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टायर विनिर्माताओं के शेयरों पर बना रह सकता है दबाव

Last Updated- December 11, 2022 | 11:13 PM IST

सूचीबद्घ टायर निर्माताओं को प्राकृतिक रबर कीमतों में भारी तेजी, ऊंची कच्चे तेल की कीमतों और सीमित कीमत वृद्घि को देखते हुए भविष्य में मार्जिन चिंताओं का सामना करना पड़ सकता है। पिछले साल दिसंबर में अपने निचले स्तरों से प्राकृतिक रबर कीमतें 45 प्रतिशत बढ़ी हैं और मौजूदा समय में 192 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास हैं। दूसरी तिमाही के मुकाबले, मौजूदा समय में वृद्घि 17 प्रतिशत रही है। इसी तरह, जहां कच्चे तेल की कीमतें 80 डॉलर प्रति बैरल के निशान से नीचे आ गई हैं, वहीं ये अगस्त के निचले स्तर के मुकाबले अभी भी 17 प्रतिशत ऊपर बनी हुई हैं। जहां प्राकृतिक रबर कीमतों का कच्चे माल की लागत में 35-40 प्रतिशत का योगदान है, वहीं कच्चे तेल डेरिवेटिव का टायर निर्माताओं की उत्पादन लागत में 40-45 प्रतिशत योगदान है।
प्रमुख टायर निर्माताओं ने वित्त वर्ष 2022 के शुरू से कच्चे माल में 33 प्रतिशत की तेजी दर्ज की है। खासकर वित्त वर्ष ही पहली दो तिमाहियों में लागत में भारी तेजी को देखते हुए कंपनियों द्वारा की गई कीमत वृद्घि लागत में हुए इजाफे की भरपाई करने में सक्षम नहीं रही है। यही वजह है कि सकल मुनाफा मार्जिन में बड़ी गिरावट देखने को मिली और यह एक साल पहले की तिमाही के मुकाबले 850-1,000 आधार अंक घट गया।
जहां कच्चे माल की कीमतों को लेकर चिंताएं बरकरार रहने की संभावना है, वहीं बाजार की नजर कीमत वृद्घि के साथ साथ मांग रुझान पर बनी रहेगी। सेमीकंडक्टर किल्ल्त की वजह से आपूर्ति संबंधित समस्या से यात्री कारों के साथ साथ दोपहिया से कमजोर मांग को बढ़ावा मिला। हालांकि कंपनियों को रीप्लेसमेंट सेगमेंट में मांग में सुधार की उम्मीद है जिसका कुल राजस्व में 80 प्रतिशत से ज्यादा योगदान है।
जेके टायर ऐंड इंडस्ट्रीज के मुख्य वित्तीय अधिकारी संजीव अग्रवाल का मानना है कि मार्जिन के मोर्चे पर अगली कुछ तिमाहियों में स्थिति में सुधार आने की संभावना है। अपने प्रतिस्पर्धियों की तरह जेके टायर भी वित्त वर्ष 2022 की पहली दो तिमाहियों में उत्पादन लागत वृद्घि का बोझ ग्राहकों पर पूरी तरह डालने में सक्षम नहीं रही।
अपोलो टायर्स ने परिचालन मुनाफा मार्जिन में 860 आधार अंक की गिरावट दर्ज की, हालांकि समेकित आधार पर यह गिरावट उसके यूरोपीय परिचालन में मार्जिन वृद्घि को देखते हुए कम थी। जून तिमाही में कीमतों में 3-4 प्रतिशत और सितंबर तिमाही में 3-7 प्रतिशत तक का इजाफा करने वाली कंपनी आगे फिर से 3-5 प्रतिशत की वृद्घि की संभावना तलाश रही है। मांग परिवेश को देखते हुए, कच्चे माल की कीमतों में तेजी का बोझ ग्राहकों पर हालांकि धीरे धीरे डाले जाने की संभावना है। जहां सिएट ने अक्टूबर में 2-3 प्रतिशत की कीमत वृद्घि की, वहीं नोमुरा रिसर्च के विश्लेषकों का मानना है कि कंपनी और कीमत वृद्घि कर सकती है। भारत की सबसे बड़ी घरेलू कंपनी एमआरएफ को लागत प्रभाव की भरपाई करने के लिए अगली कुछ तिमाहियों के दौरान 3-5 प्रतिशत की वृद्घि की संभावना है।
राजस्व के मोर्चे पर, जहां कंपनियों ने एक साल पहले की तिमाही के मुकाबले 15-30 प्रतिशत की राजस्व वृद्घि दर्ज की, वहीं एमआरएफ ने सालाना के साथ साथ तिमाही आधार पर भी अपने प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले कमजोर प्रदर्शन किया है। इलारा कैपिटल के जय काले और केतुल दलाल का मानना है कि कमजोर प्रदर्शन की आशंका ऊंची वृद्घि वो मझोले एवं भारी वाणिज्यिक वाहन ओईएम सेगमेंट के लिए कम निवेश और यात्री कार रेडियल ओईएम सेगमेंट में बाजार भागीदारी नुकसान की वजह से बढ़ गई थी।

First Published - November 28, 2021 | 11:51 PM IST

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