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हाईकोर्ट्स को सुप्रीम कोर्ट की दोटूक: नोटिस का खेल बंद करें, तय समय में निपटाएं जमानत याचिकाएं

उच्चतम न्यायालय ने जमानत याचिकाओं में देरी कम करने के लिए सख्त निर्देश दिए हैं, जिनमें समय-सीमा तय करना, स्थगन रोकना और स्वत: सूचीबद्ध करने जैसी प्रक्रियाएं शामिल हैं

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भाविनी मिश्रा   
Last Updated- May 11, 2026 | 10:33 PM IST

उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को लंबित जमानत याचिकाओं का त्वरित निपटारा सुनिश्चित करने के लिए कई सुझाव दिए हैं। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची के पीठ ने कहा कि लंबे समय से जमानत मिलने का इंतजार कर रहे लोगों के हित को देखते हुए उच्च न्यायालय और जांच एजेंसियां मिलकर काम करें।

पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि उच्च न्यायालय जमानत मामलों के निपटारे के लिए एक समय-सीमा निर्धारित करें और उन्हें केंद्र या राज्य सरकारों से जुड़े मामलों में नियमित रूप से सुनवाई स्थगित करने से बचना चाहिए। अदालत ने कहा, ‘ऐसी परिपाटी विकसित करनी होगी जिससे केंद्र या राज्यों को सामान्य स्थगन न दिए जाएं। उन्हें अदालत की जिम्मेदारी के बारे में बताया जाए, क्योंकि इनका पहला काम लोगों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करना है।’

अदालत ने उच्च न्यायालयों को जमानत मामलों को साप्ताहिक या पाक्षिक आधार पर नियमित रूप से सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया, जिसमें हर दो सप्ताह में स्वचालित रूप से पुनः सूचीबद्ध करने का प्रावधान हो। शीर्ष न्यायालय ने यह भी आदेश दिया कि नई जमानत याचिकाओं को वैकल्पिक दिनों में या दायर करने के एक सप्ताह के भीतर सूचीबद्ध किया जाना चाहिए। 

इतना ही नहीं, पीठ ने पहली सुनवाई से पहले ही स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश देकर प्रक्रियात्मक देरी से बचने की भी सलाह दी। जमानत याचिकाएं दायर करने वाले वकीलों को महाधिवक्ता कार्यालय या नामित राज्य एजेंसी को अग्रिम प्रतियां तामील कराने का निर्देश भी दिया।

एक महत्त्वपूर्ण प्रक्रियात्मक बदलाव के लिए पीठ ने कहा कि शुरुआती चरण में नोटिस जारी करने की मौजूदा प्रथा बंद होनी चाहिए। ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए जिससे तय तारीख पर किसी वजह से सुनवाई न हुई तो जमानत याचिका स्वत: दोबारा सूचीबद्ध हो जाए। ये निर्देश पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में जमानत याचिकाओं के निपटारे में देरी से संबंधित एक मामले में आए। इससे पहले उच्चतम न्यायालय ने उच्च न्यायालयों में जमानत और अग्रिम जमानत याचिकाओं की बढ़ती सूची पर चिंता व्यक्त की थी।

First Published : May 11, 2026 | 10:31 PM IST