अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप (File Image)
Trump Iran Deal: अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान अपने समृद्ध यूरेनियम के भंडार को सौंपने के लिए तैयार हो गया है, जिससे संकेत मिलता है कि दोनों देश शांति समझौते के करीब हैं। व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि ईरान ने वह सौंपने पर सहमति जताई है जिसे उन्होंने ‘न्यूक्लियर डस्ट’ बताया, यानी अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम, जिसे अमेरिका परमाणु हथियार बनाने में उपयोगी मानता है।
ट्रंप ने कहा कि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं है और उसने “बहुत मजबूती से” इस बात पर सहमति जताई है। उन्होंने यह भी कहा कि तेहरान भूमिगत भंडारित यूरेनियम को सौंपने पर भी राजी हो गया है।
ट्रंप ने कहा कि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं है और उन्होंने इस पर सहमति जताई है। ईरान ने इस पर बहुत मजबूती से सहमति दी है। उन्होंने हमें वह ‘न्यूक्लियर डस्ट’ वापस देने पर सहमति जताई है, जो गहराई में रखा गया है, क्योंकि हमने बी-2 बॉम्बर्स से हमला किया था।
संभावित समझौते पर उन्होंने कहा कि हमारी ईरान के साथ काफी सहमति बन गई है और कुछ बहुत सकारात्मक और महत्वपूर्ण होने वाला है। इससे तेल की सप्लाई सामान्य हो सकती है, होर्मुज जलडमरूमध्य खुला रह सकता है और सब कुछ अच्छा होगा।
हालिया तनाव के बावजूद ट्रंप ने कहा कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच संबंध बेहतर हुए हैं। उन्होंने इसका कारण चार हफ्तों तक चली बमबारी और “बहुत शक्तिशाली नाकेबंदी” को बताया। ट्रंप ने कहा कि हमारा अभी ईरान के साथ बहुत अच्छा संबंध है, भले ही इस पर विश्वास करना मुश्किल हो।
हालांकि ट्रंप ने चेतावनी भी दी कि अगर समझौता नहीं हुआ, तो फिर से संघर्ष शुरू हो सकता है। उन्होंने कहा कि अगर समझौता नहीं हुआ, तो लड़ाई फिर शुरू होगी।
उन्होंने यह भी कहा कि दोनों पक्षों के बीच अगला दौर की बातचीत इस हफ्ते के आखिर तक हो सकती है, जिससे बातचीत में तेजी के संकेत मिलते हैं। ट्रंप ने यह भी कहा कि अगर इस्लामाबाद में समझौता होता है, तो वह पाकिस्तान की यात्रा कर सकते हैं। यह बयान उसी दिन आया है जब ट्रंप ने घोषणा की कि इजरायल और लेबनान के बीच युद्धविराम पर सहमति बन गई है।
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अमेरिका और ईरान के बीच सीधी बातचीत बीते रविवार को इस्लामाबाद में 21 घंटे से ज्यादा चली, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। पाकिस्तान की मध्यस्थता में हुई इन वार्ताओं में कोई अंतिम समझौता नहीं हो सका।
ईरान का परमाणु कार्यक्रम, खासकर यूरेनियम संवर्धन, सबसे बड़ा विवाद का मुद्दा बना रहा। अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के नेतृत्व में हुई बातचीत तब टूट गई जब ईरान ने अपना परमाणु कार्यक्रम छोड़ने से इनकार कर दिया, जबकि तेहरान ने अमेरिकी रुख को “अत्यधिक” बताया।