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Middle East Crisis: ईरान युद्ध पर ट्रंप का कड़ा रुख, कहा बातचीत नहीं बल्कि सैन्य शक्ति से ही खत्म होगा संघर्ष

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अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव से मध्य पूर्व और खाड़ी क्षेत्र में तनाव तेजी से बढ़ गया है।

Last Updated- March 08, 2026 | 9:50 AM IST
Donald Trump
US President Donald Trump

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के दूसरे सप्ताह में अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान को लेकर बेहद सख्त बयान दिया है। उन्होंने संकेत दिया कि यह संघर्ष तब तक समाप्त नहीं होगा जब तक ईरान की सैन्य क्षमता पूरी तरह खत्म नहीं हो जाती या वहां का मौजूदा नेतृत्व सत्ता में नहीं रहता। ट्रंप ने साफ कहा कि फिलहाल वह ईरान के साथ किसी भी तरह की बातचीत या समझौते के पक्ष में नहीं हैं।

एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत

शनिवार को एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत करते हुए ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और उसके सहयोगियों के हमले इतने व्यापक हो सकते हैं कि ईरान में बातचीत करने के लिए कोई नेतृत्व ही न बचे। उन्होंने कहा कि स्थिति ऐसी भी हो सकती है कि अंत में ईरान की ओर से कोई यह कहने वाला भी न बचे कि हम आत्मसमर्पण करते हैं।

ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब पश्चिम एशिया में युद्ध लगातार तेज होता जा रहा है। Israel और Iran के बीच एक सप्ताह से अधिक समय से लगातार मिसाइल और हवाई हमले हो रहे हैं। दोनों देशों के बीच बढ़ते संघर्ष ने पूरे क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा दिया है।

ईरान के राष्ट्रपति ने पड़ोसी देशों से मांगी माफी

इस बीच ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने खाड़ी क्षेत्र के पड़ोसी देशों से माफी मांगते हुए तनाव कम करने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि ईरान की सैन्य कार्रवाई से जिन पड़ोसी देशों को असुविधा या नुकसान हुआ है, उसके लिए वह व्यक्तिगत रूप से क्षमा चाहते हैं।

पेजेशकियन ने इन देशों से अपील की कि वे अमेरिका और इजरायल के हमलों में शामिल न हों। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के अस्थायी ने

तृत्व परिषद ने निर्णय लिया है कि जब तक किसी पड़ोसी देश की जमीन से ईरान पर हमला नहीं होता, तब तक ईरान उन देशों पर हमला नहीं करेगा।

ट्रंप की ‘बिना शर्त आत्मसमर्पण’ की मांग

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप पहले ही ईरान से बिना शर्त आत्मसमर्पण की मांग कर चुके हैं। हालांकि ईरान के राष्ट्रपति पेजेशकियन ने इस मांग को खारिज करते हुए इसे केवल एक कल्पना बताया। उनका कहना है कि ईरान अपनी संप्रभुता और सुरक्षा से समझौता नहीं करेगा।

इसके बावजूद ट्रंप ने ईरान की माफी को ही आत्मसमर्पण की दिशा में उठाया गया कदम बताया। उन्होंने चेतावनी दी कि शनिवार को ईरान पर और भी कड़े हमले किए जा सकते हैं और जरूरत पड़ने पर अमेरिका अपने सैन्य अभियान को और व्यापक बना सकता है।

पेजेशकियन के बयानों के बाद ईरान के भीतर भी राजनीतिक हलचल बढ़ गई है। देश के कट्टरपंथी गुटों ने उनकी टिप्पणी की आलोचना की है। उनका मानना है कि इस तरह के बयान ईरान की सख्त रणनीति को कमजोर कर सकते हैं।

नेतन्याहू का ईरानी गार्ड्स को संदेश

इसी दौरान Benjamin Netanyahu ने एक टीवी संबोधन में ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के सैनिकों को संदेश दिया। उन्होंने कहा कि यदि वे हथियार डाल देते हैं तो उन्हें नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा।

नेतन्याहू ने यह भी कहा कि कई देश ईरान की गतिविधियों को लेकर इजराइल के संपर्क में हैं और वह उन सभी देशों के साथ खड़ा है जिन पर ईरान ने हमला किया है।

ईरान ने नेतृत्व में मतभेद से किया इनकार

वहीं ईरान के सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव Ali Ardashir Larijani ने सरकारी टीवी पर कहा कि युद्ध को लेकर ईरान के शीर्ष नेतृत्व में किसी तरह का मतभेद नहीं है।

उन्होंने कहा कि देश के सभी प्रमुख नेता एकजुट होकर हालात का सामना कर रहे हैं और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े फैसले सामूहिक रूप से लिए जा रहे हैं।

