रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के नेतृत्व में पश्चिम एशिया संकट पर बुधवार को हुई मंत्रियों के अनौपचारिक समूह (आईजीओएम) की बैठक हुई, जिसमें पाया गया कि औद्योगिक उपभोक्ता सब्सिडी वाली कीमत का लाभ उठाने के लिए औद्योगिक ईंधन के बजाय खुदरा ईंधन खरीद रहे हैं। साथ ही कुछ डीलरों द्वारा कालाबाजारी के भी मामले सामने आए हैं।
आईजीओएम की बैठक की कार्यवाही पर जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय, तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) और राज्य सरकारों ने जमीनी स्तर पर निगरानी तेज कर दी है। साथ ही उद्योग संगठनों के सदस्यों को भी इस काम से जोड़ा जा रहा है। बैठक में यह भी पाया गया कि मौजूदा व्यवधान के दौरान सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों ने ईंधन के अंतरराष्ट्रीय कीमतों का बोझ ग्राहकों पर डालने से बचने की कवायदक की और करीब 550 करोड़ रुपये रोजाना नुकसान उठाया। सरकार ने कहा, ‘यह सुविधा केवल खुदरा उपभोग के लिए है और नीति के मुताबिक वाणिज्यिक डीजल की कीमत अंतरराष्ट्रीय कीमतों के मुताबिक होती है।’
भारत अपनी ऊर्जा आपूर्ति के स्रोतों के विविधीकरण की कवायद में लगा है। इसे देखते हुए रक्षा मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे पश्चिम एशिया की स्थिति को देखते हुए देश की तैयारियां जारी रखें। सिंह ने कहा कि उर्वरक और अन्य जरूरी कृषि इनपुट की किसानों को पर्याप्त उपलब्धता बनी रहेगी, जिससे कि देश में खाद्यान्न की कीमतें स्थिर बनी रहें।