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जीएसटी कार्रवाई पर हाईकोर्ट की सख्ती, पंजीकरण निलंबन और खाते कुर्की पर बढ़ी निगरानी

कानूनी विशेषज्ञों ने इंगित किया कि देश भर के कई उच्च न्यायालयों ने हालिया वर्षों में जीएसटी रद्द करने और प्रवर्तन कार्रवाइयों को रद्द कर दिया है।

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मोनिका यादव   
Last Updated- March 17, 2026 | 10:00 PM IST

उच्च न्यायालय माल एवं सेवा कर (GST) प्रवर्तन के लिए पंजीकरण निलंबन और बैंक खाता कुर्क करने जैसे कड़े उपायों पर अपनी निगरानी बढ़ा रहे हैं। कर विशेषज्ञों का कहना है कि यह प्रवृत्ति अधिकारियों को प्रक्रियात्मक अनुशासन की ओर प्रेरित कर सकती है। बंबई उच्च न्यायालय का बॉयो-केम इंडिया प्राइवेट लिमिटेड मामले में हालिया आदेश इसी व्यापक न्यायिक प्रयास का हिस्सा माना जा रहा है।

न्यायालय ने 11 मार्च को अधिकारियों के लिए निर्देश जारी किया था। दरअसल, सरकार ने पीठ को सूचित किया था कि निलंबन वापस ले लिया जाएगा और आगे की कार्रवाई उचित प्रक्रिया के अनुसार की जाएगी। इसमें कारण बताओ नोटिस पर सुनवाई भी शामिल है। लिहाजा उच्च न्यायालय ने अधिकारियों को कंपनी का जीएसटी पंजीकरण बहाल करने का निर्देश दिया गया था।

न्यायालय ने यह भी कहा कि वसूली नोटिस पर तब तक कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए जब तक कि कानूनी प्रक्रिया का पालन न किया जाए। कानूनी विशेषज्ञों ने इंगित किया कि देश भर के कई उच्च न्यायालयों ने हालिया वर्षों में जीएसटी रद्द करने और प्रवर्तन कार्रवाइयों को रद्द कर दिया है।

दरअसल उच्च न्यायालयों ने अधिकारियों के जारी अस्पष्ट नोटिस, उचित सुनवाई प्रदान करने में विफल रहना या अस्पष्ट आदेश पारित करने आदि के कारण इन कार्रवाइयों को रद्द कर दिया है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 27 फरवरी को व्यक्तिगत सुनवाई से इनकार करने और अस्पष्ट आदेश पारित करने के कारण जीएसटी पंजीकरण रद्द करने के आदेश को निरस्त कर दिया।

First Published : March 17, 2026 | 9:49 PM IST