उत्तर प्रदेश

UP Diesel Crisis: धान की रोपाई से पहले यूपी के तराई जिलों में डीजल के लिए हाहाकार, नेपाल तस्करी ने बढ़ाई परेशानी

किसानों का कहना है कि आधार कार्ड दिखाने पर पांच लीटर डीजल ही दिया जा रहा है

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सिद्धार्थ कलहंस   
Last Updated- May 31, 2026 | 7:53 PM IST

UP Diesel Crisis: धान की नर्सरी लगाने के समय में उत्तर प्रदेश के तराई जिलों में डीजल को लेकर हाहाकार मचा हुआ है। तराई क्षेत्रों और खासकर नेपाल सीमा से सटे उत्तर प्रदेश के जिलों में पेट्रोल पंप या तो आपूर्ति की कमी के चलते बंद मिल रहे हैं या फिर किसानों को मांग के मुकाबले बहुत कम डीजल मिल रहा है। किसानों का कहना है कि आधार कार्ड दिखाने पर पांच लीटर डीजल ही दिया जा रहा है।

नेपाल को डीजल-पेट्रोल की तस्करी रोकने के लिए तराई के जिलों में नए नियम लागू कर दिए गए हैं। अब किसानों को आधार कार्ड दिखाकर 5 लीटर डीजल दिया जा रहा है। वहीं सिंचाई के लिए ज्यादा डीजल की मांग करने पर खेतों की खतौनी आदि लगाने पर स्वीकृति पत्र जारी करने का नियम है। यूपी के महराजगंज, श्रावस्त्ती जिलों में तो सिंचाई के लिए डीजल की मांग कर रहे किसान अब पेट्रोल पंपों पर पंपिंग सेट लेकर ही पहुंच रहे हैं। उनका कहना है कि धान की नर्सरी लगाने के लिए पंपिंग सेटों में और खेत जुताई के ट्रैक्टर में ज्यादा डीजल की जरूरत है जो मिल नहीं पा रहा है।

तराई जिलों में सबसे ज्यादा संकट

वैसे तो बीते एक महीने से पूरे उत्तर प्रदेश के कस्बों व ग्रामीण क्षेत्रों में डीजल-पेट्रोल की कमी दिख रही है पर धान की बोआई की सीजन आने के साथ संकट गहरा गया है। सबसे ज्यादा दिक्कत ज्यादा मांग वाले तराई जिलों में है जहां किसानों की लाइन पेट्रोल पंपों पर देखी जा रही है। महराजगंज, श्रावस्ती, बलरामपुर, संतकबीरनगर, बहराइच और बस्ती जैसे जिलों में अधिकतर पेट्रोल पंप या तो बंद मिल रहे हैं या वहां डीजल की सीमित सप्लाई दी जा रही है।

पंप मालिकों का कहना है कि सरकारी नियम के मुताबिक किसी को भी गैलन में पांच लीटर डीजल से ज्यादा नहीं दिया जा सकता है। वहीं किसानों का कहना है कि नियम के मुताबिक मिलने वाले पांच लीटर डीजल से एक घंटे तक ही पंप चलाया जा सकता है जो नाकाफी है। हालांकि बड़े शहरों जैसे लखनऊ, कानपुर, वाराणसी में तेल की दिक्कत नहीं है पर ग्रामीण इलाकों व छोटे शहरों में संकट अधिक है।

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नेपाल को हो रही डीजल-पेट्रोल की तस्करी

लंबे अरसे तक भारत के मुकाबले नेपाल में सस्ता पेट्रोल व डीजल मिलता था पर खाड़ी संकट के बाद हालात बदल गए हैं। नेपाल में पेट्रोल की कीमत 38 फीसदी तो डीजल की 59 फीसदी तक बढ़ गयी हैं। इस समय नेपाल में पेट्रोल 218 नेपाली रूपये प्रति लीटर और डीजल 222 रूपये में बिक रहा है। वहीं भारतीय रूपये मं बदलने पर यह कीमत 135 रूपये और 138 रूपये बैठती है।

