बढ़ती महंगाई और वैश्विक अर्थव्यवस्था में जारी अनिश्चितता के बीच इस धनतेरस सोने में निवेश लोगों के लिए शुभ हो सकता है। वैसे भी निवेश के सुरक्षित विकल्प के तौर पर निवेशकों की दिलचस्पी सोने में हमेशा रही है। कीमतें भी निवेश के लिहाज से कमोबेश आकर्षक हो गई हैं।
कमजोर वैश्विक रुझानों के बीच एमसीएक्स (MCX) पर सोने का दिसंबर वायदा शुक्रवार यानी अक्टूबर 21, 2022 को 50 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर से भी नीचे चला गया। इस तरह से देखें तो सोने की घरेलू कीमतें अपने उच्चतम स्तर से तकरीबन 11 फीसदी नीचे हैं। घरेलू बाजार (MCX) में सोने ने पिछले साल अप्रैल में 56,191 रुपये प्रति 10 ग्राम के उच्चतम स्तर को छुआ था।
सोने की वैश्विक कीमतें भी फिलहाल दो साल के निचले स्तर के करीब हैं। लंदन हाजिर बाजार (London Spot Market) में हफ्ते के अंतिम कारोबारी दिन सोना कमजोर होकर 1,620 डॉलर प्रति औंस से नीचे चला गया। जबकि अप्रैल 2020 में सोने की वैश्विक हाजिर (spot) कीमतें 1,614.96 डॉलर प्रति औंस तक नीचे चली गई थीं।
ज्यादातर जानकार यह मान रहे हैं कि सोने की कीमतें कमोबेश बॉटम आउट (bottom out) यानी निचले स्तर तक पहुंच गई हैं। हालांकि कुछ जानकार अमेरिका में ब्याज दरों में जारी बढ़ोतरी, चढते अमेरिकी बॉन्ड यील्ड (US bond yield) और डॉलर इंडेक्स (dollar index) में उछाल के मद्देनजर शॉर्ट टर्म में कीमतों में और गिरावट का अनुमान लगा रहे हैं। लेकिन मीडियम से लॉन्ग टर्म में सोने के बेहतर प्रदर्शन को लेकर ये भी आशान्वित हैं। इनकी सलाह भी मौजूदा स्तर पर थोड़ा रुक-रुक कर (buying on dips strategy) खरीद की है।
अर्थव्यवस्था में जब अनिश्चितता का दौर होता है, वैश्विक स्तर पर निवेश के सुरक्षित विकल्पों को लेकर सोने को अमेरिकी डॉलर और अमेरिकी सरकारी बॉन्ड से होड़ लेनी पडती है। लेकिन अमेरिकी सरकारी बॉन्ड के यील्ड में बढ़ोतरी से निवेशकों के लिए सोने की चमक फीकी पड़ जाती है। वैसे भी निवेशकों को सोने के ऊपर कोई यील्ड या ब्याज नहीं मिलता।
इस कैलेंडर वर्ष में अभी तक 10 वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड पर यील्ड बढ़कर तकरीबन तीन गुना हो गया है। शुक्रवार को यह 4.28 फीसदी तक पहुंच गया जबकि दिसंबर 2021 की समाप्ति पर यह महज 1.5 फीसदी था।
सोने की कीमतों का अमेरिकी डॉलर या डॉलर इंडेक्स के साथ भी मजबूत रिश्ता है। इसको ऐसे समझिए — जब डॉलर बढ़ता है तो सोने की कीमतें गिरती हैं, वहीं जब डॉलर कमजोर होता है तो सोने की चमक में इजाफा होता है।
वर्ष 2022 में डॉलर इंडेक्स अब तक 18 फीसदी से ज्यादा मजबूत हुआ है जिसकी वजह से सोना सहित अन्य कमोडिटी की कीमतों पर दबाव बना है।
अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में की जा रही बढ़ोतरी की वजह से अमेरिकी डॉलर विश्व की अन्य मुद्राओं की तुलना में मजबूत हुआ है। मजबूत डॉलर की वजह से सोना खरीदना महंगा हो जाता है। परिणामस्वरूप इस precious metal को लेकर निवेशकों की मांग पर असर पड़ता है।
जानकारों के मुताबिक, भू-राजनीतिक तनाव (geo-political tensions) और वैश्विक मंदी की चिंताओं के बावजूद, निवेश के ज्यादा सुरक्षित पनाहगाह/विकल्प (safe-haven) के तौर पर सोने में ज्यादा खरीदारी नहीं दिखी है क्योंकि निवेशकों का झुकाव बड़े पैमाने पर डॉलर इंडेक्स की ओर है। डॉलर में तेजी जारी रहने तक सोने की कीमतों पर दबाव बना रह सकता है।
हालांकि, विकसित देशों में देखी जा रही रिकॉर्ड महंगाई और बढ़ती आर्थिक अनिश्चितता से सोने की कीमत को समर्थन भी मिल रहा है।
भारतीय निवेशकों के लिए सोना रुपये में जारी गिरावट का देश में महंगाई और अन्य ऐसेट क्लास पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव के खिलाफ भी एक बचाव है। इस वजह से घरेलू बाजार में सोने की कीमतों में वृद्धि जारी रह सकती है या कम से कम मजबूत बनी रह सकती है, भले ही डॉलर इंडेक्स में उछाल और अमेरिका में उच्च बॉन्ड यील्ड के कारण वैश्विक स्तर पर यह दबाव में रहे।
मौजूदा परिस्थितियों में आप अपने पोर्टफोलियो में 10 से 15 फीसदी तक सोना रख सकते हैं। सोना पोर्टफोलियो में डाइवर्सिफिकेशन (diversification) की जरूरत भी पूरा करता है। भारत में लोगों की दिलचस्पी अभी भी फिजिकल सोने में है, लेकिन साथ में लोग अब यह भी समझने लगे हैं कि फिजिकल गोल्ड के बजाय पेपर/इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड में निवेश करना ज्यादा बेहतर है।
इसलिए आज बात इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड में निवेश के विभिन्न विकल्पों यानी सॉवरिन गोल्ड बॉन्ड (Sovereign Gold Bond), गोल्ड ईटीएफ (Gold ETF) और गोल्ड सेविंग फंड (गोल्ड म्यूचुअल फंड/Gold Mutual Fund) की करेंगे, ताकि लोगों को किसी एक विकल्प के चयन में आसानी हो सके।
कहां और कितना निवेश?
सॉवरिन गोल्ड बॉन्ड और गोल्ड ईटीएफ दोनों में कम से कम 1 ग्राम गोल्ड के बराबर वैल्यू के एक यूनिट में निवेश कर सकते हैं। जबकि गोल्ड म्यूचुअल फंड में आप न्यूनतम 1,000 रुपये से एसआईपी (SIP) शुरू कर सकते हैं। इस स्कीम यानी गोल्ड म्यूचुअल फंड के तहत गोल्ड ईटीएफ में निवेश किया जाता है। गोल्ड ईटीएफ और गोल्ड फंड में अधिकतम निवेश की कोई सीमा नहीं है। जबकि सॉवरेन बॉन्ड में एक व्यक्ति एक वित्त वर्ष में अधिकतम 4 किलोग्राम सोने की कीमत के बराबर यूनिट में निवेश कर सकता है।
ध्यान रहे गोल्ड ईटीएफ, गोल्ड फंड और सॉवरिन बॉन्ड के रिडेम्प्शन (redemption) के बाद सोने के वैल्यू के बराबर कीमत भारतीय रुपये में ही मिलेगी, फिजिकल गोल्ड नहीं।
कब मिलेगा?
