मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाली कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) का मानना है कि साल 2022 के दौरान वैश्विक स्तर पर उसकी रिफाइनिंग क्षमता सीमित रहेगी जिससे रिफाइनिंग मार्जिन को बल मिलेगा। आरआईएल के प्रबंधन ने शुक्रवार को वित्तीय नतीजे के बाद विश्लेषकों से बातचीत में कहा कि साल 2022 में तेल की औसत मांग 9.92 करोड़ बैरल प्रति दिन होगी। यह पिछले साल की 17 लाख बैरल प्रति दिन के मुकाबले काफी अधिक है। इससे वैश्विक स्तर पर कुल रिफाइनिंग क्षमता कम होने के कारण रिफाइनिंग मार्जिन अधिक होगा।
अप्रैल से जून 2022 तिमाही के दौरान आरआईएल को भी उच्च रिफाइनिंग मार्जिन के रुझान से फायदा होगा। पहली तिमाही में आरआईएल का सकल रिफाइनिंग मार्जिन बढ़कर 22 से 25 डॉलर प्रति बैरल हो गया जो उससे पिछली तिमाहियों में करीब 10 डॉलर प्रति बैरल के मुकाबले दोगुना से भी अधिक है। प्रति बैरल कच्चे तेल को ईंधन में बदलने पर कंपनी के कुल मार्जिन को ही सकल रिफाइनिंग मार्जिन कहते हैं। कच्चे तेल की रिफाइनिंग करने वाली कंपनी की लाभप्रदता के लिए इसे एक प्रमुख बेंचमार्क माना जाता है।
पिछले कुछ सप्ताह के दौरान तेल कंपनियों के सकल रिफाइनिंग मार्जिन में उल्लेखनीय गिरावट आई है जिससे आरआईएल सहित
अधिकतर तेल कंपनियां लोगों की नजरों में आ गई हैं। पिछले महीने वैश्विक स्तर पर मंदी के कारण मांग में गिरावट की आशंका में सिंगापुर-दुबई हाइड्रोक्रैकिंग रिफाइनिंग मार्जिन में 57 फीसदी की गिरावट आई। बीएस रिसर्च द्वारा संकलित ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के अनुसार, यह अब करीब 16.24 डॉलर प्रति बैरल तक बढ़ गया है। आरआईएल ने निवेशकों के साथ बातचीत के दौरान मंदी संबंधी इस प्रकार की आशंकाएं जताई। कंपनी ने कहा कि तेल कंपनियों के लिए इस प्रकार की चुनौतियां बरकरार रहेंगी।
आरआईएल के संयुक्त मुख्य वित्तीय अधिकारी वी श्रीकांत ने शुक्रवार को कहा, ‘मंदी की आशंकाएं तेल बाजार के फंडामेंटल्स को पार कर रही हैं। इससे मूल्य के मोर्चे पर चुनौतियां बढ़ सकती हैं।’
बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमतों में भी मांग संबंधी चिंताओं की झलक मिलती है। पिछले कुछ सप्ताह के दौरान इसमें काफी उतार-चढ़ाव दिखा और आपूर्ति संबंधी व्यवधान के बाद दोबारा तेजी से पहले 100 डॉलर प्रति बैरल तक लुढ़क गया। फिलहाल यह पिछले कारोबारी दिवस के मुकाबले 3.3 फीसदी घटकर 103.2 डॉलर प्रति बैरल रह गया।
आरआईएल के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (उत्खनन एवं उत्पादन) संजय रॉय ने कहा कि कंपनी को कृष्णा गोदावरी धीरूभाई 6 (केजी-डी6) गैस के लिए बिक्री की कीमत भी मौजूदा 9.92 डॉलर प्रति मिलियन ब्रिटिश थर्मल यूनिट (एमएमबीटीयू) से अधिक होने की भी उम्मीद है। केंद्र सरकार हर छह महीने बाद अंतरराष्ट्रीय दरों के आधार पर गैस की कीमतें निर्धारित करती हैं। पुराने ब्लॉक से उत्पादित गैस की कीमतें 1 अप्रैल के बाद देागुना से अधिक बढ़कर 6.1 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू हो गईं जबकि गहरे समुद्री क्षेत्रों (आरआईएल के केजी-डी4 जैसे ब्लॉक) से उत्पादित गैस की कीमत बढ़कर 9.92 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू हो गई। लेकिन रॉय ने कहा कि ये कीमतें वैश्विक दरों में अनुरूप नहीं हैं। रॉय ने कहा, ‘हम देखते हैं कि कीमतों में तेजी रहे अथवा गिरावट घरेलू मूल्य सीमा अवरुद्ध हो गई है। हम अधिकतम कीमतों को हटाने पर जोर दे रहे हैं। कुल मिलाकर हमारा मानना है कि 2022-23 में भी गैस मूल्य प्राप्तियां अधिक रहेंगी।’आरआईएल ने अप्रैल से जून तिमाही के दौरान केजी-डी6 ब्लॉक के नए क्षेत्रों से 1.9 करोड़ मानक घन मीटर प्रति दिन गैस का उत्पादन किया।