महाराष्ट्र

कोल्हापुर गुड़ उद्योग की मीठी विरासत पर मिलावट की चोट, ₹300 करोड़ के कारोबार पर खतरा; गुजरात ने रोकी खरीद

कोल्हापुर और सांगली से आने वाले माल में रंग, सल्फर और अन्य रसायनों की मौजूदगी पाए जाने के बाद गुजरात के व्यापारी संघों ने यह निर्णय लिया

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सुशील मिश्र   
Last Updated- April 15, 2026 | 9:47 PM IST

Kolhapur Jaggery Industry: महाराष्ट्र के कोल्हापुर का गुड़ अपने बेहतरीन स्वाद के लिए प्रसद्धि है। यहां तैयार होने वाला गुड़ का अधिकांश हिस्सा देश के दूसरे राज्यों और विदेशी बाजारों में बिकता है। कोल्हापुर मंडी में मिल रहे मिलावटी गुड़ ने यहां के गुड़ उद्योग की साख में बट्टा लगा दिया है। गुणवत्ता संबंधी चिंताओं के चलते गुजरात के खरीदारों ने 13 अप्रैल से कोल्हापुर से गुड़ की खरीद रोक दी। बाजार में खरीदारों और आपूर्ति में कमी के कारण कोल्हापुर कृषि उपज बाजार समिति (एपीएमसी) में गुड़ की निलामी एक दिन छोड़ कर करने का फैसला किया है।

₹300 करोड़ के कारोबार पर असर

कोल्हापुर और सांगली से आने वाले माल में रंग, सल्फर और अन्य रसायनों की मौजूदगी पाए जाने के बाद गुजरात के व्यापारी संघों ने यह निर्णय लिया। व्यापारियों को निलंबन की सूचना देते हुए एक पत्र जारी किया गया है, जिससे आशंका जताई जा रही है कि गुड़ उद्योग के लगभग 300 करोड़ रुपये के वार्षिक कारोबार पर गंभीर असर पड़ सकता है। कोल्हापुर बाजार में आने वाले लगभग 90 फीसदी गुड़ को आमतौर पर गुजरात भेजा जाता है।

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गुड़ खरीद पर रोक

गुजरात के कारोबारियों का कहना है कि माधवपुरा और पाटन सहित गुजरात के व्यापारी संगठनों ने उत्पाद की गुणवत्ता को लेकर कई बार कोल्हापुर एपीएमसी से चिंता जता चुका है लेकिन वह इस पर ध्यान नहीं देते हैं। दूसरी तरफ गुजरात में खाद्य एवं औषधि प्राधिकरणों मिलावटी गुड़ प्राप्त होने पर व्यापारियों के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है। ऐसे में गुजरात के व्पापारी संगठनों ने इस क्षेत्र से गुड़ खरीद बंद करने का फैसला किया है।

कोल्हापुर गुड़ की साख पर लगा बट्टा

कोल्हापुर के प्रमुख उद्योगपति एवं महाराष्ट्र चैंबर ऑफ कॉमर्स, इंडस्ट्री एंड एग्रीकल्चर (एमएसीसीआईए) के अध्यक्ष ललित गांधी कहते हैं कि कोल्हापुर क्षेत्र का गुड़ स्थानीय बाजार की मांग पूरा करने के साथ देश के दूसरे राज्यों और यूके, यूएसए और दुबई जैसे देशों में महत्वपूर्ण निर्यात के साथ वैश्विक स्तर पर भी पहचान बनाई है। इस तरह की घटनाएं साख में बट्टा लगाने का काम करती है। वह कहते हैं कि दरअसल यहां के बाजार में कर्नाटक से भी गुड़ आता है लेकिन वह बिकता कोल्हापुर के नाम पर है।

बहुत से कारोबारी अधिक रंगीन वाले गुड़ की मांग भी करते हैं जिसके वजह से यह संकट पैदा हुआ है जो चिंता जनक है। इस तरह की घटनाओं को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार जल्द ही गुड़ उद्योग को नियमों के दायरें में लाने वाली है। जिससे किसान, कारोबारी और उपभोक्ताओं को फायदा होगा।

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गुड़ विवाद के बाद खरीद पर रोक जारी

गुजरात खाद्य एवं औषधि विभाग की मिलावटी गुड़ के खिलाफ कार्रवाई के बाद गुजरात के व्यापारी संघ ने कोल्हापुर और सांगली जिलों से 13 अप्रैल से गुड़ खरीद रोक दी है। कोल्हापुर के स्थानीय किसानों का कहना है कि गुजरात में मिला गुड़ कोल्हापुर का नहीं है। इस मुद्दे के विरोध में किसानों ने सोमवार और मंगलवार को समिति में आवक बंद रखी। इसके बाद बुधवार से समिति में फिर से गुड़ की आवक शुरू हुई है।

कोल्हापुर कृषि उपज बाजार समिति में गुड़ की आवक कम होने कारण व्यापारी, हमालों और किसानों ने एक दिन छोड़कर गुड़ की नीलामी कराने की मांग की है। बाजार समिति ने उनकी मांग को मानते हुए सोमवार (20 अप्रैल) से एक दिन छोड़कर गुड़ की नीलामी की जाएगी। हालांकि रविवार तक हर दिन निलामी होती रहेगी।

₹1.5 करोड़ से ज्यादा को हो चुका नुकसान

कोल्हापुर के स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि मिलावटी गुड़ का मुद्दा और सौदों में बार-बार होने वाली बाधाएं कोल्हापुर के गुड़ बाजार को खतरे में डाल रही हैं, जिसको देखते हुए बाजार अधिकारियों को इस पर तत्काल ध्यान देने होगा। कोल्हापुर के गुड़ कारोबारियों के मुताबिक बाजार में आमतौर पर प्रतिदिन लगभग 60 ट्रक गुड़ आता है, जिससे प्रतिदिन लगभग 60 लाख रुपये का लेन-देन होता है। 13 अप्रैल से व्यापार ठप्प होने के कारण 1.5 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हो चुका है।

First Published : April 15, 2026 | 9:47 PM IST