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हफ्ते की शख्सियत

Last Updated- December 05, 2022 | 9:15 PM IST

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के प्रबंध निदेशक डोमिनिक स्ट्रॉस कान ने इस हफ्ते की शुरुआत में आठ अप्रैल को घोषणा की कि कोष 30 अप्रैल को समाप्त हो रहे वित्त वर्ष में बजटीय घाटे की भरपाई करने के लिए अपने सोने के भंडार को कुछ खाली करने की तैयारी में है।


आईएमएफ इस दौरान अपने आय के लक्ष्य से करीब 14 करोड़ डॉलर पीछे रह गई थी। अपने वित्तीय स्थिति को सुधारने के लिए आईएमएफ के अध्यक्ष ने घोषणा की कि वह 3,217 टन सोने के भंडार में से 12 फीसदी हिस्से को खुले बाजार में या फिर केंद्रीय बैंकों को बेचेंगे। यानी आईएमएफ 403.3 टन सोने को बेचने की योजना बना रही है जिसकी बाजार कीमत 11 अरब डॉलर के करीब होने की उम्मीद है।


फ्रांसिसी अर्थशास्त्री, वकील और राजनीतिज्ञ स्ट्रॉस ने कहा कि इस पैसे को वह सरकारी बांडों में निवेश करेंगे। उन्होंने साथ ही यह भी जोड़ा कि आने वाले समय में इस कमाई के कुछ हिस्से को कॉरपोरेट बांडों में भी लगाया जाएगा। इस कदम के लिए कोष को अपने 185 सदस्यीय देशों से मंजूरी लेनी पड़ेगी।


इस मंजूरी के बाद अमेरिकी कांग्रेस को भी इस कदम पर अपनी मुहर लगानी है। चूकिं आईएमएफ के पास दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा सोने का भंडार है, इस वजह से स्ट्रॉस की इस घोषणा से सवाल खड़े किए जाने लगे कि क्या सोना बेचने से सोने के अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों पर प्रभाव पड़ेगा। हालांकि, इस बहस पर विश्लेषकों ने यह कह कर विराम लगा दिया कि सोना अब भी निवेश के लिहाज से सबसे उपयुक्त साधन माना जा रहा है।


ऐसे में स्ट्रॉस के कदम को अमल में लाने पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। 28 सितंबर 2007 को आईएमएफ से जुड़ने वाले स्ूट्रॉस काफी समय से कहते आए हैं कि वह कोष की माली हालत को सुधारने का प्रयास करेंगे। इसके बाद आईएमएफ के अध्यक्ष एक बार फिर इस बयान के जरिए चर्चा में आ गए कि दुनिया में महंगाई एक विकराल रूप धारण कर सकता है।


स्ट्रॉस ने महंगाई पर चिंता जताते हुए कहा कि खाद्य पदार्थों की कीमतें 2006 की तुलना में 48 फीसदी बढ़ गई हैं। उन्होंने साथ ही यह भी चिंता जताई की इस महंगाई की मार अफ्रीका और एशियाई देशों पर सबसे अधिक पड़ेगी। हालांकि आईएमएफ ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि 2015 तब उम्मीद है कि विश्व में बेहद गरीब लोगों की संख्या में कमी देखने को मिलेगी। इस रिपोर्ट के अनुसार 1990 से 2004 में आर्थिक रूप से बेहद कमजोर लोगों की संख्या घटकर 27.8 करोड़ रह गई है। 

First Published - April 11, 2008 | 10:32 PM IST

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