प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पर्वतनेनी हरीश ने कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट में वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाना, असैन्य चालक दल को खतरे में डालना और नौवहन की स्वतंत्रता में बाधा डालना अस्वीकार्य है। हरीश ने साथ ही इस बात पर जोर दिया कि सुरक्षित आवागमन से संबंधित अंतरराष्ट्रीय कानून का ‘पूरी तरह से सम्मान’ किया जाना चाहिए।
ऊर्जा और आपूर्ति प्रवाह की सुरक्षा पर संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक परिषद की एक विशेष बैठक में हरीश की ये टिप्पणियां ओमान के तट पर भारतीय ध्वज वाले एक वाणिज्यिक जहाज पर हुए हमले के कुछ दिनों बाद आईं। ओमान के अधिकारियों ने सोमालिया से आ रहे जहाज के सभी 14 चालक दल के सदस्यों को बचा लिया लेकिन यह तुरंत पता नहीं चल पाया कि हमला किसने किया।
हरीश ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि यूएनईसीओएसओसी की बैठक में उन्होंने पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण उत्पन्न हालिया ऊर्जा और उर्वरक संकट के प्रति भारत के दृष्टिकोण को साझा किया।
उन्होंने कहा, ‘संकट से निपटने के लिए अल्पकालिक और व्यवस्थागत उपायों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय सहयोग आवश्यक है।’
उन्होंने दोहराया कि वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाना, असैन्य चालक दल को खतरे में डालना और होर्मुज स्ट्रेट में नौवहन की स्वतंत्रता में बाधा डालना अस्वीकार्य है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में अंतरराष्ट्रीय कानून का पूरी तरह से सम्मान किया जाना चाहिए। होर्मुज स्ट्रेट में व्याप्त नाजुक स्थिति के बीच 13 मई को भारतीय ध्वज वाले जहाज को निशाना बनाकर हमला हुआ था।
पश्चिम एशिया संकट के बीच कतर से 20,000 टन तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) लेकर चला एक जहाज होर्मुज स्ट्रेट पार कर गुजरात के कांडला स्थित दीनदयाल बंदरगाह प्राधिकरण पहुंच गया है। अधिकारियों ने रविवार को बताया कि मार्शल आइलैंड के ध्वज वाला पोत ‘एमवी सिमी’ कतर से रवाना हुआ था और 13 मई को होर्मुज स्ट्रेट पार करने के बाद शनिवार रात करीब 11:30 बजे कांडला बंदरगाह पर पहुंचा।
अधिकारियों के अनुसार, मार्च की शुरुआत से अब तक भारतीय ध्वज वाले 13 पोत होर्मुज स्ट्रेट पार कर चुके हैं। इनमें 12 एलपीजी टैंकर और एक कच्चा तेल वाला पोत शामिल है।