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संजय कपूर मामले में मध्यस्थता करेंगे पूर्व सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़

सर्वोच्च न्यायालय ने दिवंगत उद्योगपति संजय कपूर के परिवार ट्रस्ट को लेकर रानी कपूर और प्रिया कपूर के बीच विवाद को आज मध्यस्थता के लिए भेज दिया

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भाविनी मिश्रा   
Last Updated- May 07, 2026 | 10:46 PM IST

सर्वोच्च न्यायालय ने दिवंगत उद्योगपति संजय कपूर के परिवार ट्रस्ट को लेकर रानी कपूर और प्रिया कपूर के बीच विवाद को आज मध्यस्थता के लिए भेज दिया। न्यायालय ने इस मामले में पूर्व मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़ को मध्यस्थ नियुक्त किया है। ‘रानी कपूर फैमिली ट्रस्ट’ दिवंगत संजय कपूर की 80 वर्षीय मां रानी कपूर के नाम पर है। 

न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां के पीठ ने सभी पक्षों की सहमति के बाद मध्यस्थता का आदेश पारित किया। न्यायालय ने सभी पक्षों को सार्वजनिक बयान देने या सोशल मीडिया के जरिये मामले पर चर्चा करने के खिलाफ चेतावनी भी दी।

पीठ ने कहा, ‘यह एक पारिवारिक विवाद है। इसे केवल परिवार तक ही सीमित रखा जाना चाहिए। इसे मनोरंजन का स्रोत नहीं बनने देना चाहिए।’ आदेश सुनाते हुए न्यायालय ने स्पष्ट किया कि मध्यस्थता प्रक्रिया परिवार के सदस्यों के बीच विवादों तक सीमित रहेगी। न्यायालय ने इस बात पर जोर दिया कि सभी पक्षों को इसमें रचनात्मक तरीके से भाग लेना चाहिए।

न्यायालय ने कहा, ‘यह एक पारिवारिक मामला होने के कारण उनके प्रयास से विवादों का जल्द से जल्द समाधान हो जाना चाहिए।’ पीठ ने कहा कि मध्यस्थ से प्रारंभिक रिपोर्ट मिलने के बाद वह मामले पर आगे विचार करेगा। मामले की अगली सुनवाई अगस्त में होगी।

यह मुकदमा रानी कपूर फैमिली ट्रस्ट के गठन और प्रबंधन पर केंद्रित है। रानी कपूर ने आरोप लगाया है कि इसे उनकी संपत्ति और सोना ग्रुप की इकाइयों पर नियंत्रण से वंचित करने के लिए धोखाधड़ी से बनाया गया था। रानी कपूर ने अपने मुकदमे में दावा किया है कि 2017 में स्ट्रोक का सामना करने के बाद उनके बेटे संजय कपूर और उनकी पत्नी प्रिया कपूर ने उनका फायदा उठाया।

उनके आरोपों के अनुसार, उन्हें सहमति लिए बिना परिसंप​त्तियों को ट्रस्ट में स्थानांतरित कर दिया गया और उन्हें प्रशासनिक औपचारिकता के बहाने दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने के लिए राजी किया गया था। उन दस्तावेजों में खाली कागजात भी थे।

पिछले साल जून में संजय कपूर की मृत्यु के बाद विवाद काफी बढ़ गया। रानी कपूर ने आरोप लगाया है कि प्रिया कपूर ने बाद में सोना ग्रुप की प्रमुख इकाइयों पर अपना नियंत्रण मजबूत करने की कोशिश की। इससे अधिकांश पारिवारिक परिसंपत्ति प्रिया कपूर और बच्चों को मिल गई जबकि उन्हें कोई हिस्सा नहीं मिला।

संपत्ति और संबंधित परिसंपत्तियों पर नियंत्रण के बारे में एक अलग मामला दिल्ली उच्च न्यायालय में भी लंबित है। उच्च न्यायालय ने 30 अप्रैल को अभिनेत्री करिश्मा कपूर के दो बच्चों द्वारा मांगी गई अंतरिम सुरक्षा प्रदान की और प्रिया सचदेव कपूर को दिवंगत संजय कपूर की परिसंप​त्तियों में किसी तीसरे पक्ष का हित तैयार करने से रोक दिया।

सर्वोच्च न्यायालय में रानी कपूर ने ट्रस्ट की संपत्तियों के हस्तांतरण पर यथास्थिति बरकरार रखने का आदेश देने का अनुरोध किया है। पिछली सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय ने मध्यस्थता के जरिये मामले को निपटाने के लिए प्रोत्साहित किया था। न्यायालय ने कहा कि 80 वर्षीय वादी (रानी कपूर) से जुड़े लंबे समय से चले आ रहे विरासत संबंधी विवाद का कोई खास मतलब नहीं है।

First Published : May 7, 2026 | 10:41 PM IST