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NIA मामलों की सुनवाई तेज करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देश, विशेष अदालतों के विस्तार पर जोर

राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण अधिनियम की धारा 11 केंद्र सरकार को सत्र न्यायालयों को विशेष एनआईए न्यायालय के रूप में नामित करने का अधिकार देती है

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भाविनी मिश्रा   
Last Updated- May 08, 2026 | 10:37 PM IST

सर्वोच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) अधिनियम के तहत गठित विशेष अदालतों में मुकदमों की सुनवाई में तेजी लाने के उद्देश्य से शुक्रवार को कई दिशानिर्देश जारी किए। न्यायालय ने आतंकवाद विरोधी कानूनों से जुड़े मामलों के लिए समर्पित बुनियादी ढांचे और न्यायिक ध्यान की आवश्यकता पर जोर दिया।

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जॉयमल्या बागची की अगुआई वाले पीठ ने निर्देश दिया कि उच्च न्यायालय के अधिकार क्षेत्र में लंबित 10 से 15 मुकदमों के लिए कम से कम एक विशेष एनआईए अदालत स्थापित की जानी चाहिए।

ये निर्देश इस साल फरवरी में स्वतः संज्ञान के साथ शुरू की गई एक कार्यवाही के दौरान पारित किए गए। इसका उद्देश्य गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम सहित विशेष कानूनों के तहत लंबित आपराधिक मुकदमों में हो रही देरी की निगरानी करना था।

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अतिरिक्त अदालतों की स्थापना के लिए खास ढांचे को स्पष्ट करते हुए पीठ ने कहा कि लंबित मुकदमों की संख्या 15 से अधिक होने पर दो विशेष अदालतें स्थापित की जानी चाहिए। अगर लंबित मामलों की संख्या 25 के पार पहुंच गई है तो तीन ऐसी अदालतें स्थापित की जानी चाहिए।

न्यायालय ने केंद्र सरकार और एनआईए से इन विशेष अदालतों की स्थापना और उनके सुचारु संचालन के लिए पर्याप्त बुनियादी ढांचे सुनिश्चित करने के लिए संबंधित उच्च न्यायालयों के साथ समन्वय करने को कहा है।

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पीठ ने कहा, ‘हम संबंधित अधिकारियों से उच्च न्यायालयों के साथ परामर्श करने और विशेष अदालतों के कामकाज के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध कराने का अनुरोध करते हैं। वहां पीठासीन अधिकारी इस अधिनियम की धारा 11 के तहत केवल मामलों की सुनवाई का कार्यभार संभालेंगे।’

राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण अधिनियम की धारा 11 केंद्र सरकार को सत्र न्यायालयों को विशेष एनआईए न्यायालय के रूप में नामित करने का अधिकार देती है।

First Published : May 8, 2026 | 10:31 PM IST