ईरान ने अमेरिकी सैन्य ठिकानों को बनाया निशाना, क्षेत्रीय तनाव और बढ़ा

मध्य पूर्व में अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते टकराव के बीच ईरान ने दावा किया है कि उसने क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान के बयान और उसके बाद हुई सैन्य कार्रवाइयों ने पूरे इलाके में तनाव को और बढ़ा दिया है।

दरअसल, राष्ट्रपति पेजेशकियान के एक बयान को लेकर ईरान के अंदर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया। उनके बयान पर कट्टरपंथी नेताओं और प्रभावशाली रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने नाराजगी जताई। इसके बाद राष्ट्रपति कार्यालय को सफाई देनी पड़ी कि यदि क्षेत्र में स्थित अमेरिकी ठिकानों से ईरान पर हमला किया गया तो ईरानी सेना उसका कड़ा जवाब देगी।

कुछ ही घंटों बाद पेजेशकियान ने सोशल मीडिया पर फिर से अपना बयान दोहराया, लेकिन इस बार उन्होंने अपने भाषण में कही गई उस माफी का जिक्र नहीं किया, जिससे ईरान के कट्टरपंथी नेताओं में असंतोष पैदा हुआ था।

कट्टरपंथी विचारधारा से जुड़े धर्मगुरु और सांसद हमीद रसाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर राष्ट्रपति की आलोचना करते हुए लिखा कि उनका रुख गैर पेशेवर, कमजोर और स्वीकार करने योग्य नहीं है।

इसी बीच ईरान की न्यायपालिका के प्रमुख मोहसनी एजई, जो फिलहाल सर्वोच्च नेता की शक्तियों को संभालने वाली तीन सदस्यीय परिषद का हिस्सा हैं, ने भी कड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि कुछ क्षेत्रीय देशों की जमीन का इस्तेमाल ईरान पर हमले करने के लिए किया जा रहा है और ऐसे में जवाबी कार्रवाई जारी रहेगी।

राष्ट्रपति के बयान के कुछ घंटों बाद ही ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने दावा किया कि उनके ड्रोन ने संयुक्त अरब अमीरात की राजधानी अबू धाबी के पास स्थित अल धाफरा एयर बेस पर मौजूद अमेरिकी एयर कॉम्बैट सेंटर को निशाना बनाया है। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।

रात के समय ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने यह भी कहा कि उन्होंने इज़राइल की एक तेल रिफाइनरी को निशाना बनाया। इज़राइल के हाइफा इलाके में एयर रेड सायरन बजने की सूचना मिली, हालांकि किसी बड़े नुकसान की खबर सामने नहीं आई।

इसी दौरान इराक की राजधानी बगदाद में स्थित अमेरिकी दूतावास परिसर पर भी रॉकेट हमले की खबर सामने आई। सुरक्षा सूत्रों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार परिसर को निशाना बनाकर रॉकेट दागे गए। इस घटना के बाद इराक के प्रधानमंत्री मोहम्मद शिया अल सूदानी ने सुरक्षा एजेंसियों को हमलावरों का पता लगाने और उनके खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया।

अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार एक मिसाइल अमेरिकी दूतावास परिसर के भीतर बने हेलीकॉप्टर लैंडिंग पैड पर गिरी, लेकिन इस हमले में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं मिली।

दूसरी ओर ईरान के भीतर भी हमलों की खबरें सामने आई हैं। स्थानीय समाचार एजेंसियों ने ईरान के तेल मंत्रालय के एक सूत्र के हवाले से बताया कि करज समेत तीन अलग अलग इलाकों में ईंधन भंडारण केंद्रों को निशाना बनाया गया।

ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने यह भी दावा किया कि उन्होंने बहरीन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकाने को निशाना बनाया। इसके अलावा कतर की राजधानी दोहा में भी धमाकों की आवाज सुने जाने की जानकारी सामने आई है।

दरअसल, ईरान ने अमेरिका और इज़राइल के साथ चल रहे संघर्ष के बीच उन देशों को भी निशाना बनाना शुरू कर दिया है जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं। इसके चलते खाड़ी क्षेत्र के कई देशों में सुरक्षा स्थिति को लेकर चिंता बढ़ गई है।

इसी बीच इजराइल ने भी लेबनान में नए हवाई हमले किए हैं। ये कार्रवाई उस समय हुई जब ईरान समर्थित संगठन हिजबुल्लाह ने सीमा पार से इज़राइल पर हमले किए।

पिछले एक सप्ताह के दौरान संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत, कतर, बहरीन, ओमान, सऊदी अरब और इराक जैसे देशों ने अपने क्षेत्रों में ड्रोन या मिसाइल हमलों की घटनाएं दर्ज की हैं। इन घटनाओं के कारण पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र में अस्थिरता और संघर्ष की आशंका लगातार बढ़ती जा रही है।