गोल्ड ईटीएफ को आप स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) पर कैश ट्रेडिंग के लिए निर्धारित समय के दौरान कभी भी खरीद या बेच सकते हैं। वहीं गोल्ड फंड में निवेश को भी अन्य म्यूचुअल फंड की तरह उसके नेट ऐसेट वैल्यू (NAV) पर दिन के कारोबार के बाद बेचा जा सकता है, जबकि निवेश करने के लिए आपको फंड हाउस को अप्रोच करना होगा। फंड हाउस को अप्रोच आप या तो सीधे या ऐग्रीगेटर्स (aggregators), एजेंट वगैरह के जरिए कर सकते हैं। वहीं सॉवरिन गोल्ड बॉन्ड सरकार की तरफ से आरबीआई समय-समय/निश्चित अंतराल पर जारी करती है।
डीमैट और ट्रेडिंग अकाउंट
गोल्ड ईटीएफ के लिए डीमैट और ट्रेडिंग अकाउंट का होना जरूरी है। जबकि सॉवरिन गोल्ड बॉन्ड के लिए डीमैट और ट्रेडिंग अकाउंट का होना जरूरी नहीं है। हां, अगर आप सॉवरिन गोल्ड बॉन्ड की एक्सचेंज पर ट्रेडिंग करना चाहते हैं तो आपको बॉन्ड को डीमैट फॉर्म में लेना होगा। जिसके लिए डीमैट अकाउंट का होना जरूरी है। गोल्ड फंड के लिए डीमैट और ट्रेडिंग अकाउंट का होना जरूरी नही है। मतलब सॉवरिन गोल्ड बॉन्ड और गोल्ड ईटीएफ की तरह गोल्ड फंड की ट्रेडिंग नहीं की जा सकती।
ब्याज
सॉवरिन गोल्ड बॉन्ड में शुरुआती इन्वेस्टमेंट पर 2.5 फीसदी वार्षिक ब्याज मिलता है। यह हर 6 महीने में देय होता है। लेकिन ब्याज की रकम टैक्सेबल है। हालांकि ब्याज पर कोई टीडीएस नहीं कटता है। जबकि गोल्ड ईटीएफ और गोल्ड फंड पर आपको कुछ भी ब्याज नहीं मिलता।
एक्सपेंस/खर्च
गोल्ड ईटीएफ और गोल्ड फंड मैनेज करने के एवज में फंड हाउस निवेशक से चार्ज वसूलते हैं जिसे टोटल एक्सपेंस रेश्यो (Total Expense Ratio) कहते हैं। गोल्ड फंड को एक निश्चित अवधि से पहले रिडीम करने पर एग्जिट लोड (Exit Load) भी चुकाना होता है। जबकि सॉवरिन गोल्ड बॉन्ड में इस तरह का कोई अतिरिक्त एक्सपेंस नहीं है।
लोन
जरूरत पड़ने पर गोल्ड बॉन्ड के एवज में बैंक से लोन भी लिया जा सकता है। लेकिन गोल्ड ईटीएफ और गोल्ड फंड पर यह सुविधा नहीं है।
लिक्विडिटी (liquidity)
गोल्ड ईटीएफ को स्टॉक एक्सचेंज पर कभी भी खरीदा या बेचा जा सकता है। गोल्ड फंड को भी कभी भी रिडीम किया जा सकता है। मतलब लिक्विडिटी की समस्या यहां नहीं है। लेकिन सॉवरिन गोल्ड बॉन्ड को कभी भी बेचा नहीं जा सकता है। बॉन्ड की मैच्योरिटी पीरियड आठ वर्ष की है। लेकिन पांच साल के बाद बॉन्ड को बेचने का विकल्प यानी एग्जिट ऑप्शन है, जिसका इस्तेमाल ब्याज भुगतान की तारीख पर किया जा सकता है।
