पेपर लीक के आरोपों के कारण नीट यूजी की परीक्षा रद्द होने के एक दिन बाद फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन ने उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। इस बीच एनटीए के महानिदेशक अभिषेक सिंह ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया कि इस साल परीक्षा पैटर्न को ऑनलाइन में बदलने की संभावना नहीं है। सिंह ने कहा, ‘हम शेड्यूल को अंतिम रूप देने पर काम कर रहे हैं। नीट यूजी परीक्षा को ऑनलाइन कराने की संभावना नहीं है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने हमें पेन और पेपर मोड पर जारी रखने के लिए कहा है।’
बिजनेस स्टैंडर्ड को साझा किए गए विवरण के अनुसार, फेडरेशन ने अपनी याचिका में राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) के नए सिरे से गठन की मांग की है, जिसमें भविष्य में नीट आयोजित करने के लिए अधिक मजबूत, तकनीकी रूप से उन्नत और स्वायत्त निकाय बनाने का तर्क दिया गया है। उन्होंने प्रश्न पत्रों के लिए डिजिटल लॉकिंग प्रणाली की शुरुआत, कंप्यूटर-आधारित परीक्षा मॉडल की ओर बदलाव और केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को चार सप्ताह के भीतर अपनी जांच रिपोर्ट अदालत को सौंपने का निर्देश देने की भी मांग की है।
फेडरेशन के राष्ट्रीय प्रवक्ता आकाश सोनी ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया, ‘उच्चतम न्यायालय से हमारी मुख्य मांग यह है कि सबसे पहले एनटीए को पूरी तरह भंग किया जाए। पेपर लीक की इसी तरह की शिकायत 2024 में सामने आई थी। उस समय उच्चतम न्यायालय ने एक समिति का गठन किया था, लेकिन एनटीए ने कई सिफारिशों को नहीं माना।’
उन्होंने कहा कि एनटीए ने 2024 की घटना से कोई सबक नहीं सीखा और यह संस्था पहले की तरह ही काम कर रही है। सोनी ने यह भी कहा, ‘अगर हम एनटीए को परीक्षा दोबारा कराने देते हैं, तो पूरे देश में यह सवाल उठेगा कि इसकी क्या गारंटी है कि पेपर दोबारा लीक नहीं होगा।’ फेडरेशन ने अपनी याचिका में मांग की है कि नीट यूजी परीक्षा की निगरानी के लिए उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश, साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ और फोरेंसिक वैज्ञानिक की अध्यक्षता में उच्च-शक्ति निगरानी समिति की नियुक्ति की जाए।