महाराष्ट्र

अब मुंबई की बारिश पर भी लगेगा दांव, हर बूंद का होगा सौदा; समझिए Rain Futures ट्रेडिंग कैसे होगी

NCDEX ने 29 मई से देश का पहला एक्सचेंज -ट्रेडेड वेदर डेरिवेटिव (मौसम वित्तीय साधन) अनुबंध शुरू करने की घोषणा की है

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सुशील मिश्र   
Last Updated- May 21, 2026 | 7:28 PM IST

Rain Futures Trading: हर साल मुंबई की बारिश मुंबईकरों के लिए आफत बनकर आती है लेकिन इस बार मुंबई की बारिश आफत नहीं कमाई का अवसर बनकर बरसेगी। देश का प्रमुख कमोडिटी एक्सचेंज NCDEX ने 29 मई से देश का पहला एक्सचेंज -ट्रेडेड वेदर डेरिवेटिव (मौसम वित्तीय साधन) अनुबंध शुरू करने की घोषणा की है। यह कॉन्ट्रैक्ट मुंबई में होने वाली बारिश के आंकड़ों पर आधारित होगा। यानी इस बारिश में सोना-चांदी और शेयरों की तरह मुंबई की बारिश की हर बूंद एक कीमती कमोडिटी की तरह खरीदी और बेची जाएगी।

बारिश के उतार-चढ़ाव पर लगेगा दावं

रेनमुंबई भारत की जलवायु अर्थव्यवस्था के लिए एक नए एसेट क्लास की शुरुआत है। यह एक कैश सेटल फ्यूचर्स अनुबंध होगा। जिसका आधार मुंबई और टिकट साइज एक मिमी तय किया गया है। 50 रुपये प्रति मिमी के गुणक में सौदा किया जा सकेगा। अधिकतम 50 लॉट की खरीद की जा सकेगी। इसकी वैल्यू भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के रेनफाल डेविएशन डाटा से तय होगी। यानी मोटे तौर पर मुंबई में सामान्य से ज्यादा या कम बारिश होने को लेकर ट्रेडर्स और कंपनियां दांव लगा पाएंगी।

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बारिश से होने वाले नुकसान की हेजिंग संभव

NCDEX के एमडी और सीईओ डॉ. अरुण रास्ते कहते हैं कि भारत सदियों से मॉनसून की अनिश्चिता के साथ जी रहा है। मुंबई में हर साल मॉनसून के दौरान भारी बारिश होती है। इससे आम लोगों के साथ ही ट्रांसपोर्ट, सप्लाई चेन, कंस्ट्रक्शन और बिजनेस एक्टिविटी भी प्रभावित होती है। जिससे कंपनियों को करोड़ो का नुकसान होता है। इस नुकसान पर किसी का कोई नियंत्रण भी नहीं होता है। अब इस नुकसान से बचने के लिए NCDEX पर फाइनेंशियल हेजिंग की जा सकेगी।

कैसे तैयार होगा रेनमुंबई कान्ट्रैक्ट?

यह कान्ट्रैक्ट वैज्ञानिक रुप से तैयार किये गए सीडीआर पर आधारित है। जो मॉनसून के महीनों (जून से सितंबर) के दौरान दीर्घकालिक औसत (एलपीए) से वास्तविक वर्षा विचलन को मापता है। आईएमडी से प्राप्त 30 सालों (1991-2020) के दैनिक वर्षा के आंकड़ों के आधार पर तैयार किया गया है।

यह पारंपरिक बीमा उत्पादों से अलग मौसम डेरिवेटिव्स पूरी तरह से दर्ज किए गए आंकड़ों पर निपटाए जाते हैं। जिससे नुकसान के आकलन की आवश्यकता समाप्त हो जाती है। यह प्रतिभागियों के लिए तेज निपटान चक्र और बेहतर परिचालन दक्षता में सक्षम बनाता है।

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कौन कर सकता हैं बारिश की ट्रेडिंग?

NCDEX के मुताबिक ट्रेंडिंग कोई भी कर सकता है। लेकिन खेती-किसानी, लॉजिस्टिक्स, कंस्ट्रक्शन, पावर और बैंकिंग सेक्टर इस प्रोडक्ट का इस्तेमाल कर हेजिंग के लिए खासतौर पर कर पाएंगे। क्योंकि, मौसम को लेकर ये सेक्टर काफी संवेदनशील होते हैं।

दुनिया के कई देशों में तापमान और बारिश पर आधारित डेरिवेटिव पहले से ट्रेड होते हैं, लेकिन भारत में यह पहली बार होगा जब बारिश को सीधे ट्रेडेबल कमोडिटी का दर्जा मिलेगा। NCDEX का रेनमुंबई कमोडिटी अनुबंध इस बार किसी के लिए यह सिर्फ बारिश है, लेकिन किसी के लिए यह अवसर है।

First Published : May 21, 2026 | 6:07 PM IST