ईरान-अमेरिका और इजराइल के बीच बढ़ता तनाव, खाड़ी देशों तक पहुंचा संघर्ष

मध्य पूर्व में ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच चल रहा तनाव लगातार गहराता जा रहा है। हाल के दिनों में इस टकराव का दायरा बढ़कर कई खाड़ी देशों तक पहुंच गया है। ईरान ने दावा किया है कि उसने क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है, जिसके बाद पूरे इलाके में सुरक्षा स्थिति और अधिक संवेदनशील हो गई है।

ईरानी राष्ट्रपति के बयान से देश में राजनीतिक हलचल

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के हालिया बयान ने देश के भीतर राजनीतिक बहस को तेज कर दिया। उनके बयान को लेकर कट्टरपंथी नेताओं और शक्तिशाली रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने नाराजगी जताई। इसके बाद राष्ट्रपति कार्यालय ने स्पष्ट किया कि यदि क्षेत्र में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों से ईरान पर हमला किया गया तो ईरान की सेना उसका कड़ा जवाब देगी।

कुछ ही घंटों बाद पेज़ेशकियन ने सोशल मीडिया पर अपना बयान दोहराया, लेकिन अपने पहले भाषण में दिए गए माफी वाले हिस्से को हटा दिया। इसी मुद्दे पर कट्टरपंथी धर्मगुरु और सांसद हमीद रसाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि राष्ट्रपति का रुख पेशेवर नहीं था और इसे कमजोर तथा अस्वीकार्य बताया।

ईरान के न्यायपालिका प्रमुख मोहसेनी-एजेई, जो अस्थायी रूप से सर्वोच्च नेता की शक्तियों को संभालने वाली तीन सदस्यीय परिषद के सदस्य भी हैं, ने कहा कि क्षेत्र के कुछ देशों की जमीन का इस्तेमाल ईरान पर हमले के लिए किया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसे हमलों का जवाब देने के लिए ईरान की कार्रवाई जारी रहेगी।

अमेरिकी ठिकानों पर हमले का दावा

ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने दावा किया कि उनके ड्रोन ने संयुक्त अरब अमीरात की राजधानी अबू धाबी के पास स्थित अल धफरा एयर बेस में मौजूद अमेरिकी एयर कॉम्बैट सेंटर को निशाना बनाया। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।

इसके अलावा ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने इजराइल के एक तेल रिफाइनरी को भी निशाना बनाया। इस हमले के बाद हाइफा क्षेत्र में हवाई हमले के सायरन बजने की खबर सामने आई, लेकिन किसी बड़े नुकसान की जानकारी नहीं मिली।

बगदाद स्थित अमेरिकी दूतावास पर रॉकेट हमला

इसी दौरान इराक की राजधानी बगदाद में स्थित अमेरिकी दूतावास परिसर को भी रॉकेट से निशाना बनाए जाने की खबरें आईं। सुरक्षा सूत्रों और प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक एक मिसाइल दूतावास परिसर में बने हेलीकॉप्टर लैंडिंग पैड के पास गिरी, हालांकि इसमें कोई हताहत नहीं हुआ।

इराक के प्रधानमंत्री मोहम्मद शिया अल-सुदानी ने इस घटना के बाद सुरक्षा एजेंसियों को जिम्मेदार लोगों की तलाश करने के निर्देश दिए हैं।

ईरान के भीतर भी हुए हमले

ईरान के अंदर भी कई जगहों पर हमलों की खबरें आई हैं। स्थानीय समाचार एजेंसियों ने ईरानी तेल मंत्रालय के एक अधिकारी के हवाले से बताया कि तेहरान के पश्चिम में स्थित करज सहित तीन इलाकों में ईंधन डिपो पर हमले किए गए हैं।

खाड़ी देशों में भी हमले की घटनाएं

ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने यह भी दावा किया कि उन्होंने बहरीन में मौजूद अमेरिकी सेना के एक सैन्य अड्डे को निशाना बनाया। वहीं कतर की राजधानी दोहा में भी विस्फोटों की आवाजें सुनाई देने की जानकारी सामने आई।

पिछले एक सप्ताह के दौरान संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत, कतर, बहरीन, ओमान, सऊदी अरब और इराक में ड्रोन या मिसाइल हमलों की घटनाएं दर्ज की गई हैं। इन घटनाओं ने पूरे खाड़ी क्षेत्र में तनाव और सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया है।

इजराइल और लेबनान के बीच भी बढ़ा तनाव

इस बीच इजराइल और लेबनान के बीच भी टकराव तेज हो गया है। ईरान समर्थित संगठन हिजबुल्लाह की ओर से सीमा पार हमलों के बाद इजराइल ने लेबनान में नए हवाई हमले शुरू कर दिए हैं।

