प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
ईरान-अमेरिका-इजराइल तनाव के बीच खाद की संभावित किल्लत की आशंकाओं के बीच उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने राज्य में पर्याप्त उर्वरक उपलब्ध होने का दावा किया है। प्रदेश सरकार का कहना है कि इस समय राज्य में पिछले साल की तुलना में अधिक उर्वरक उपलब्ध है।
गौरतलब है कि हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से पेट्रोल-डीजल और खाद्य तेलों के कम उपयोग के साथ रासायनिक खाद की बजाय जैविक खाद के अधिक इस्तेमाल की अपील की थी। इसके बाद खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव को देखते हुए आगामी फसल सीजन में खाद की कमी की आशंका जताई जा रही थी।
इसके उलट योगी सरकार ने दावा किया है कि प्रदेश में किसानों के लिए पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध है। सरकार के अनुसार, वर्तमान में प्रदेश में 13.28 लाख टन यूरिया, 5.23 लाख टन डीएपी, 4.81 लाख टन एनपीके, 3.69 लाख टन एसएसपी और 0.93 लाख टन एमओपी सहित कुल 27.94 लाख टन उर्वरक उपलब्ध है। सरकार का दावा है कि यह मात्रा पिछले वर्ष की तुलना में 3.13 लाख मीट्रिक टन अधिक है।
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प्रदेश सरकार के प्रवक्ता ने कहा कि सरकार किसानों को उनकी जरूरत के अनुसार रासायनिक उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी के तहत कृषि विभाग द्वारा किसानों को अनुदान पर सभी प्रकार के उर्वरक उपलब्ध कराए जा रहे हैं। कृषि विभाग, रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय और भारत सरकार के सहयोग से किसानों की जरूरत के मुताबिक उर्वरकों की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। आगामी खरीफ सीजन की मांग को देखते हुए भारत सरकार द्वारा लगातार आवंटन कर उर्वरकों की आपूर्ति बनाए रखी जा रही है।
उन्होंने कहा कि अनुदानित उर्वरकों के दुरुपयोग को रोकने के लिए सरकार ने महत्वपूर्ण फैसला लिया है। अब उर्वरकों की बिक्री केवल उन किसानों को की जाएगी, जो किसान पहचान पत्र (फार्मर आईडी) उपलब्ध कराएंगे। बिक्री किसानों की जोत से संबंधित अभिलेखों के आधार पर की जाएगी। इसके अलावा कृषि विभाग ने यूरिया, डीएपी, एनपीके, एमओपी और एसएसपी जैसे अनुदानित उर्वरकों के साथ किसी अन्य उत्पाद की टैगिंग पर पूरी तरह रोक लगा दी है।
कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि उर्वरकों की खरीद के लिए फार्मर आईडी के साथ बिक्री केंद्रों पर पहुंचें और अपनी बोई गई फसल के लिए कृषि वैज्ञानिकों द्वारा सुझाई गई संतुलित मात्रा में ही उर्वरकों की खरीद और उपयोग करें।
अधिकारियों ने कहा है कि कृषि भूमि और खतौनी के आधार पर फसल की स्थिति और आवश्यकता के अनुसार अधिकतम 5 बोरी डीएपी और 7 बोरी यूरिया प्रति हेक्टेयर ही खरीदी जा सकेगी। विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे उर्वरकों की अनावश्यक खरीद और अत्यधिक उपयोग से बचें। साथ ही उर्वरकों का जरूरत से ज्यादा भंडारण न करें, क्योंकि हवा और नमी के संपर्क में आने से उनकी गुणवत्ता और क्षमता प्रभावित हो सकती है। इसलिए किसान वास्तविक आवश्यकता के अनुसार ही उर्वरक खरीदें।