ईरान-अमेरिका और इजराइल के बीच बढ़ता तनाव, खाड़ी देशों तक पहुंचा संघर्ष
मध्य पूर्व में ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच चल रहा तनाव लगातार गहराता जा रहा है। हाल के दिनों में इस टकराव का दायरा बढ़कर कई खाड़ी देशों तक पहुंच गया है। ईरान ने दावा किया है कि उसने क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है, जिसके बाद पूरे इलाके में सुरक्षा स्थिति और अधिक संवेदनशील हो गई है।
ईरानी राष्ट्रपति के बयान से देश में राजनीतिक हलचल
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के हालिया बयान ने देश के भीतर राजनीतिक बहस को तेज कर दिया। उनके बयान को लेकर कट्टरपंथी नेताओं और शक्तिशाली रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने नाराजगी जताई। इसके बाद राष्ट्रपति कार्यालय ने स्पष्ट किया कि यदि क्षेत्र में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों से ईरान पर हमला किया गया तो ईरान की सेना उसका कड़ा जवाब देगी।
कुछ ही घंटों बाद पेज़ेशकियन ने सोशल मीडिया पर अपना बयान दोहराया, लेकिन अपने पहले भाषण में दिए गए माफी वाले हिस्से को हटा दिया। इसी मुद्दे पर कट्टरपंथी धर्मगुरु और सांसद हमीद रसाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि राष्ट्रपति का रुख पेशेवर नहीं था और इसे कमजोर तथा अस्वीकार्य बताया।
ईरान के न्यायपालिका प्रमुख मोहसेनी-एजेई, जो अस्थायी रूप से सर्वोच्च नेता की शक्तियों को संभालने वाली तीन सदस्यीय परिषद के सदस्य भी हैं, ने कहा कि क्षेत्र के कुछ देशों की जमीन का इस्तेमाल ईरान पर हमले के लिए किया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसे हमलों का जवाब देने के लिए ईरान की कार्रवाई जारी रहेगी।
अमेरिकी ठिकानों पर हमले का दावा
ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने दावा किया कि उनके ड्रोन ने संयुक्त अरब अमीरात की राजधानी अबू धाबी के पास स्थित अल धफरा एयर बेस में मौजूद अमेरिकी एयर कॉम्बैट सेंटर को निशाना बनाया। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
इसके अलावा ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने इजराइल के एक तेल रिफाइनरी को भी निशाना बनाया। इस हमले के बाद हाइफा क्षेत्र में हवाई हमले के सायरन बजने की खबर सामने आई, लेकिन किसी बड़े नुकसान की जानकारी नहीं मिली।
बगदाद स्थित अमेरिकी दूतावास पर रॉकेट हमला
इसी दौरान इराक की राजधानी बगदाद में स्थित अमेरिकी दूतावास परिसर को भी रॉकेट से निशाना बनाए जाने की खबरें आईं। सुरक्षा सूत्रों और प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक एक मिसाइल दूतावास परिसर में बने हेलीकॉप्टर लैंडिंग पैड के पास गिरी, हालांकि इसमें कोई हताहत नहीं हुआ।
इराक के प्रधानमंत्री मोहम्मद शिया अल-सुदानी ने इस घटना के बाद सुरक्षा एजेंसियों को जिम्मेदार लोगों की तलाश करने के निर्देश दिए हैं।
ईरान के भीतर भी हुए हमले
ईरान के अंदर भी कई जगहों पर हमलों की खबरें आई हैं। स्थानीय समाचार एजेंसियों ने ईरानी तेल मंत्रालय के एक अधिकारी के हवाले से बताया कि तेहरान के पश्चिम में स्थित करज सहित तीन इलाकों में ईंधन डिपो पर हमले किए गए हैं।
खाड़ी देशों में भी हमले की घटनाएं
ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने यह भी दावा किया कि उन्होंने बहरीन में मौजूद अमेरिकी सेना के एक सैन्य अड्डे को निशाना बनाया। वहीं कतर की राजधानी दोहा में भी विस्फोटों की आवाजें सुनाई देने की जानकारी सामने आई।
पिछले एक सप्ताह के दौरान संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत, कतर, बहरीन, ओमान, सऊदी अरब और इराक में ड्रोन या मिसाइल हमलों की घटनाएं दर्ज की गई हैं। इन घटनाओं ने पूरे खाड़ी क्षेत्र में तनाव और सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया है।
इजराइल और लेबनान के बीच भी बढ़ा तनाव
इस बीच इजराइल और लेबनान के बीच भी टकराव तेज हो गया है। ईरान समर्थित संगठन हिजबुल्लाह की ओर से सीमा पार हमलों के बाद इजराइल ने लेबनान में नए हवाई हमले शुरू कर दिए हैं।
इजराइल ने लेबनान सरकार को चेतावनी दी है कि यदि उसने हिजबुल्लाह की गतिविधियों पर नियंत्रण नहीं किया तो उसे भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।