इजराइल ने लेबनान सरकार को चेतावनी दी है कि यदि उसने हिजबुल्लाह की गतिविधियों पर नियंत्रण नहीं किया तो उसे भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।

शनिवार सुबह बेरूत के दक्षिणी उपनगरों में, जहां हिजबुल्लाह का मजबूत प्रभाव है, कई इमारतें इजराइली हवाई हमलों के बाद पूरी तरह मलबे में तब्दील हो गईं। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार सोमवार से अब तक इजराइल के हमलों में लेबनान में कम से कम 294 लोगों की मौत हो चुकी है।

भारी जनहानि और सैन्य नुकसान

ईरान के संयुक्त राष्ट्र में राजदूत अमीर सईद इरावानी के अनुसार अमेरिका और इजराइल के हमलों में अब तक कम से कम 1,332 ईरानी नागरिकों की मौत हो चुकी है और हजारों लोग घायल हुए हैं। तेहरान के कई हिस्सों में जोरदार विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं।

वहीं इजराइल ने दावा किया है कि उसने ईरान के मिसाइल ठिकानों और कमांड सेंटरों पर हमले किए हैं।

ईरानी हमलों में इजराइल में अब तक 10 लोगों की मौत हुई है। इसके अलावा अमेरिकी केंद्रीय कमान के अनुसार इस संघर्ष में कम से कम छह अमेरिकी सैनिक भी मारे गए हैं। शनिवार को उनके पार्थिव शरीर अमेरिका के डेलावेयर स्थित एक वायुसेना अड्डे पर पहुंचाए गए।

हालांकि कुछ रिपोर्टों में अमेरिकी सैनिकों के पकड़े जाने का दावा किया गया था, लेकिन अमेरिकी केंद्रीय कमान ने इन दावों को खारिज कर दिया है।

ईरान के नए सुप्रीम लीडर के चयन में अमेरिकी दखल से इंकार, खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव से तेल बाजार में उथल-पुथल

मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच ईरान ने अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की उस मांग को सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने ईरान के नए सुप्रीम लीडर के चयन की प्रक्रिया में अमेरिका की भूमिका की बात कही थी। ईरान के संयुक्त राष्ट्र में स्थायी प्रतिनिधि अमीर सईद इरवानी ने इस प्रस्ताव को पूरी तरह अस्वीकार्य बताते हुए कहा कि किसी भी विदेशी देश को ईरान के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है।

इस बीच क्षेत्र में जारी संघर्ष का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजार पर भी साफ दिखाई दे रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि ईरान की रणनीति इस समय तनाव और अस्थिरता को अधिकतम स्तर तक बढ़ाने की है। इससे न केवल ऊर्जा कीमतों में तेज बढ़ोतरी हो रही है, बल्कि वैश्विक व्यापार और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क भी प्रभावित हो रहे हैं।

खाड़ी क्षेत्र में हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि तेल उत्पादन पर भी असर पड़ने लगा है। कुवैत की राष्ट्रीय तेल कंपनी ने शनिवार को अपने उत्पादन में कटौती शुरू कर दी। इससे पहले इराक और कतर भी तेल और गैस उत्पादन में कमी की घोषणा कर चुके हैं। इन कदमों से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है।

मौजूदा हालात का एक बड़ा कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का लगभग बंद हो जाना है। यह जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक माना जाता है। इसके बाधित होने से वैश्विक बाजारों में घबराहट फैल गई है और कच्चे तेल की कीमतें कई वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं।

स्थिति को देखते हुए डॉनल्ड ट्रंप ने कहा है कि जरूरत पड़ने पर अमेरिकी नौसेना खाड़ी क्षेत्र में जहाजों को सुरक्षा प्रदान कर सकती है। उनका मानना है कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है।

राजनीतिक मोर्चे पर भी ईरान के भीतर तेजी से हलचल बढ़ रही है। देश के कट्टरपंथी धार्मिक नेताओं ने नए सुप्रीम लीडर के चयन की प्रक्रिया को जल्द पूरा करने की मांग की है। ईरानी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इस मुद्दे पर महत्वपूर्ण बैठकों का दौर शुरू हो गया है और रविवार तक निर्णायक चर्चा होने की संभावना है।

ईरान में सुप्रीम लीडर का चयन 88 सदस्यों वाली असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स द्वारा किया जाता है। इस संस्था के सदस्य आयतुल्लाह हुसैन मोजाफरी ने संकेत दिया है कि असेंबली अगले 24 घंटे के भीतर बैठक कर सकती है। इस बैठक में देश के अगले सर्वोच्च धार्मिक और राजनीतिक नेता के नाम पर फैसला लिया जा सकता है।

-एजेंसी इनपुट के साथ

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First Published - March 8, 2026 | 9:50 AM IST

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