अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप का मंगलवार शाम को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को किया गया फोन कॉल ऐसे समय आया है जब अमेरिका और भारत नई अमेरिकी शुल्क नीतियों से तनावपूर्ण हुए संबंधों को सुधारने के लिए काम कर रहे हैं। इस कवायद में अगले सप्ताह एक भारतीय व्यापार प्रतिनिधिमंडल का अमेरिका का दौरा, भारत द्वारा अमेरिका से तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) और तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) का आयात बढ़ाना और दोनों पक्षों द्वारा छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों (एसएमआर) पर एक समझौते की संभावना की तलाश शामिल है।
मोदी और ट्रंप ने मंगलवार को 40 मिनट तक बातचीत की। अमेरिका के भारत में राजदूत सर्जियो गोर ने बाद में संकेत दिया कि दोनों पक्ष जल्द ही ऊर्जा क्षेत्र सहित कई बड़े समझौतों को अंतिम रूप देने की ओर अग्रसर हैं। गोर ने कहा कि मंगलवार की चर्चा के दौरान नेताओं ने ‘ऊर्जा सहित कुछ बड़े सौदों’ पर बात की, जो आने वाले दिनों और हफ्तों में मूर्त रूप ले सकते हैं।
भारत सरकार के सूत्रों के अनुसार भारत अमेरिका से एलएनजी और एलपीजी आयात बढ़ाने को इच्छुक है। यह पश्चिम एशिया में संघर्ष और होर्मुज स्ट्रेट की नाकेबंदी के कारण आई समस्याओं के को देखते हुए ऊर्जा के स्रोतों का दायरा व्यापक करने की कवायद का हिस्सा है।
भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने पिछले हफ्ते वाशिंगटन का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और अन्य अधिकारियों से मुलाकात कर रक्षा, परमाणु ऊर्जा, कोयला गैसीकरण और एलपीजी निर्यात में सहयोग पर चर्चा की थी।
दोनों पक्ष भारत में परमाणु ऊर्जा के सतत उपयोग और उन्नति (शांति) कानून के संदर्भ में परमाणु ऊर्जा सहयोग को देख रहे हैं। हालांकि इस मुद्दे पर किसी भी समझौते के लिए अमेरिकी कांग्रेस की मंजूरी की जरूरत होगी।
रुबियो अगले महीने भारत आ सकते हैं। साथ ही क्वाड ग्रुप की बैठक में भी बातचीत आगे बढ़ सकती है। भारत और अमेरिका के अलावा ऑस्ट्रेलिया और जापान क्वाड के सदस्य हैं।