अगर आपने डीमैट फॉर्म में भी सॉवरिन गोल्ड बॉन्ड लिया है तो आप इसे स्टॉक एक्सचेंज पर कभी भी शॉर्ट यानी बेच सकते हो। लेकिन यहां आपको या तो पर्याप्त खरीदार नहीं मिलेंगे या मिलेंगे तो डिस्काउंट पर। दूसरे मैच्योरिटी से पहले रिडीम करने पर इंडेक्सेशन का फायदा जाता रहेगा। यानी गोल्ड ईटीएफ और गोल्ड फंड की तुलना में सॉवरेन बॉन्ड में लिक्विडिटी कम है।
टैक्स
अगर सॉवरिन गोल्ड बॉन्ड को मैच्योरिटी के बाद रिडीम करते हैं तो आपको रिटर्न पर कोई टैक्स नहीं देना होगा। लेकिन गोल्ड ईटीएफ और गोल्ड फंड पर इस तरह का टैक्स बेनिफिट नहीं है। फिजिकल गोल्ड, गोल्ड ईटीएफ और गोल्ड फंड पर टैक्स डेट फंड की तरह लगता है। मतलब अगर आप इन्हें खरीदने के बाद 36 महीने पूरे होने से पहले ही बेचते हैं तो उससे होने वाली कमाई को शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन (STCG) माना जाएगा और आपकी कुल आय में जोड़ दिया जाएगा। इस पर आपको अपने टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स चुकाना होगा। लेकिन अगर आप 36 महीने पूरे होने के बाद बेचते हैं तो आपको लाभ यानी कैपिटल गेन पर इंडेक्सेशन के फायदे के साथ 20 फीसदी (सेस मिलाकर 20.8 फीसदी) लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन टैक्स (LTCG) चुकाना होगा। इंडेक्सेशन के तहत पर्चेज प्राइस को महंगाई (cost inflation index) के हिसाब से बढ़ा दिया जाता है, जिससे कैपिटल गेन कम हो जाता है और टैक्स देनदारी घटती है।
सॉवरिन गोल्ड बॉन्ड को भी अगर मैच्योरिटी से पहले यानी 8 साल से पहले रिडीम करते हैं तो गोल्ड ईटीएफ और गोल्ड फंड की तरह ही टैक्स देना होगा। कहने का मतलब सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड पर टैक्स बेनिफिट तभी है जब आप उसे मैच्योरिटी पीरियड तक होल्ड करते हैं।
पेपर गोल्ड के अतिरिक्त आप डिजिटल गोल्ड (digital gold) में भी निवेश कर सकते हैं।
डिजिटल गोल्ड
डिजिटल गोल्ड सोना खरीदने बेचने का सबसे नया जरिया है। गूगल पे, पेटीएम, मोबिक्विक और फोनपे जैसे मोबाइल वॉलेट के अलावा पीसी ज्वैलर, कल्याण ज्वैलर्स, तनिष्क, सेनको गोल्ड एंड डायमंड जैसे कई ज्वैलरी ब्रांड भी डिजिटल गोल्ड उपलब्ध कराते हैं। आप सीधे एमएमटीसी-पीएएमपी, ऑगमोंट गोल्ड और सेफगोल्ड से भी डिजिटल गोल्ड खरीद सकते हैं। आप न्यूनतम 1 रुपये से डिजिटल गोल्ड में निवेश कर सकते हैं। डिजिटल गोल्ड पर भी फिजिकल गोल्ड की तरह टैक्स लगता है।
सलाह
अगर आप बॉन्ड को उसकी मैच्योरिटी पीरियड तक होल्ड कर सकते हैं तो आपके लिए सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड बेहतर है। लेकिन अगर आप कभी भी खरीदना या बेचना (लिक्विडिटी) चाहते हैं, यानी 8 साल तक होल्ड नहीं कर सकते हैं तो आपको गोल्ड ईटीएफ और गोल्ड फंड में निवेश करना चाहिए।