बीएस बातचीत
स्टार्टअप यूनिकॉर्न, डिजिटल हेल्थकेयर स्टार्टअप फार्मइजी की पैतृक एपीआई होल्डिंग्स को सूचीबद्घ कंपनी के अधिग्रहण से डायग्नोस्टिक दिग्गज थायरोकेयर में 4,546 करोड़ रुपये में बड़ी हिस्सेदारी हासिल होगी। सोहिनी दास के साथ बातचीत में थायरोकेयर के संस्थापक, चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक ए वेलुमणि ने कहा कि उन्होंने सही समय पर निवेश निकाला है और भारत में हेल्थकेयर क्षेत्र अगले दशक के दौरान 24 प्रतिशत की वृद्घि दर्ज करेगा। पेश हैं उनसे हुई बातचीत के मुख्य अंश:
आपने थायरोकेयर में अपनी पूरी हिस्सेदारी बेचने का निर्णय क्यों लिया?
इसका प्रस्ताव हमें तब मिला जब मूल्यांकन भी अच्छा था। इससे निकलने की योजना हमने पांच साल पहले ही बना ली थी। मेरी पत्नी का निधन पांच साल पहले हो गया था। कभी कभी मैं सोचता था कि ‘किसके लिए काम कर रहा हूं’। मैं चिंता की स्थिति में कोई सौदा नहीं करना चाहता था। लंबे समय से शेयर भी अच्छा प्रदर्शन नहीं कर रहा था। लेकिन पिछले 18 महीनों में इसमें तीन गुना की तेजी आई है। फिर, मैंने सोचा कि सौदा करने के लिए यह सही समय है।
ऐसी अटकल है कि उत्तराधिकार योजना के अभाव से बिक्री को बढ़ावा मिला। इस बारे में आपकी राय?
मेरा एक बेटा और एक बेटी है। वे थायरोकेयर व्यवसाय में अच्छे से जुड़े हुए हैं। उत्तराधिकार योजना को लेकर अटकलें गलत हैं। ये अटकलें बेहद सक्षम बच्चों को बदनाम कर रही हैं। लेकिन एक बात स्पष्ट है कि मेरे बच्चे इस व्यवसाय का हिस्सा बने रहना नहीं चाहेंगे। अभी यह निर्णय नहीं लिया गया है कि वे किस तरह का व्यवसाय करेंगे। दोनों बच्चे समान व्यवसाय में बने नहीं रह सकते हैं। वैसे, इस बारे में ज्यादा कुछ बताना जल्दबाजी है।
आपने बिक्री का निर्णय कब लिया, और आपने फार्मइजी को क्या चुना?
करीब चार महीने पहले मैं इस बिक्री को सहमति दी। फार्मइजी एक नया और उभरता व्यवसाय है और इससे नए प्रवर्तक जुड़े हुए हैं। फार्मइजी और डायग्नोस्टिक व्यवसाय के बीच जुगलबंदी है। इस सौदे को अंतिम रूप देने में एक महीना लगा। इसकी शुरुआत 25 मई को हुई और 25 जून को यह समाप्त हो गया। यह हेल्थकेयर क्षेत्र में सबसे बड़े सौदों में से एक है।
क्या आप बोर्ड में जगह तलाश रहे हैं?
मैं एपीआई में 5 प्रतिशत से कम हिस्सेदारी ले रहा हूं। मैं एक निवेशक के तौर पर इसमें शामिल रहूंगा न कि बोर्ड में जगह बनाने की जिंद करूंगा। मैं अपनी पूरी 66 प्रतिशत हिस्सेदारी बेच रहा हूं। वे ओपन ऑफर के जरिये यह हिस्सेदारी हासिल करेंगे, लेकिन कुल हिस्सेदारी 73 प्रतिशत के बार नहीं जा सकती।
क्या आप मानते हैं कि मूल्यांकन सही था?
करीब 18 महीने पहले, शेयर का भाव 400 रुपये था, और आज 1,300 रुपये प्रति शेयर के हिसाब से हिस्सेदारी बेची है। मैं कीमतें और ज्यादा बढऩे का इंतजार नहीं करना चाहता। इस सौदे को लेकर अटकलों के बाद, शेयर में 10 प्रतिशत तक की और तेजी
आ गई।
थायरोकेयर की सफलता के बारे में क्या कहना चाहेंगे?
मैं 15 वर्षों तक सरकारी अधिकारी था। मैं सरकारी नौकरी में सेवानिवृत हो गया होता। मेरे कई साथी अभी भी आरामदायक जीवनशैली का आनंद ले रहे हैं। मैं अब आराम करना चाहूंगा, मैंने कई वर्षों तक काफी कार्य किया है। यह एक ऐसा निर्णय है जिस पर मेरी उम्र के ज्यादातर लोग विचार करना चाहेंगे। मैंने कोयंबटूर से सिर्फ 500 रुपये में यात्रा की थी और वह एक दिलचस्प सफर था।
क्या ओमनी-चैनल हेल्थकेयर सेवाएं भविष्य की जरूरत होंगी?
भारत जैसे देश में, आपके लिए पिरामिड का शीर्ष ऑनलाइन होगा, शेष ऑफलाइन। इसका मतलब है कि 10 प्रतिशत उत्पादन को डिजिटल माध्यम तक पहुंच हासिल होगी, शेष को सिर्फ पारंपरिक आउटलेटों तक पहुंच होगी। दोनों करने या ओमनी-चैनल विकल्प होगा, बशर्ते कि इससे परिणाम में कमी न आए। प्रत्येक सेगमेंट की अपनी स्वयं की ताकतें और कमजोरियां हैं। मेरा व्यक्तिगत विचार यह हे कि पिछले 10 वर्षों में हेल्थकेयर 12 प्रतिशत सालाना चक्रवृद्घि दर से बढ़ा है, और अगले 10 वर्षों में यह दर 24 प्रतिशत रहेगी।