हैं। हालांकि सोने के भाव में सबसे अधिक इजाफा फरवरी में ही हुआ, जिसके लिए रूस और यूक्रेन के बीच तनाव जिम्मेदार है। उनके बीच तनाव जोर पकड़ता रहा और निवेशक सोने का रुख करते गए, जो निवेश और प्रतिफल के लिहाज से सुरक्षित संपत्ति माना जाता है।
आनंद राठी शेयर ऐंड स्टॉक ब्रोकर्स में निदेशक – जिंस एवं मुद्रा नवीन माथुर कहते हैं, ‘दूसरे विश्व युद्घ के बाद से यह यूरोप के किसी देश पर सबसे बड़ा हमला है। हमले के चौथे दिन ही रूस ने अपनी परमाणु निरोधक प्रणाली को हाई अलर्ट पर डाल दिया है। अमेरिका और उसके साथियों ने रूस के कुछ बैंकों को स्विफ्ट अंतरराष्ट्रीय भुगतान प्रणाली से अलग करने के कदम उठाए हैं। इससे रूस से तेल, धातु और अनाज जैसी जिंसों का निर्यात बिगड़ सकता है।’
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो रहे इन घटनाक्रम से तो सोने को ताकत मिली ही है, महंगाई में इजाफे ने भी उसका भाव बढ़ाया है।
अनिश्चितता से सुरक्षा
रूस और यूक्रेन के बीच जारी भू-राजनीतिक संकट, कच्चे तेल की उबलती कीमतों, दुनिया भर में फैली महंगाई और पूरे विश्व के शेयर बाजारों में चल रहे उतार-चढ़ाव के कारण सॉवरिन गोल्ड बॉन्ड निवेश के अच्छे विकल्प नजर आ रहे हैं।
एसोसिएशन ऑफ रजिस्टर्ड इन्वेस्टमेंट एडवाइजर्स के चेयरमैन लोवई नवलखी कहते हैं, ‘हम सोना खरीदने की सलाह दे रहे हैं क्योंकि अनिश्चितता से सुरक्षा यही दिला सकता है। किसी भी व्यक्ति को अपनी नेटवर्थ का करीब 5 फीसदी हिस्सा सोने में निवेश करना चाहिए।’
सॉवरिन गोल्ड बॉन्ड सोने में निवेश करने के लिए दीर्घकालिक योजना है, जिसके तहत 8 साल के लिए निवेश किया जाता है। मगर इनमें तरलता कम होती है क्योंकि निवेश का पांचवां साल लगने के बाद ही निवेशक इन बॉन्डों से निकल सकते हैं और इन्हें बेचना भी ब्याज भुगतान की तारीखों पर ही संभव है। नवलखी दीर्घकालिक निवेशकों को इसमें निवेश की सलाह देते हैं। वह कहते हैं, ‘जो भाव में उतार-चढ़ाव की फिक्र किए बगैर लंबे समय तक सोने में निवेश रखना चाहते हैं, उनके लिए ये बॉन्ड अच्छे हैं क्योंकि इनमें हर साल 2.5 फीसदी ब्याज भी मिलता है।’
इतना ही नहीं, अगर इन बॉन्ड को परिपक्व होने तक अपने पास रखा जाता है तो इन पर किसी तरह का पूंजीगत लाभ कर नहीं चुकाना पड़ेगा। मगर नवलखी कहते हैं कि सॉवरिन गोल्ड बॉन्ड में निवेश करने का फैसला खरीदार के मौजूदा संपत्ति आवंटन और उसकी तरलता की जरूरतों पर निर्भर होना चाहिए। उसे देखना चाहिए कि उसने सोने में जरूरत से ज्यादा निवेश तो नहीं कर दिया है या उसका निवेश वाकई में जरूरत से कम तो नहीं है। उसे यह भी देखना होगा कि अगले आठ साल के लिए उसे इसमें निवेश किए गए धन की जरूरत तो नहीं पड़ेगी।
कारगर होगी लैडरिंग
सॉवरिन गोल्ड बॉन्ड में तरलता तो कम होती है मगर लंबे समय के लिए निवेश करने वाले लैडरिंग का इस्तेमाल कर इस समस्या से निपट सकते हैं। लैडरिंग में छोटे-छोटे टुकड़ों में लगातार निवेश किया जाता है। इसमें जब भी बॉन्ड की नई खेप आती है तब उसमें छोटी रकम लगा दी जाए। थोड़े-थोड़े अंतराल पर बॉन्ड खरीदकर निवेशक यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि निश्चित अंतराल के बाद बॉन्ड परिपक्व होते रहें और उन्हें थोड़ी-थोड़ी रकम मिलती रहे। नवलखी कहते हैं, ‘निर्धारित समय पर निवेश का अनुशासन बना रहे तो आपको शुरुआत में महंगा सोना मिलने की भरपाई हो जाएगी। साथ ही यह सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान की तरह काम करेगा।’
ब्याज पर लगेगा कर
ध्यान रहे कि सॉवरिन गोल्ड बॉन्ड से मिलने वाले ब्याज पर कर वसूला जाता है। कर की ई-फाइलिंग तथा अनुपालन संभालने वाले पोर्टल टैक्समैनेजर डॉट इन के मुख्य कार्य अधिकारी दीपक जैन बताते हैं, ‘सॉवरिन गोल्ड बॉन्ड पर मिलने वाले ब्याज को अन्य स्रोतों से हुई आय माना जाता है और उस पर निवेशक के आयकर स्लैब के मुताबिक कर वसूला जाता है।’ मगर इस ब्याज पर किसी तरह का टीडीएस नहीं लिया जाता है।
यदि निवेशक सॉवरिन गोल्ड बॉन्ड जल्दी बेचकर निकल जाता है तो उसे पूंजीगत लाभ कर भी चुकाना पड़ता है। अगर तीन साल से अधिक समय तक बॉन्ड में निवेश रखा है तो दीर्घावधि पूंजीगत लाभ कर लिया जाता है। दीर्घावधि पूंजीगत लाभ पर 20 फीसदी की दर से कर लगता है और इंडेक्सेशन का लाभ मिलता है। यदि इंडेक्सेशन का लाभ नहीं लिया जाता है तो कर की दर केवल 10 फीसदी होती है। अल्पावधि पूंजीगत लाभ पर निर्धारित स्लैब के मुताबिक ही कर वसूला जाता है।
तरलता वाले विकल्प
सॉवरिन गोल्ड बॉन्ड सूचीबद्घ होते हैं। इस हिसाब से निवेशक जब भी चाहे उन्हें एक्सचेंज पर बेचकर अपना निवेश निकाल सकता है। मगर इनमें तरलता कम होती है, इसलिए कई बार निवेशकों को इन्हें कम कीमत पर बेचना पड़ जाता है।
जिन्हें तरलता यानी नकदी की जरूरत हो सकती है, उन्हें गोल्ड ईटीएफ का रुख करना चाहिए क्योंकि वे ज्यादा तरल होते हैं। क्वांटम एसेट मैनेजमेंट कंपनी के वरिष्ठ फंड प्रबंधक – वैकल्पिक निवेश चिराग मेहता कहते हैं, ‘ये निवेश के विनियमित साधन होते हैं, जिनका कारेाबार फिजिकल सोने के तत्कालीन बाजार भाव पर एक्सचेंज में किया जाता है। इनमें किसी तरह का मेकिंग चार्ज या प्रीमियम शामिल नहीं होता।’
गोल्ड ईटीएफ 24 कैरट सोने पर चलते हैं और निवेशकों को छोटी-छोटी रकम लगाने का मौका मिल जाता है।