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कोविड के झटकों से 6 राज्य नहीं उबरे

Last Updated- December 11, 2022 | 4:25 PM IST

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) ने 21 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के वित्त वर्ष 2022 के आंकड़े जारी किए हैं। इससे पता चलता है कि अभी 6 राज्यों व 1 केंद्र शासित प्रदेश के लोग कोविड-19 महामारी के कारण आमदनी में आई कमी के संकट से नहीं उबर पाए हैं।

महामारी के पहले के वित्त वर्ष 20 की तुलना में वित्त वर्ष 22 में उत्तर प्रदेश (-6.08 प्रतिशत), केरल (-3.9 प्रतिशत), मेघालय (-1.8 प्रतिशत), उत्तराखंड (-1.52 प्रतिशत), झारखंड (-0.9 प्रतिशत), और पंजाब (-0.12 प्रतिशत व पुदुच्चेरी (-2.62 प्रतिशत) की आमदनी में गिरावट आई है। गुजरात और महाराष्ट्र सहित 13 राज्यों के लोगों की वित्त वर्ष 2022 की प्रति व्यक्ति आमदनी के आंकड़े नहीं मिले हैं।

बहरहाल 14 राज्यों के लोगों की प्रति व्यक्ति आमदनी में वित्त वर्ष 22 में बढ़ोतरी हुई है और उनकी आमदनी कोविड के पहले के स्तर पर पहुंच गई है। इसमें आंध्र प्रदेश पहले स्थान पर है, जहां के लोगों की प्रति व्यक्ति आमदनी में सबसे ज्यादा 9.74 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। उसके बाद बिहार (9.4 प्रतिशत), कर्नाटक (7.8 प्रतिशत), तमिलनाडु (6.6 प्रतिशत) का स्थान है। ऐसे अन्य राज्यों में हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, ओडिशा, राजस्थान, सिक्किम, तेलंगाना, त्रिपुरा, जम्मू कश्मीर और दिल्ली शामिल हैं।

राज्यों में प्रति व्यक्ति आमदनी के हिसाब से वित्त वर्ष 22 में सिक्किम पहले स्थान पर है, जहां लोगों की प्रति व्यक्ति आय 2,56,507 रुपये है। उसके बाद हरियाणा (1,79,367 रुपये), कर्नाटक (1,68050 रुपये) का स्थान है। वहीं केंद्र शासित प्रदेशों में दिल्ली के लोगों की प्रतिव्यक्ति आमदनी 2,63,477 रुपये है। बिहार की प्रति व्यक्ति आमदनी निचले स्तर पर (30,779 रुपये) बनी हुई है, जबकि इसके बाद उत्तर प्रदेश (40,432 रुपये) का स्थान है।

पश्चिम बंगाल और मणिपुर को छोड़ दें तो 32 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों की प्रति व्यक्ति आमदनी (जिनके आंकड़े उपलब्ध हैं) वित्त वर्ष 21 के दौरान गिरी थी, जब सरकार ने कोविड-19 महामारी के कारण देशव्यापी लॉकडाउन लगा दिया था।

सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकॉनमी द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक जून 2020 तिमाही में करीब 7.8 करोड़ नौकरियां गईं, जब कोविड-19 महामारी की पहली लहर आई थी। इसी तरह 2021 की जून तिमाही में जब महामारी की दूसरी लहर आई तो 1.3 करोड़ नौकरियां गईं।

वित्त वर्ष 22 में 7 राज्यों के सकल राज्य घरेलू उत्पादन (जीएसडीपी) में दो अंकों की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसमें आंध्र प्रदेश (11.43 प्रतिशत) सबसे आगे है। उसके बाद राजस्थान (11.04 प्रतिशत), बिहार (10.98 प्रतिशत), तेलंगाना (10.88 प्रतिशत), दिल्ली (10.23 प्रतिशत), ओडिशा (10.19 प्रतिशत) और मध्य प्रदेश (10.12 प्रतिशत) का स्थान है। वित्त वर्ष 22 में भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 8.7 प्रतिशत थी, जबकि वित्त वर्ष 21 में 6.6 प्रतिशत संकुचन आया था।

बीआर अंबेडकर स्कूल आफ इकोनॉमिक्स यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ एनआर भानुमूर्ति ने कहा कि जो राज्य पर्यटन पर बहुत ज्यादा निर्भर थे, वह खासकर कोविड से बहुत ज्यादा प्रभावित हुए। उन्होंने कहा, ‘इसका मतलब यह है कि केरल और पुदुच्चेरी जैसे राज्यों को आमदनी में हुए नुकसान से उबरने में अभी वक्त लगेगा और वे लंबे वक्त बाद महामारी के पहले की प्रति व्यक्ति आमदनी पर पहुंच पाएंगे। हालांकि यह आश्चर्यजनक है कि उत्तर प्रदेश अभी भी प्रतिव्यक्ति आमदनी के हिसाब से पीछे है। इससे सिर्फ यह पता चलता है कि बड़े पैमाने पर विस्थापित मजदूर घर आए हैं और वे अभी भी लाभकारी आजीविका के लिए संघर्ष कर रहे हैं।’

एक और अर्थशास्त्री ने नाम न दिए जाने की शर्त पर कहा कि उत्तर प्रदेश को महामारी के पहले के स्तर पर पहुंचने में अभी और वक्त लगेगा क्योंकि अनौपचारिक एमएसएमई क्षेत्र इसकी अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा है और छोटे उद्योगों की रिकवरी में अभी वक्त लगेगा। उन्होंने कहा, ‘केरल अभी भी विदेश से आने वाले धन में पीछे है और साथ ही सेवा क्षेत्र बहुत बुरी तरह प्रभावित हुआ है। पंजाब कृषि क्षेत्र के कारण पीछे छूटा है, जिस पर इनपुट लागत और जिंसों की कम दाम पर बिक्री की दोहरी मार पड़ रही है।’

First Published - August 22, 2022 | 11:03 PM IST

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