शनिवार सुबह बेरूत के दक्षिणी उपनगरों में, जहां हिजबुल्लाह का मजबूत प्रभाव है, कई इमारतें इजराइली हवाई हमलों के बाद पूरी तरह मलबे में तब्दील हो गईं। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार सोमवार से अब तक इजराइल के हमलों में लेबनान में कम से कम 294 लोगों की मौत हो चुकी है।
भारी जनहानि और सैन्य नुकसान
ईरान के संयुक्त राष्ट्र में राजदूत अमीर सईद इरावानी के अनुसार अमेरिका और इजराइल के हमलों में अब तक कम से कम 1,332 ईरानी नागरिकों की मौत हो चुकी है और हजारों लोग घायल हुए हैं। तेहरान के कई हिस्सों में जोरदार विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं।
वहीं इजराइल ने दावा किया है कि उसने ईरान के मिसाइल ठिकानों और कमांड सेंटरों पर हमले किए हैं।
ईरानी हमलों में इजराइल में अब तक 10 लोगों की मौत हुई है। इसके अलावा अमेरिकी केंद्रीय कमान के अनुसार इस संघर्ष में कम से कम छह अमेरिकी सैनिक भी मारे गए हैं। शनिवार को उनके पार्थिव शरीर अमेरिका के डेलावेयर स्थित एक वायुसेना अड्डे पर पहुंचाए गए।
हालांकि कुछ रिपोर्टों में अमेरिकी सैनिकों के पकड़े जाने का दावा किया गया था, लेकिन अमेरिकी केंद्रीय कमान ने इन दावों को खारिज कर दिया है।
ईरान के नए सुप्रीम लीडर के चयन में अमेरिकी दखल से इंकार, खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव से तेल बाजार में उथल-पुथल
मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच ईरान ने अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की उस मांग को सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने ईरान के नए सुप्रीम लीडर के चयन की प्रक्रिया में अमेरिका की भूमिका की बात कही थी। ईरान के संयुक्त राष्ट्र में स्थायी प्रतिनिधि अमीर सईद इरवानी ने इस प्रस्ताव को पूरी तरह अस्वीकार्य बताते हुए कहा कि किसी भी विदेशी देश को ईरान के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है।
इस बीच क्षेत्र में जारी संघर्ष का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजार पर भी साफ दिखाई दे रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि ईरान की रणनीति इस समय तनाव और अस्थिरता को अधिकतम स्तर तक बढ़ाने की है। इससे न केवल ऊर्जा कीमतों में तेज बढ़ोतरी हो रही है, बल्कि वैश्विक व्यापार और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क भी प्रभावित हो रहे हैं।
खाड़ी क्षेत्र में हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि तेल उत्पादन पर भी असर पड़ने लगा है। कुवैत की राष्ट्रीय तेल कंपनी ने शनिवार को अपने उत्पादन में कटौती शुरू कर दी। इससे पहले इराक और कतर भी तेल और गैस उत्पादन में कमी की घोषणा कर चुके हैं। इन कदमों से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है।
मौजूदा हालात का एक बड़ा कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का लगभग बंद हो जाना है। यह जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक माना जाता है। इसके बाधित होने से वैश्विक बाजारों में घबराहट फैल गई है और कच्चे तेल की कीमतें कई वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं।
स्थिति को देखते हुए डॉनल्ड ट्रंप ने कहा है कि जरूरत पड़ने पर अमेरिकी नौसेना खाड़ी क्षेत्र में जहाजों को सुरक्षा प्रदान कर सकती है। उनका मानना है कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है।
राजनीतिक मोर्चे पर भी ईरान के भीतर तेजी से हलचल बढ़ रही है। देश के कट्टरपंथी धार्मिक नेताओं ने नए सुप्रीम लीडर के चयन की प्रक्रिया को जल्द पूरा करने की मांग की है। ईरानी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इस मुद्दे पर महत्वपूर्ण बैठकों का दौर शुरू हो गया है और रविवार तक निर्णायक चर्चा होने की संभावना है।
ईरान में सुप्रीम लीडर का चयन 88 सदस्यों वाली असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स द्वारा किया जाता है। इस संस्था के सदस्य आयतुल्लाह हुसैन मोजाफरी ने संकेत दिया है कि असेंबली अगले 24 घंटे के भीतर बैठक कर सकती है। इस बैठक में देश के अगले सर्वोच्च धार्मिक और राजनीतिक नेता के नाम पर फैसला लिया जा सकता है।
-एजेंसी इनपुट के साथ