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अब आपदाएं सिर्फ मौसम की खबर नहीं, सीधे अर्थव्यवस्था पर हमला बन चुकी हैं

आपदा से सिर्फ जान-माल नहीं, विकास दर भी टूट रही है, सरकार ने क्यों कहा ‘यह आर्थिक संकट है’?

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हिमांशी भारद्वाज   
Last Updated- April 23, 2026 | 8:41 AM IST

आर्थिक मामलों के विभाग की सचिव अनुराधा ठाकुर ने आज कहा कि आपदाओं से जुड़े जोखिम अब केवल पर्यावरण संबंधी चिंताओं से बढ़कर दुनिया भर के वित्त मंत्रालयों के लिए गंभीर विकास और वित्तीय चुनौती बन गए हैं। उन्होंने सेंटर फॉर डिजास्टर रेजिलेंट इन्फ्रास्ट्रक्चर (सीडीआरआई) द्वारा धन जुटाने के अथक प्रयास पर आयोजित कॉन्फ्रेंस में चेतावनी दी कि क्षतिग्रस्त सड़कें, बाधित बिजली प्रणालियां और बाढ़ग्रस्त शहरी नेटवर्क अब सीधे तौर पर आर्थिक विकास में कमी, सार्वजनिक बजट पर दबाव और आजीविका में बाधाओं के रूप में तब्दील हो रहे हैं।

इस प्रकार आपदाएं अब चिंताओं से बढ़कर मुख्य नीतिगत अनिवार्यताएं बन गई हैं। ठाकुर ने आगे कहा कि लचीलापन आर्थिक रूप से समझदारी भरा है। इसमें शुरुआती सुदृढ़ीकरण से दीर्घकालिक लागत में कटौती होती है, व्यवधानों को टाला जा सकता है और यह केवल सुरक्षा कवच के बजाय उत्पादकता बढ़ाने वाले कारक के रूप में कार्य करता है। उन्होंने जोर दिया, ‘यह सिर्फ सुरक्षा उपाय नहीं है, बल्कि वास्तव में यह उत्पादकता बढ़ाने वाला निवेश है।’

उन्होंने सार्वजनिक वित्त प्रथाओं में धन मुहैया कराने के सक्रिय आपदा जोखिम ढांचों को शामिल करने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा, ‘ये ढांचे राष्ट्रीय बजट की रक्षा करने, आर्थिक स्थिरता की सुरक्षा करने और सतत विकास सुनिश्चित करने के लिए महत्त्वपूर्ण हैं।’उन्होंने आपदा जोखिमों में ‘मौलिक बदलाव’ को उजागर किया, जहां पिछले पांच दशकों में वैश्विक घटनाओं में लगभग पांच गुना वृद्धि हुई है।

First Published : April 23, 2026 | 8:41 AM IST