सीमावर्ती कस्बों के पेट्रोल पंप मालिकों का कहना है कि भारत से खरीद कर नेपाल में बेंचने पर होने वाला 30-35 रूपये प्रति लीटर का मुनाफा तस्करी को बढ़ा रहा है। तस्करी करने वाले महराजगंज जिले के सोनौली, सिद्धार्थ नगर के बढ़नी और श्रावस्ती के निगमा बार्डर के गांवों के रास्तों का इस्तेमाल करते हुए डीजल-पेट्रोल की तस्करी कर रहे हैं।

भारतीय पेट्रोल पंपों के मालिकों का कहना है कि बलरामपुर में सोहेलवा रेंज के जंगलों, कोयलाबास सीमा के जंगलों के रास्ते भी तेल की तस्करी की जा रही है। उनका कहना है कि तराई के इन जिलो में यही बड़ा कारण है कि पेट्रोल पंपो पर डीजल व पेट्रोल जल्दी खत्म हो जा रहा है और आपूर्ति बाधित हो रही है।

भारतीय पेट्रोल पंपों से तेल खरीद कर उसे छोटे टैंकर, पिकअप, बैलगाड़ी या भैंसागाड़ी के मार्फत जंगलों व गांवों के रास्ते नेपाल भेजा जा रहा है। पंप मालिकों का कहना है कि इस तस्करी पर लगाम लगाने के लिए ही पांच लीटर का नियम लागू किया गया है।

धान के सीजन में संकट और बढ़ेगा

भारतीय किसान यूनियन (टिकैत ग्रुप) के नेता उत्कर्ष तिवारी कहते हैं कि इस बार प्री मॉसून बारिश भी ढंग से नहीं हुई है। मॉनसून के देर से आने व कमजोर रहने का अंदेशा जताया जा रहा है। इन हालात में धान की रोपाई के लिए लगाई जाने वाली नर्सरी बहुत कुछ डीजल पंप सेटों से होने वाली सिंचाई पर ही निर्भर रहेगी। तिवारी कहते हैं कि जिस तरह से धान की नर्सरी लगना शुरू होने से पहले ही डीजल संकट दिख रहा है उससे जाहिर है कि आने वाले दिनों में संकट विकराल हो सकता है।

यूपी कांग्रेस के महासचिव रहे व पूर्व विधानसभा प्रत्याशी मुकेश सिंह चौहान का कहना है कि बढ़ी हुई कीमतें और किल्लत से किसानों के सामने विकट समस्या खड़ी हो गई है। उनका कहना है कि तमाम नियम लागू करके किसानों की खेती को चौपट किया जा रहा है।

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यूपी में नहीं है, रास्ते की दिक्कतें हैं

उत्तर प्रदेश में इंडियन ऑयल के स्टेट कोऑर्डिनेटर संजय भंडारी का कहना है कि प्रदेश में पेट्रोल, डीजल या एलपीजी की किसी तरह की कोई कमी नहीं। हर जगह डिलीवरी हो रही है। यूपी में रोज 20 लाख लीटर पेट्रोल और 33 लाख लीटर डीजल की खपत है जो आसानी से आपूर्ति की जा रही है। वहां राहत विभाग के अधिकारियों का कहना है तराई के कई जिलों में और यहां तक कि नेपाल में भी घाघरा नदी पार कर गोंडा के रास्ते टैंकर जाते हैं। इस समय पुल बन रहा है जिससे रास्ते की दिक्कत है तो पंपों पर आपूर्ति में बाधा आ रही है। उन्होंने नेपाल को पेट्रोल-डीजल भेजे जाने पर कहा कि संभव है कि कीमतों में फर्क के चलते यह हो रहा हो।

First Published : May 31, 2026 | 7:53 PM IST